- शासकीय कार्य से लौट रहे सहायक शिक्षक गड्ढे में गिरे, दो घंटे तक तड़पते रहे; सवाल—क्या शिक्षकों को सच में मिलता है “आराम” का अवकाश?
-संवाददाता-
अम्बिकापुर,26 मई 2026 (घटती-घटना)। कागजों में भले ही इन दिनों ग्रीष्मकालीन अवकाश चल रहा हो, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। स्कूल बंद हैं, बच्चे घरों में हैं, लेकिन शिक्षक अब भी शासन के अलग-अलग कार्यों में लगातार जुटे हुए हैं। विद्यार्थियों के जाति, निवास, छात्रवृत्ति और अन्य जरूरी दस्तावेजों से जुड़े काम समय पर पूरे कराने के लिए शिक्षक भीषण गर्मी में भी विद्यालय पहुंच रहे हैं।
इसी जिम्मेदारी के निर्वहन के दौरान एक शिक्षक हादसे का शिकार हो गए। प्राथमिक शाला लौटाभवना में पदस्थ सहायक शिक्षक राजेंद्र शाही शासकीय कार्य से विद्यालय गए थे। लौटते समय उनका दुर्घटना हो गया और वे सड़क किनारे एक गड्ढे में गिर पड़े। बताया जा रहा है कि करीब दो घंटे तक वे वहीं घायल अवस्था में पड़े रहे। बाद में राहगीरों की नजर पड़ने पर उन्हें अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उनका उपचार जारी है।
यह घटना उन लोगों के लिए भी एक जवाब है, जो अक्सर यह कहते हैं कि शिक्षकों को “दो महीने की छुट्टी” मिलती है। वास्तविकता यह है कि अवकाश के दौरान भी शिक्षकों की जिम्मेदारियां खत्म नहीं होतीं। कभी दस्तावेज सत्यापन, कभी सर्वे, कभी ऑनलाइन कार्य तो कभी विभागीय निर्देश—शिक्षक लगातार शासकीय दायित्व निभाते रहते हैं।
तपती गर्मी और लगातार बढ़ते मानसिक दबाव के बीच शिक्षक वर्ग बिना किसी अतिरिक्त सुविधा के काम कर रहा है। ऐसे में यह मांग उठना स्वाभाविक है कि विद्यालय खुलने से पहले शिक्षकों को कुछ समय मानसिक तनाव से मुक्त रहने और परिवार के साथ समय बिताने का अवसर मिलना चाहिए। यह केवल एक शिक्षक के घायल होने की घटना नहीं, बल्कि उस व्यवस्था का आईना है, जहां “अवकाश” भी जिम्मेदारियों के बोझ तले दब चुका है।
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