17 हत्या मामलों में 29 दोषियों को कठोर सजा
नए कानून के बाद न्याय व्यवस्था हुई और सख्त
सूरजपुर,29 मई 2026 (घटती-घटना)। सूरजपुर जिले में हत्या जैसे गंभीर अपराधों पर माननीय न्यायालय ने कड़ा रुख अपनाते हुए पिछले पांच महीनों में 17 हत्या प्रकरणों में 29 आरोपियों को कठोर कारावास की सजा सुनाई है,भारतीय न्याय संहिता लागू होने के बाद यह कार्रवाई जिले में अपराधियों के लिए बड़ा संदेश मानी जा रही है कि अब केवल गवाहों के भरोसे नहीं, बल्कि वैज्ञानिक और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर भी अपराधियों को सजा मिल रही है।
डेयरी फार्म में महिला हत्या,आरोपी को उम्रकैद– ग्राम पसला स्थित डेयरी फार्म में हुई महिला हत्या के मामले में न्यायालय ने आरोपी को दोषी मानते हुए आजीवन कारावास और अर्थदंड से दंडित किया, मामले में प्रस्तुत परिस्थितिजन्य और वैज्ञानिक साक्ष्य न्यायालय के फैसले का आधार बने।
नावापारा हत्या कांड में 10 वर्ष की सजा-कॉलेज रोड नावापारा सूरजपुर स्थित एक मकान में महिला की हत्या मामले में आरोपी को न्यायालय ने 10 वर्ष की कठोर कारावास की सजा सुनाई, न्यायालय ने कहा कि घरेलू विवाद या व्यक्तिगत तनाव हत्या का औचित्य नहीं बन सकता।
पत्नी ने पति की हत्या की,मिली उम्रकैद- चौकी लटोरी क्षेत्र के ग्राम द्वारिकापुर गाड़ा झरिया में पत्नी द्वारा धारदार हथियार से पति की हत्या किए जाने के मामले में न्यायालय ने आरोपी महिला को आजीवन कारावास की सजा सुनाई, यह मामला पूरे क्षेत्र में काफी चर्चित रहा था।
जमीन विवाद बना मौत की वजह- थाना चांदनी क्षेत्र के ग्राम विशालपुर में जमीन विवाद को लेकर चार लोगों ने मिलकर एक व्यक्ति की हत्या कर दी थी,न्यायालय ने चारों आरोपियों को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई।
चाचा ने भतीजे की ली जान-ग्राम अवन्तिकापुर में पारिवारिक विवाद के चलते चाचा द्वारा भतीजे की हत्या करने के मामले में न्यायालय ने आरोपी को 7 वर्ष की कठोर कारावास की सजा सुनाई,न्यायालय ने टिप्पणी की कि पारिवारिक रिश्तों में हिंसा समाज के लिए गंभीर चिंता का विषय है।
पेड़ से बांधकर बेटे की हत्या
थाना सूरजपुर के ग्राम पर्री गौटियापारा में एक युवक को उसके पिता और भाई द्वारा पेड़ से बांधकर मारपीट कर हत्या कर देने का मामला बेहद सनसनीखेज रहा,न्यायालय ने दोनों आरोपियों को 10-10 वर्ष की कठोर कारावास की सजा सुनाई।
अब गवाह पलटे तो भी बचना मुश्किल
इन मामलों में सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह रहा कि कई प्रकरणों में चश्मदीद गवाहों के बयान बदलने के बावजूद न्यायालय ने अन्य मजबूत साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों को दोषी माना,मेडिकल रिपोर्ट, पोस्टमार्टम रिपोर्ट, परिस्थितिजन्य साक्ष्य,डिजिटल रिकॉर्ड,फोरेंसिक जांच और तकनीकी विश्लेषण अब न्यायिक प्रक्रिया में निर्णायक भूमिका निभा रहे हैं।
अपराधियों को स्पष्ट संदेश-
नए कानून लागू होने के बाद न्यायालयों की कार्यशैली में तेजी और सख्ती दोनों देखने को मिल रही है,अब अपराध के बाद गवाहों को प्रभावित कर मामला कमजोर करने की पुरानी रणनीति उतनी कारगर नहीं रह गई है, सूरजपुर न्यायालय के इन फैसलों को कानून व्यवस्था और न्यायिक प्रक्रिया में बढ़ते वैज्ञानिक दृष्टिकोण का बड़ा उदाहरण माना जा रहा है।
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