नायब तहसीलदार से मारपीट का मामला…प्रशासनिक संघ ने सौंपा ज्ञापन….


-संवाददाता-
अम्बिकापुर,28 मई 2026 (घटती-घटना)। राजापुर उप तहसील में पदस्थ नायब तहसीलदार तुषार मानिक से मारपीट के मामले में पुलिस ने सीतापुर विधायक रामकुमार टोप्पो और उनके समर्थकों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। नायब तहसीलदार की रिपोर्ट पर अंबिकापुर कोतवाली पुलिस ने विधायक सहित यूसुफ, नाजिम,राजा,पंकज गुप्ता और अन्य समर्थकों के विरुद्ध गैरजमानती धाराओं 221, 121(1), 191(2) और 132 के तहत अपराध कायम किया है। वहीं विधायक की चचेरी बहन सीमा धनकी की शिकायत पर नायब तहसीलदार तुषार मानिक के खिलाफ सीतापुर थाने में भी मामला दर्ज किया गया है। घटना के विरोध में छत्तीसगढ़ कनिष्ठ प्रशासनिक संघ,सरगुजा इकाई ने कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर दोषियों पर कड़ी कार्रवाई और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने की मांग की है। जानकारी के अनुसार ग्राम कोटछाल निवासी सीमा धनकी बुधवार शाम राजापुर उप तहसील कार्यालय पहुंची थीं। उन्होंने शाखा-शोध प्रमाण-पत्र पर हस्ताक्षर करने का आग्रह किया। सीमा का आरोप है कि नायब तहसीलदार ने उनके साथ अभद्र व्यवहार किया और कार्यालय से बाहर निकलने को कहा। दूसरी ओर नायब तहसीलदार तुषार मानिक का कहना है कि उन्होंने केवल इतना कहा था कि संबंधित रीडर की अनुपस्थिति के कारण दस्तावेज पर अगले दिन हस्ताक्षर किए जाएंगे। उन्होंने किसी प्रकार की बदसलूकी से इनकार किया है। बताया जा रहा है कि कार्यालय में हुए विवाद के करीब आधे घंटे बाद राजापुर चौराहे पर विधायक और उनके समर्थकों ने नायब तहसीलदार के साथ मारपीट की। घटना के समय सीतापुर एसडीएम फागेश सिन्हा भी मौके पर मौजूद थे। उन्होंने हस्तक्षेप कर नायब तहसीलदार को वहां से सुरक्षित निकाला।
धरने पर बैठे समर्थकों से की अपील : एफआईआर दर्ज होने के बाद सीतापुर थाने के सामने बड़ी संख्या में समर्थक धरने पर बैठ गए हैं। इस पर विधायक ने लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की है। उन्होंने कहा कि किसी को भी कानून अपने हाथ में नहीं लेना चाहिए। प्रदेश में सुशासन की सरकार है और सभी को न्याय मिलेगा। यदि किसी अधिकारी ने अभद्र व्यवहार किया है तो उसके खिलाफ भी नियमानुसार कठोर कार्रवाई होनी चाहिए।
निष्पक्ष जांच में सामने आएगी सच्चाई,पूरा सहयोग करूंगा : विधायक टोप्पो
राजापुर उपतहसील में पदस्थ नायब तहसीलदार तुषार मानिक से मारपीट के मामले में एफआईआर दर्ज होने के बाद सीतापुर विधायक रामकुमार टोप्पो का बयान सामने आया है। उन्होंने कहा कि मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और वे जांच में पूरा सहयोग करेंगे। विधायक टोप्पो ने कहा कि नायब तहसीलदार तुषार मानिक के खिलाफ लंबे समय से कार्यकर्ताओं और आम लोगों की शिकायतें मिल रही थीं। इसकी जानकारी प्रशासनिक अधिकारियों को भी पूर्व में दी गई थी। उन्होंने आरोप लगाया कि उनकी बहन सीमा धनकी जब अपने निजी कार्य से उपतहसील कार्यालय गई थीं, तब नायब तहसीलदार ने उनके साथ अभद्र व्यवहार किया था। विधायक ने कहा कि घटना वाले दिन जब नायब तहसीलदार राजापुर चौक पहुंचे तो वहां मौजूद लोगों ने उनके प्रति नाराजगी जताई। इसके बाद उन पर मारपीट का आरोप लगाया गया और एफआईआर दर्ज की गई। उन्होंने कहा कि जांच के बाद ही पूरे मामले की वास्तविकता सामने आएगी। उनका दावा है कि उनके खिलाफ लगाए गए आरोप निराधार हैं। विधायक ने कहा कि इस मामले में दोनों पक्षों की ओर से एफआईआर दर्ज कराई गई है। पुलिस जांच के बाद तथ्यों के आधार पर सच्चाई सामने आएगी। उन्होंने कहा कि उन्हें पुलिस और जांच प्रक्रिया पर पूरा भरोसा है।
पूर्व उप मुख्यमंत्री बोले…चुनाव जीतने का मतलब मनमानी करने का अधिकार नहीं
राजापुर उप तहसील में पदस्थ नायब तहसीलदार तुषार मानिक से कथित मारपीट के मामले में अब पूर्व उप मुख्यमंत्री टीएस सिंहदेव की प्रतिक्रिया सामने आई है। उन्होंने विधायक का नाम लिए बिना कहा कि यदि किसी जनप्रतिनिधि के खिलाफ एफआईआर दर्ज हुई है तो निश्चित रूप से कोई घटना हुई होगी। मामले की जांच निष्पक्ष रूप से होनी चाहिए। टीएस सिंहदेव ने कहा कि जनप्रतिनिधियों को यह समझना होगा कि जनता उन्हें संविधान और कानून के दायरे में रहकर काम करने की जिम्मेदारी देती है। चुनाव जीतने का अर्थ यह नहीं है कि जो चाहें वही करें या प्रशासनिक व्यवस्था पर अपनी इच्छा थोपें। ऐसी सोच लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि मतदाता जनप्रतिनिधियों को पांच वर्ष के लिए विकास और जनसेवा का अवसर देते हैं, न कि निरंकुश होकर काम करने का अधिकार। जनप्रतिनिधियों को संवैधानिक मर्यादाओं और कानून का सम्मान करना चाहिए। यदि कहीं परिपक्वता की कमी है तो उसे दूर करने की आवश्यकता है।
अमरजीत भगत ने भी जताई आपत्ति
मामले पर पूर्व मंत्री अमरजीत भगत ने भी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि किसी अधिकारी के साथ मारपीट होना गंभीर और आपत्तिजनक घटना है। यदि नायब तहसीलदार ने अपने बयान में विधायक और उनके समर्थकों पर मारपीट का आरोप लगाया है तो इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधियों को नियम, प्रक्रिया और प्रशासनिक मर्यादा का पालन करना चाहिए। जनप्रतिनिधि होने का मतलब यह नहीं है कि किसी के साथ बलपूर्वक व्यवहार किया जाए। लोकतांत्रिक व्यवस्था में सभी को कानून के दायरे में रहकर काम करना चाहिए।
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