

निर्माणाधीन 200 बिस्तरीय जिला अस्पताल का कलेक्टर ने किया निरीक्षण,लंबे इंतजार के बाद फिर जागी उम्मीद
बैकुंठपुर,29 मई 2026 (घटती-घटना)। बैकुंठपुर में निर्माणाधीन 200 बिस्तरीय नवीन जिला चिकित्सालय एक बार फिर चर्चा में है,वर्षों से अधूरी पड़ी इस बहुप्रतीक्षित स्वास्थ्य परियोजना का गुरुवार को कोरिया कलेक्टर रोक्तिमा यादव ने निरीक्षण किया, निरीक्षण के दौरान उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि अब निर्माण कार्य में मंटिटी और टाइमिंग पर किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा,जिले के लोगों के लिए यह अस्पताल केवल एक भवन नहीं,बल्कि बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं की उम्मीद है,लंबे समय से लोग आधुनिक जिला अस्पताल की मांग कर रहे थे,क्योंकि वर्तमान स्वास्थ्य व्यवस्था बढ़ती आबादी और मरीजों के दबाव के मुकाबले काफी सीमित मानी जा रही है।
जानकारी के अनुसार जिला खनिज संस्थान न्यास (डीएमएफ) द्वारा वर्ष 2021 में इस परियोजना के लिए लगभग 35 करोड़ रुपये की प्रशासकीय स्वीकृति दी गई थी, वहीं सीजीएमएससी लिमिटेड द्वारा करीब 31 करोड़ रुपये की तकनीकी स्वीकृति जारी की गई थी। निर्माण कार्य 10 मई 2022 से शुरू हुआ था,लेकिन सरकारी परियोजनाओं की पुरानी बीमारी फंड की कमी और धीमी गति यहां भी सामने आई,शुरुआती दौर में 13 करोड़ रुपये का आबंटन मिला और निर्माण शुरू हुआ, लेकिन बाद में अतिरिक्त राशि नहीं मिलने के कारण काम बीच में ही रुक गया, धीरे-धीरे निर्माणाधीन भवन अधूरा खड़ा रह गया और लोगों की उम्मीदें भी अधर में लटक गईं, अब हाल ही में डीएचएस मद से 23 करोड़ 59 लाख रुपये की स्वीकृति मिलने के बाद काम ने फिर रफ्तार पकड़ी है। निर्माण एजेंसी का दावा है कि अगले एक वर्ष में अस्पताल भवन तैयार कर लिया जाएगा।
कलेक्टर का सख्त संदेश—अब देरी नहीं चलेगी…
निरीक्षण के दौरान कलेक्टर रोक्तिमा यादव ने निर्माण एजेंसी और अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि अब काम में लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी,उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री और स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री द्वारा हाल ही में स्वास्थ्य परियोजनाओं की समीक्षा की गई है,जिसमें गुणवत्ता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं,कलेक्टर ने कहा कि करोड़ों रुपये की लागत से बन रहे इस अस्पताल में निर्माण गुणवत्ता से किसी प्रकार का समझौता नहीं होना चाहिए,उन्होंने समयसीमा का पालन करने और तय मानकों के अनुरूप निर्माण कार्य करने पर विशेष जोर दिया।
आधुनिक सुविधाओं से लैस होगा अस्पताल
प्रस्तावित अस्पताल भवन तीन मंजिला होगा और इसमें आधुनिक स्वास्थ्य सुविधाएं विकसित की जाएंगी,निरीक्षण के दौरान कलेक्टर ने ओपीडी, वार्ड,ऑपरेशन थिएटर,पैथोलॉजी लैब,एक्सरे कक्ष,सोनोग्राफी कक्ष, मेडिकल स्टोर,लिफ्ट,रैम्प और अन्य सुविधाओं की जानकारी ली,इसके साथ ही मरीजों और उनके परिजनों के लिए पार्किंग,कैंटीन,पेयजल, बिजली बैकअप और पानी निकासी जैसी मूलभूत व्यवस्थाओं पर भी चर्चा की गई, कलेक्टर ने अधिकारियों से कहा कि यह अस्पताल केवल भवन निर्माण तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि यहां आधुनिक जांच और उपचार सुविधाएं भी उपलब्ध होनी चाहिए ताकि लोगों को बड़े शहरों का रुख न करना पड़े।
बुजुर्गों और दिव्यांगजनों की सुविधा पर विशेष जोर
निरीक्षण के दौरान कलेक्टर ने विशेष रूप से बुजुर्गों और दिव्यांगजनों की सुविधाओं पर ध्यान देने के निर्देश दिए,उन्होंने कहा कि अस्पताल में रैम्प, लिफ्ट और आसान आवागमन की व्यवस्था प्राथमिकता के साथ सुनिश्चित की जाए,सरकारी अस्पतालों में अक्सर देखा जाता है कि मरीज इलाज से पहले ही सीढि़यों और अव्यवस्था से परेशान हो जाते हैं, इसी को ध्यान में रखते हुए कलेक्टर ने निर्देश दिए कि अस्पताल ऐसा बने जहां हर व्यक्ति आसानी से पहुंच सके।
स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर नई उम्मीद
कोरिया जिले के लोग लंबे समय से बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं की मांग करते रहे हैं, गंभीर मरीजों को अक्सर अंबिकापुर,बिलासपुर या रायपुर रेफर करना पड़ता है,ऐसे में 200 बिस्तरीय आधुनिक जिला अस्पताल का निर्माण क्षेत्र के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है,स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि अस्पताल समय पर पूरा हो जाता है और यहां पर्याप्त डॉक्टर, उपकरण तथा आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती हैं,तो हजारों मरीजों को बेहतर इलाज मिल सकेगा।
अब जनता की नजर निर्माण की रफ्तार पर…
हालांकि निरीक्षण और निर्देशों के बाद उम्मीद जरूर बढ़ी है,लेकिन जनता अब केवल घोषणाएं नहीं बल्कि जमीन पर परिणाम देखना चाहती है, क्योंकि यह परियोजना पहले भी कई बार जल्द पूरा होगा के वादों के बीच धीमी पड़ चुकी है,अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या इस बार प्रशासनिक सख्ती और वित्तीय स्वीकृति के बाद अस्पताल तय समय पर बन पाएगा,या फिर यह परियोजना भी सरकारी फाइलों और अधूरे निर्माण की कहानी बनकर रह जाएगी,फिलहाल इतना तय है कि बैकुंठपुर का यह निर्माणाधीन अस्पताल अब सिर्फ ईंट और सीमेंट का ढांचा नहीं, बल्कि जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था की सबसे बड़ी उम्मीद बन चुका है।
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