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अम्बिकापुर@ 5 जी सिम अपडेट के नाम पर देशभर में साइबर ठगी का जाल

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देवघर से 6 आरोपी गिरफ्तार
फर्जी एपीके फाइल भेजकर मोबाइल करते थे हैक,
ई-सिम एक्टिव कर मिनटों में खाली कर देते थे बैंक खाते
अम्बिकापुर,28 मई 2026 (घटती-घटना)।
साइबर अपराध के बढ़ते मामलों के बीच सरगुजा रेंज पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। झारखंड के देवघर से ऐसे अंतर्राज्यीय साइबर ठग गिरोह का पर्दाफाश किया गया है, जो 5जी सिम अपडेट, पीएम आवास योजना,पीएम किसान योजना और आरटीओ चालान जैसे नामों का इस्तेमाल कर लोगों के मोबाइल हैक कर रहे थे। आरोपी एपीके फाइल और फर्जी लिंक भेजकर मोबाइल का पूरा एक्सेस अपने कब्जे में ले लेते थे और फिर बैंक खातों से रकम पार कर देते थे। सरगुजा रेंज साइबर थाना की टीम ने कार्रवाई करते हुए गिरोह के 6 सदस्यों को गिरफ्तार किया है। पुलिस को आरोपियों के पास से मोबाइल फोन,बैंक दस्तावेज और नगद राशि भी बरामद हुई है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपियों ने पूरे देश में बड़े स्तर पर साइबर ठगी करने की बात स्वीकार की है।
5जी सिम अपडेट के नाम पर भेजा लिंक, क्लिक करते ही उड़ गए 5.53 लाख
मामले की शुरुआत जशपुर जिले के पत्थलगांव निवासी उमेश खुटे की शिकायत से हुई। पीडि़त ने 11 सितंबर 2025 को थाना पत्थलगांव पहुंचकर बताया कि उसके मोबाइल पर 5 जी सिम अपडेट करने के नाम से एक लिंक भेजा गया था। लिंक पर क्लिक करने और निर्देशों का पालन करने के कुछ ही समय बाद उसके बैंक खाते से 5 लाख 53 हजार 900 रुपए निकल गए। मामले की गंभीरता को देखते हुए दीपक कुमार झा ने तत्काल साइबर रेंज थाना को जांच सौंपी और आरोपियों की गिरफ्तारी के निर्देश दिए। इसके बाद राहुल बंसल के मार्गदर्शन में विशेष टीम गठित की गई।
देवघर में बैठकर पूरे देश में फैला रखा था नेटवर्क
तकनीकी जांच और मोबाइल लोकेशन के आधार पर पुलिस टीम झारखंड के देवघर पहुंची। यहां घेराबंदी कर 6 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। पूछताछ में सामने आया कि गिरोह संगठित तरीके से साइबर ठगी कर रहा था और इसके लिए कई एजेंट भी नियुक्त किए गए थे। गिरफ्तार आरोपियों में संतोष कुमार दास,पप्पू महरा,प्रयाग दास,राजकुमार मंडल, आर्यन कुमार और नित्यानंद शामिल हैं। पुलिस ने इनके कब्जे से 10 मोबाइल फोन, पासबुक, चेकबुक और 51 हजार रुपए नकद जब्त किए हैं।
ऐसे करते थे साइबर ठगी : पुलिस जांच में खुलासा हुआ कि आरोपी लोगों के मोबाइल परPM Awas Yojana.apk Ò, ÒPM Kisan Yojana.apk Ò, ÒRTO Chalan.apk Ò, ÒParivahan.apkÓ जैसे नामों से फर्जी एपीके फाइल और लिंक भेजते थे। आम लोग सरकारी योजना या चालान संबंधी सूचना समझकर इन फाइलों को डाउनलोड कर लेते थे। जैसे ही एपीके फाइल इंस्टॉल होती थी, मोबाइल का कंट्रोल आरोपियों के पास पहुंच जाता था। आरोपी मोबाइल के SMS, OTP ,बैंकिंग डिटेल और अन्य निजी जानकारी रियल टाइम में देख लेते थे।
इसके बाद वे पीडि़त के मोबाइल नंबर पर ई-सिम एक्टिवेशन की प्रक्रिया शुरू करते थे। ई-सिम एक्टिव होते ही पीडि़त का असली सिम बंद हो जाता था और वही नंबर आरोपियों के मोबाइल में चालू हो जाता था। इसके बाद आरोपी यूपीआई और नेट बैंकिंग के जरिए रकम दूसरे खातों में ट्रांसफर कर एटीएम से निकाल लेते थे।
रोजाना 2500 लोगों को भेजते थे फर्जी लिंक : पूछताछ में आरोपियों ने चौंकाने वाला खुलासा किया है। उन्होंने बताया कि उनका गिरोह प्रतिदिन लगभग 2500 लोगों को फर्जी एपीके फाइल और लिंक भेजता था। इसके लिए अलग-अलग एजेंट काम करते थे,जो सोशल मीडिया, मैसेज और व्हाट्सऐप के जरिए लोगों तक लिंक पहुंचाते थे। पुलिस का मानना है कि इस गिरोह ने देशभर में हजारों लोगों को ठगी का शिकार बनाया है और करोड़ों रुपए की साइबर ठगी की जा चुकी है। फिलहाल पुलिस अन्य सदस्यों और बैंक खातों की जानकारी जुटाने में लगी है।
पहले भी सामने आ चुका है गिरोह का नाम : पुलिस ने बताया कि इससे पहले थाना कांसाबेल जिला जशपुर के अपराध क्रमांक 99/2025 में भी इसी तरह की साइबर ठगी सामने आई थी। उस मामले में करीब 29 लाख 15 हजार रुपए की ऑनलाइन ठगी हुई थी। जांच में पता चला था कि बैंक के एक गार्ड ने ग्राहक की मदद करने के बहाने उसके मोबाइल में एपीके फाइल डाउनलोड कराई थी। इसके बाद खाते से रकम निकाल ली गई थी। उस मामले में भी मधुपुर जिला देवघर से दो आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था।
पुलिस की अपील : किसी भी एपीके फाइल को डाउनलोड न करें : पुलिस ने लोगों से अपील की है कि किसी भी अनजान लिंक, एपीके फाइल या 5जी अपडेट संबंधी मैसेज पर भरोसा न करें। किसी भी सरकारी योजना या बैंकिंग सेवा से संबंधित जानकारी केवल आधिकारिक वेबसाइट और ऐप से ही प्राप्त करें। साथ ही यदि मोबाइल में अचानक नेटवर्क बंद हो जाए,बैंक खाते से अनधिकृत ट्रांजेक्शन हो या संदिग्ध मैसेज प्राप्त हो तो तुरंत साइबर हेल्पलाइन 1930 या नजदीकी पुलिस थाना में शिकायत करें। पूरी कार्रवाई में साइबर रेंज थाना के निरीक्षक अश्वनी सिंह, निरीक्षक कलीम खान सहित अन्य पुलिस कर्मियों की महत्वपूर्ण भूमिका रही।


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