,वेतन बंद होने से टूटा परिवार
पैरालाइसिस से जूझ रहे डाटा एंट्री ऑपरेटर ने व्हीलचेयर पर पहुंचकर कलेक्टर से लगाई मदद की गुहार
अम्बिकापुर,26 मई 2026 (घटती-घटना)। कभी सरकारी दफ्तर में जिम्मेदारी से काम करने वाला एक कर्मचारी आज व्हीलचेयर पर जिंदगी काटने को मजबूर है। सडक हादसे ने न सिर्फ उसके शरीर का आधा हिस्सा छीन लिया, बल्कि नौकरी और सम्मान के साथ परिवार की खुशियां भी बिखेर दीं। सरगुजा जिले के धौरपुर तहसील में पदस्थ डाटा एंट्री ऑपरेटर बुधेश्वर प्रसाद सिदार पिछले छह वर्षों से पैरालाइसिस की पीड़ा झेल रहे हैं। हादसे के बाद से उनका वेतन बंद है और अब पूरा परिवार आर्थिक तंगी के दौर से गुजर रहा है। शक्ति जिले के डबरा तहसील अंतर्गत ग्राम तुलसीडीह निवासी 35 वर्षीय बुधेश्वर प्रसाद सिदार की नियुक्ति वर्ष 2014 में व्यापम के माध्यम से डाटा एंट्री ऑपरेटर पद पर हुई थी। वे धौरपुर तहसील कार्यालय में अपनी सेवाएं दे रहे थे। वर्ष 2019 में एक सडक हादसे में वे गंभीर रूप से घायल हो गए। हादसा इतना भयावह था कि उनके शरीर का बायां हिस्सा पैरालाइसिस का शिकार हो गया। इसके बाद उनकी जिंदगी पूरी तरह बदल गई। परिजनों ने बताया कि हादसे के बाद उन्हें तत्काल रायपुर के निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। करीब तीन माह तक उनका इलाज चला। इलाज और ऑपरेशन में 24 लाख रुपए से अधिक खर्च हो गए। बेटे को बचाने के लिए परिवार ने अपनी जमीन बेच दी। मां और पत्नी के जेवर तक बेचने पड़े। परिवार को उम्मीद थी कि इलाज के बाद हालात सुधर जाएंगे, लेकिन बुधेश्वर आज भी व्हीलचेयर के सहारे जीवन जी रहे हैं। इधर, हादसे के बाद से विभाग ने उनका वेतन बंद कर दिया। ‘नो वर्क, नो पेमेंट’ के आधार पर वर्ष 2019 से उन्हें भुगतान नहीं किया जा रहा है। लगातार वेतन बंद रहने से परिवार की आर्थिक स्थिति पूरी तरह डगमगा गई है। दवा,इलाज और घर खर्च चलाना मुश्किल हो गया है। परिवार अब रिश्तेदारों और परिचितों की मदद से किसी तरह गुजर-बसर कर रहा है।
मंगलवार को बुधेश्वर अपनी मां,बहन और जीजा के साथ व्हीलचेयर पर कलेक्टर जनदर्शन पहुंचे। जनदर्शन में मौजूद लोगों की नजर जैसे ही व्हीलचेयर पर बैठे बुधेश्वर पर पड़ी,माहौल कुछ देर के लिए भावुक हो उठा। उन्होंने कलेक्टर से वेतन बहाल कराने और आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने की मांग की। परिवार का कहना है कि यदि समय रहते मदद नहीं मिली तो आगे इलाज कराना भी संभव नहीं होगा। बुधेश्वर की आंखों में दर्द साफ नजर आ रहा था। कभी खुद अपने पैरों पर खड़े होकर नौकरी करने वाला युवक आज दूसरों के सहारे चलने को मजबूर है। परिवार को अब प्रशासन से संवेदनशील पहल और राहत की उम्मीद है, ताकि जिंदगी की लड़ाई लड़ रहे बुधेश्वर को कुछ सहारा मिल सके।
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