साथी आरक्षक की मौत के 126 दिन बाद भी सूरजपुर पुलिस के हाथ खाली
जांच अधिकारी पर आरोपी को बचाने क ा आरोप,परिजनों ने दी उग्र आंदोलन की चेतावनी
सूरजपुर,29 मई 2026 (घटती-घटना)। कर्तव्य निभाकर घर लौट रहे एक आरक्षक की दर्दनाक मौत को 126 दिन बीत चुके हैं, लेकिन सूरजपुर पुलिस अब तक न तो घटनाकारी वाहन का स्पष्ट खुलासा कर पाई है और न ही आरोपियों पर ठोस कार्रवाई हो सकी है। इस मामले ने पुलिस विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब खुद खाकी पहनने वाले एक जवान को न्याय नहीं मिल पा रहा,तो आम जनता की सुरक्षा और न्याय का दावा कितना मजबूत है? आरक्षक अभय कुमार पाण्डेय की 2 फरवरी की शाम सड़क दुर्घटना में मौत हो गई थी। बताया जाता है कि वह ड्यूटी पूरी कर घर लौट रहे थे, तभी तेज रफ्तार वाहन ने उन्हें अपनी चपेट में ले लिया। हादसा इतना भयावह था कि मौके पर ही उनकी मौत हो गई। लेकिन घटना के चार महीने बाद भी मामले की जांच अधूरी है और परिवार न्याय के लिए दर-दर भटकने को मजबूर है।
‘हाईटेक पुलिस’ की जांच पर उठा सवाल
मृतक आरक्षक के परिजनों का आरोप है कि खुद को आधुनिक और हाईटेक बताने वाली सूरजपुर पुलिस अब तक उस पिकअप वाहन और चालक तक नहीं पहुंच पाई,जिसने उनके बेटे की जान ली। परिजनों का कहना है कि घटना के तुरंत बाद प्रत्यक्षदर्शियों ने पुलिस को पूरी जानकारी दे दी थी,लेकिन पुलिस ने उस दिशा में गंभीरता से काम नहीं किया। परिवार का आरोप है कि हादसे में शामिल वाहन उत्तरप्रदेश नंबर की पिकअप थी और शुरुआती दौर में पुलिस ने वाहन और चालक दोनों को पकड़ भी लिया था,लेकिन बाद में छोड़ दिया गया। अब महीनों बाद उसी चालक को पकड़कर केवल मामूली धाराओं में कार्रवाई कर थाने से ही जमानत दे दी गई। परिजनों ने जांच अधिकारी सुशील तिवारी पर सीधे आरोप लगाते हुए कहा है कि उन्होंने मामले को कमजोर करने और आरोपी को बचाने का प्रयास किया। परिवार का कहना है कि यदि समय रहते निष्पक्ष जांच होती तो अब तक दोषियों को सलाखों के पीछे भेजा जा चुका होता।
प्रत्यक्षदर्शी के बयान तक दर्ज नहीं
मामले में सबसे चौंकाने वाली बात यह सामने आई है कि घटना के प्रत्यक्षदर्शी का बयान तक अब तक विधिवत दर्ज नहीं किया गया। परिजनों का आरोप है कि मुख्य गवाह ने थाना प्रभारी को फोन पर घटना की पूरी जानकारी दी थी, लेकिन पुलिस ने उसे गंभीरता से नहीं लिया। इसी वजह से अब पूरे मामले में जांच की निष्पक्षता पर सवाल उठ रहे हैं। परिवार का कहना है कि मामले को जानबूझकर कमजोर किया जा रहा है ताकि आरोपी आसानी से बच सके।
न्याय की आस में टूटता ‘पुलिस परिवार’
इस घटना ने केवल एक परिवार नहीं,बल्कि पूरे पुलिस परिवार को झकझोर कर रख दिया है। घर में बूढ़े मां-बाप,पत्नी और मासूम बच्चे आज भी इंसाफ का इंतजार कर रहे हैं। परिवार का रो-रोकर बुरा हाल है।
मृतक के पिता का कहना है कि उनका बेटा पूरी जिंदगी दूसरों की सुरक्षा करता रहा, लेकिन आज उसके अपने ही विभाग ने उसे भुला दिया। उनका सवाल है…
अगर एक पुलिसकर्मी के हत्यारे को पुलिस नहीं पकड़ सकती,तो आम जनता को न्याय कैसे मिलेगा?
यह सवाल अब केवल एक परिवार का नहीं,बल्कि पूरे सिस्टम पर खड़ा होता दिख रहा है।
परिजनों ने मांग की है कि…
मामले में सख्त धाराएं जोड़ी जाएं…
आरोपी चालक की तत्काल गिरफ्तारी हों…
जांच अधिकारी पर विभागीय कार्रवाई की जाए
जांच किसी निष्पक्ष और सक्षम अधिकारी को
सौंपी जाएं…
लोगों का कहना है कि यह मामला अब केवल एक सड़क दुर्घटना नहीं रह गया है,बल्कि यह खाकी के भीतर न्याय और संवेदनशीलता की असली परीक्षा बन चुका है।
सवाल जो जवाब मांग रहे हैं….
क्या पुलिस अपने ही साथी को न्याय दिलाने
में असफल हो गई है?
आखिर 126 दिन बाद भी आरोपी खुलेआम
कैसे घूम रहा है?
क्या जांच को जानबूझकर कमजोर किया
गया?
क्या खाकी के भीतर भी अब संवेदनाएं
फाइलों में दफन हो चुकी हैं?
इन सवालों के जवाब अब केवल अभय पाण्डेय का परिवार ही नहीं,बल्कि पूरा जिला जानना चाहता है।
सीसीटीवी और तकनीक पर भी उठा सवाल
परिजनों और स्थानीय लोगों ने शहर में लगे सीसीटीवी कैमरों और पुलिस की तकनीकी जांच पर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि जब पूरे शहर में निगरानी कैमरे लगे हैं, तो आखिर घटनाकारी वाहन कैसे गायब हो गया? लोगों का कहना है कि यदि यही घटना किसी रसूखदार व्यक्ति, बड़े नेता या वरिष्ठ अधिकारी के साथ हुई होती, तो क्या पुलिस इतनी सुस्त रहती?
कार्रवाई नहीं हुई तो होगा बड़ा आंदोलन
अब मृतक आरक्षक के परिजनों और स्थानीय नागरिकों ने साफ चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं हुई और निष्पक्ष जांच शुरू नहीं की गई, तो वे उग्र आंदोलन करने को मजबूर होंगे।
घटती-घटना – Ghatati-Ghatna – Online Hindi News Ambikapur घटती-घटना – Ghatati-Ghatna – Online Hindi News Ambikapur