,90 का निर्माण देश में ही होगा
नई दिल्ली ,25 मई 2026 । भारतीय वायुसेना की ताकत बढ़ाने के लिए रक्षा मंत्रालय ने एक और बड़ा कदम उठाया है। सरकार फ्रांस से 114 राफेल लड़ाकू विमान खरीदने जा रही है। इसके लिए अनुरोध पत्र (लोआर) को अंतिम रूप दे दिया गया है और इसे जल्द ही फ्रांस को सौंपा जाएगा। रिपोर्ट के मुताबिक, इन 114 में से लगभग 90 का निर्माण फ्रांसीसी और भारतीय कंपनी संयुक्त रूप से भारत में ही करेगी। रिपोर्ट के मुताबिक, 90 विमानों का निर्माण घरेलू स्तर पर फ्रांसीसी निर्माता डसॉल्ट एविएशन और एक भारतीय कंपनी के बीच सहयोग से मिलकर होगा। वहीं, बाकी विमान उड़ान भरने के लिए तैयार स्थिति में मिलेंगे। रिपोर्ट में वरिष्ठ अधिकारियों के हवाले से कहा गया है कि फ्रांस के लोआर का जवाब देने के तुरंत बाद भारत खरीद के लिए रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल (आरएफपी) को औपचारिक रूप देगा। भारत सौदे के तहत लगभग 50 प्रतिशत स्वदेशी सामग्री शामिल करने की योजना बना रहा है। साथ ही विमान के इंटरफेस कंट्रोल डॉक्यूमेंट हासिल करने पर भी जोर दे रहा है, ताकि स्वदेशी हथियार प्रणालियों जैसे को राफेल में जोड़ा जा सके। हालांकि,विमान के पूरे सोर्स कोड तक पहुंच मिलने की संभावना कम मानी जा रही है। रिपोर्ट के मुताबिक, सरकार का लक्ष्य इस साल के अंत तक बातचीत पूरी कर सौदे पर हस्ताक्षर करना है। इस प्रस्ताव को रक्षा अधिग्रहण परिषद ने 3 महीने पहले मंजूरी दी थी।
वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह अगले महीने की शुरुआत में फ्रांस की यात्रा पर जाने वाले हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भी जून के अंत में फ्रांस दौरे पर जाने की उम्मीद है। बता दें वायुसेना के पास पहले से 36 राफेल विमान हैं, जबकि नौसेना भी आने वाले वर्षों में 26 राफेल-एम विमानों को शामिल करने जा रही है। इस समझौते की अनुमानित कीमत करीब 3.25 लाख करोड़ रुपये बताई जा रही है। ये भारत के इतिहास का सबसे बड़ा रक्षा समझौता होगा। यह वायुसेना की घटती स्क्वाड्रन क्षमता को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाएगा। फिलहाल वायुसेना के पास 29 लड़ाकू स्क्वाड्रन हैं, जबकि स्वीकृत संख्या 42 स्क्वाड्रन की है। भारत एक और 5वीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान की खरीद पर भी विचार कर रहा है। रूस ने एसयू-57 विमान को लेकर भारत से चर्चा की है।
राफेल में मेटियोर बियॉन्ड-विजुअल-रेंज (बीवीआर) मिसाइल, उन्नत इलेक्ट्रॉनिक युद्ध उपकरण, बेहतर रडार और संचार प्रणालियां हैं। स्पेक्ट्रा प्रणाली के चलते ये लंबी दूरी पर कई लक्ष्यों का पता लगा सकता है और दुश्मन के रडार से बच सकता है। इसका रडार 100 किलोमीटर के दायरे में एक साथ 40 लक्ष्य की पहचान कर सकता है। राफेल केवल एक मिनट में 18,000 फीट की ऊंचाई पर जा सकता है। ये एक बार में लगातार 10 घंटे की उड़ान भर सकता है।
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