
काला झंडा और काली पट्टी लेकर पहुंचे ग्रामीण,प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी
जिला पंचायत सदस्य सुरेश आयाम हिरासत में…टुकुडांड की घटना से पूरे प्रतापपुर में मचा राजनीतिक भूचाल
-सोनू कश्यप-
प्रतापपुर,29 मई 2026 (घटती-घटना)। प्रतापपुर विकासखंड के टुकुडांड में आयोजित जिला स्तरीय जन समस्या निवारण एवं सुशासन त्यौहार शिविर शुक्रवार को अचानक उस समय हंगामे और भारी विवाद में बदल गया, जब जिला पंचायत सदस्य एवं किसान नेता सुरेश आयाम अपने समर्थकों और बड़ी संख्या में ग्रामीणों के साथ काला झंडा और हाथों में काली पट्टी बांधकर विरोध प्रदर्शन करने पहुंच गए। ‘सुशासन त्योहार ढकोसला है ‘, ‘किसानों को न्याय दो ‘, ‘जनता की समस्याओं का समाधान करो’ और ‘भ्रष्टाचार बंद करो’ जैसे नारों से पूरा शिविर स्थल गूंज उठा। अचानक हुए इस उग्र विरोध प्रदर्शन से प्रशासनिक अमले में हड़कंप मच गया और कुछ ही देर में पूरा कार्यक्रम तनावपूर्ण माहौल में बदल गया। प्रतापपुर क्षेत्र में इस तरह का उग्र विरोध पहली बार देखने को मिला, जिसके बाद यह मामला पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बन गया है। जानकारी के अनुसार जिला प्रशासन द्वारा टुकुडांड में बड़े स्तर पर जन समस्या निवारण शिविर आयोजित किया गया था। शिविर में ग्रामीणों की समस्याओं के समाधान,शासन की योजनाओं की जानकारी तथा विभागीय शिकायतों के निराकरण का दावा किया जा रहा था। कार्यक्रम में प्रतापपुर और जिले के कई वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी,विभागीय कर्मचारी तथा जनप्रतिनिधि मौजूद थे। इसी दौरान जिला पंचायत सदस्य सुरेश आयाम अपने समर्थकों और ग्रामीणों के साथ मौके पर पहुंचे। सभी प्रदर्शनकारी विरोध जताने के लिए हाथों में काला झंडा और बांहों पर काली पट्टी बांधे हुए थे। शिविर स्थल पहुंचते ही प्रदर्शनकारियों ने प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी। प्रदर्शनकारियों का आरोप था कि क्षेत्र में किसानों को खाद नहीं मिल रही है, जल जीवन मिशन के कई कार्य अधूरे पड़े हैं, ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल संकट बना हुआ है और सड़क व्यवस्था पूरी तरह बदहाल हो चुकी है। इसके अलावा विभिन्न विभागों में कथित भ्रष्टाचार और लापरवाही को लेकर भी प्रदर्शनकारियों ने प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए। ग्रामीणों का कहना था कि कई बार विभागीय अधिकारियों और प्रशासन को ज्ञापन सौंपने के बावजूद समस्याओं का समाधान नहीं हुआ, जिससे मजबूर होकर उन्हें विरोध प्रदर्शन करना पड़ा। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार प्रदर्शन के दौरान जिला पंचायत सदस्य सुरेश आयाम और प्रशासनिक अधिकारियों के बीच तीखी बहस भी हुई। प्रदर्शनकारियों का आरोप था कि अधिकारी केवल कागजों में सुशासन का दावा कर रहे हैं,जबकि जमीनी स्तर पर आम जनता परेशान है। मौके पर मौजूद अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों को शांत कराने और समझाने का प्रयास किया,लेकिन प्रदर्शनकारी लगातार नारेबाजी करते रहे। कुछ देर के लिए शिविर स्थल का माहौल पूरी तरह तनावपूर्ण हो गया और कार्यक्रम में अफरा-तफरी जैसी स्थिति निर्मित हो गई। स्थिति बिगड़ते देख प्रतापपुर पुलिस ने हस्तक्षेप किया। पुलिस अधिकारियों के निर्देश पर प्रदर्शनकारियों को हटाने की कार्रवाई शुरू की गई। इस दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच जमकर धक्का-मुक्की हुई। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक कई प्रदर्शनकारी पुलिस कार्रवाई का विरोध करते हुए जमीन पर बैठ गए और गिरफ्तारी देने से इनकार करने लगे। इसके बाद पुलिस ने बलपूर्वक कार्रवाई करते हुए जिला पंचायत सदस्य सुरेश आयाम सहित कई प्रदर्शनकारियों को खींचते-घसीटते हुए पुलिस वाहन में बैठाया और थाना प्रतापपुर ले गई। बताया जा रहा है कि थाना ले जाते समय भी प्रदर्शनकारी पूरे रास्ते प्रशासन और शासन के खिलाफ नारेबाजी करते रहे। थाना परिसर में भी कुछ देर तक हंगामे जैसी स्थिति बनी रही। बाद में स्थानीय पुलिस और अधिकारियों की समझाइश के बाद सभी प्रदर्शनकारियों को छोड़ दिया गया। हालांकि इस पूरी घटना के वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गए हैं। फेसबुक,इंस्टाग्राम और व्हाट्सएप ग्रुपों में वायरल वीडियो को लेकर लोग तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं। पूरे प्रतापपुर नगर और विकासखंड में यह मामला दिनभर चर्चा का विषय बना रहा। घटना के बाद क्षेत्र में राजनीतिक माहौल भी गरमा गया है। ग्रामीणों और समर्थकों ने प्रशासनिक कार्रवाई को जनआवाज दबाने का प्रयास बताया है। उनका कहना है कि यदि जनता अपनी समस्याएं भी नहीं उठा सकती,तो सुशासन शिविर आयोजित करने का क्या औचित्य है। वहीं प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि सरकारी कार्यक्रम में व्यवधान उत्पन्न होने और कानून व्यवस्था बिगड़ने की आशंका के चलते आवश्यक कार्रवाई की गई। अधिकारियों के मुताबिक स्थिति नियंत्रण से बाहर जा रही थी, इसलिए पुलिस को हस्तक्षेप करना पड़ा। टुकुडांड में हुए इस हाईवोल्टेज हंगामे ने सुशासन त्यौहार की कार्यप्रणाली और प्रशासनिक संवेदनशीलता पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यदि उनकी समस्याओं का जल्द समाधान नहीं हुआ,तो आने वाले दिनों में आंदोलन और उग्र हो सकता है।
फिलहाल पूरे क्षेत्र की नजर अब प्रशासन के अगले कदम और किसानों-ग्रामीणों की मांगों पर टिकी हुई है।
घटती-घटना – Ghatati-Ghatna – Online Hindi News Ambikapur घटती-घटना – Ghatati-Ghatna – Online Hindi News Ambikapur