सुप्रीम कोर्ट ने आईएएस निरंजन दास को जमानत दी
रायपुर,25 मई 2026। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को पूर्व आबकारी आयुक्त निरंजन दास को कई करोड़ रुपये के शराब नीति घोटाले से जुड़े दो मामलों में जमानत दे दी। अदालत ने कहा कि अन्य सह-आरोपी पहले ही जमानत पर बाहर हैं और मुकदमों के निष्कर्ष तक पहुंचने में अभी काफी समय लगेगा। चीफ जस्टिस सूर्यकांत,जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम. पंचोली की पीठ ने मुख्य मामले से जुड़े दो अलग-अलग मामलों और संबंधित मनी लांड्रिंग मामले में सुनवाई करते हुए पूर्व आयुक्त को यह राहत प्रदान की। इससे पहले अनिल टुटेजा,और एपी त्रिपाठी को भी जमानत मिल चुकी है। पीठ ने कहा कि दास को कथित तौर पर इस मामले का मुख्य सूत्रधार बताया गया है, और उन पर आरोप है कि उन्होंने राज्य की आबकारी नीति तैयार करने में भूमिका निभाई ताकि अन्य सह-आरोपियों को लाभ पहुंचाया जा सके। जमानत देते हुए चीफ जस्टिस ने कहा कि दास को दो अलग-अलग मामलों में क्रमशः 18 सितंबर 2025 और 19 दिसंबर 2025 को गिरफ्तार किया गया था। अदालत ने उन पर वही जमानत शर्तें लागू कीं जो अन्य सह-आरोपियों पर लागू हैं। इसके तहत उन्हें राज्य से बाहर रहना होगा और वह केवल मुकदमे की सुनवाई तथा जांच में शामिल होने के लिए ही छत्तीसगढ़ आ सकेंगे। हालांकि,पीठ ने यह भी कहा कि वह भविष्य में जमानत की शर्तों में ढील देने की मांग कर सकते हैं। इससे पहले एक मार्च को हाईकोर्ट ने पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के दौरान मुख्यमंत्री कार्यालय (सीएमओ) में उप सचिव रहीं सौम्या चौरसिया को भी शराब घोटाले से जुड़े दो मामलों में जमानत दी थी। सोमवार को देश की सबसे बड़ी अदालत में इस मामले पर लंबी बहस हुई। चीफ जस्टिस सूर्यकांत,जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम. पंचोली की बेंच ने यह फैसला सुनाया। कोर्ट ने दो अलग-अलग मामलों और मनी लॉन्डि्रंग केस में निरंजन दास को राहत दी है। दास को सितंबर और दिसंबर 2025 में गिरफ्तार किया गया था। जांच एजेंसियों ने निरंजन दास को इस पूरे खेल का मास्टरमाइंड बताया था। आरोप था कि उन्होंने सरकारी नीति को ऐसा घुमाया जिससे उनके साथियों को फायदा पहुंचे। हालांकि, कोर्ट ने अब उन्हें जमानत दे दी है। पर पाबंदी ऐसी है कि वे राज्य की सीमा में कदम नहीं रख पाएंगे। इससे पहले अनिल टुटेजा, एपी त्रिपाठी और सौम्या चौरसिया को भी कोर्ट से राहत मिल चुकी है। रायपुर के आबकारी दफ्तरों और राजनीतिक गलियारों में इस फैसले के बाद से ही हलचल तेज हो गई है।
क्या है छत्तीसगढ़ का 3200 करोड़ का शराब घोटाला?
ईडी और एसीबी ने मिलकर इस पूरे मामले की परतें खोली थीं। जांच के मुताबिक, 2019 से 2022 के बीच यानी कांग्रेस सरकार के वक्त छत्तीसगढ़ में तीन तरीकों (्र, ख् और ष्ट कैटेगरी) से इस बड़े घोटाले को अंजाम दिया गया।
कैटेगरी ्र (कमीशन का खेल)ः शराब बनाने वाली फैक्टि्रयों से प्रति पेटी 75 से 100 रुपये तक की अवैध वसूली की गई। फैक्टि्रयों को नुकसान न हो, इसके लिए सरकारी दुकानों में शराब के दाम बढ़ा दिए गए।
कैटेगरी ख् (बिना रिकॉर्ड की शराब)ः नकली होलोग्राम लगाकर सरकारी दुकानों से अवैध शराब बेची गई। इसके लिए बकायदा 15 जिलों को चुना गया था। सेल्समैन को निर्देश था कि इस कमाई का कोई रिकॉर्ड सरकारी खाते में नहीं जाना चाहिए। एसीबी को ऐसी 40 लाख से ज्यादा पेटी शराब बिकने के सबूत मिले हैं।
कैटेगरी ष्ट (जोन में हेरफेर)ः राज्य की शराब दुकानों को 8 जोन में बांटा गया था। आरोप है कि ज्यादा कमाई वाले इलाकों का टेंडर देने के लिए सिंडिकेट ने अलग से 52 करोड़ रुपये की अवैध वसूली की।
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