जब धर्म जोड़ने का माध्यम बने,तब समाज मजबूत होता है…
-ओंकार पाण्डेय-
सूरजपुर,13 मई 2026 (घटती-घटना)। सूरजपुर के प्रसिद्ध कुदरगढ़ धाम से सामने आई एक तस्वीर इन दिनों लोगों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है, यह केवल एक प्रशासनिक कार्यक्रम की तस्वीर नहीं है, बल्कि समाज को जोड़ने वाला ऐसा संदेश है, जिसकी आज सबसे ज्यादा जरूरत महसूस की जा रही है। देश और समाज में अक्सर धर्म, जाति और पहचान को लेकर बहस और विवाद देखने को मिलते हैं, कई बार राजनीति भी इन्हीं मुद्दों के सहारे लोगों को बांटने की कोशिश करती दिखाई देती है, ऐसे माहौल में सूरजपुर जिले की कलेक्टर रेना जमील की यह तस्वीर लोगों के बीच एक अलग सोच और सकारात्मक संदेश लेकर आई है, तस्वीर में कलेक्टर रेना जमील माता के चित्र के सामने श्रद्धा के साथ पुष्प अर्पित करती नजर आ रही हैं, ‘सोमनाथ स्वाभिमान’ के जयघोष के बीच उनका यह भाव यह बताता है कि भारतीय संस्कृति की सबसे बड़ी खूबसूरती उसकी विविधता और एक-दूसरे के विश्वास के प्रति सम्मान में छिपी है।
धर्म नहीं सिखाता आपस में बैर रखना
भारत को सदियों से अनेक धर्मों, भाषाओं और संस्कृतियों का देश कहा जाता है, यहां मंदिर की घंटियों, मस्जिद की अजान, गुरुद्वारे के कीर्तन और चर्च की प्रार्थनाओं के बीच एक साझा संस्कृति विकसित हुई है, यही कारण है कि भारतीय समाज की असली ताकत उसकी एकता और सहिष्णुता मानी जाती है, कुदरगढ़ धाम में दिखाई दिया यह दृश्य इसी परंपरा को जीवंत करता नजर आया, मुस्लिम समुदाय से आने वाली एक महिला अधिकारी का मंदिर परिसर में श्रद्धा व्यक्त करना यह दर्शाता है कि इंसानियत और सम्मान किसी एक धर्म की सीमाओं में बंधे नहीं होते, स्थानीय लोगों का कहना है कि यह तस्वीर उन लोगों के लिए भी जवाब है जो समाज को धर्म के आधार पर बांटने की कोशिश करते हैं, लोगों ने इसे ‘सद्भाव और सम्मान की तस्वीर’ बताया है।
जमीन से जुड़ी अधिकारी की बन रही पहचान
कलेक्टर रेना जमील की चर्चा केवल इस तस्वीर तक सीमित नहीं है, जिले में उनकी कार्यशैली को लेकर भी आम लोगों के बीच सकारात्मक माहौल देखा जा रहा है, ग्रामीणों और नागरिकों का कहना है कि वे आम जनता से सीधे संवाद करने वाली अधिकारी के रूप में पहचान बना रही हैं, लोग बताते हैं कि कई बार प्रशासनिक दफ्तरों में आम आदमी खुद को असहज महसूस करता है, लेकिन सूरजपुर में स्थिति कुछ अलग दिखाई दे रही है, यहां लोग यह महसूस कर रहे हैं कि प्रशासन केवल आदेश देने तक सीमित नहीं, बल्कि जनता के बीच जाकर उनकी समस्याओं को समझने का भी प्रयास कर रहा है, कई स्थानीय लोगों का कहना है कि कलेक्टर रेना जमील बिना किसी भेदभाव के हर वर्ग के लोगों से मिलती हैं और यही कारण है कि उनकी छवि एक संवेदनशील और जमीन से जुड़ी अधिकारी की बन रही है।
समाज को क्या सीख देती है यह तस्वीर?
यह तस्वीर केवल धार्मिक आस्था का प्रदर्शन नहीं है, बल्कि समाज के लिए एक बड़ा संदेश भी देती है—कि किसी भी धर्म का मूल उद्देश्य प्रेम, शांति और मानवता है, जब एक प्रशासनिक अधिकारी समाज के हर वर्ग और हर परंपरा का सम्मान करते हुए दिखाई देती हैं, तब यह संदेश और मजबूत होता है कि विकास और सामाजिक समरसता साथ-साथ चल सकते हैं, आज के दौर में जहां सोशल मीडिया पर छोटी-छोटी बातों को लेकर नफरत फैलाने की कोशिशें होती हैं, वहीं कुदरगढ़ धाम से सामने आई यह तस्वीर लोगों को यह याद दिलाती है कि भारत की पहचान उसकी ‘एकता में अनेकता’ है।
सौहार्द की तस्वीर बनी चर्चा का विषय
कुदरगढ़ धाम से सामने आई यह तस्वीर अब सोशल मीडिया पर तेजी से साझा की जा रही है, लोग इसे ‘धर्म से ऊपर इंसानियत’ और ‘भारतीय संस्कृति की असली तस्वीर’ जैसे शब्दों के साथ साझा कर रहे हैं, कई लोगों का कहना है कि यदि समाज में इसी तरह एक-दूसरे की आस्था का सम्मान करने की भावना मजबूत हो, तो नफरत और विभाजन की राजनीति अपने आप कमजोर पड़ जाएगी, सूरजपुर से निकली यह तस्वीर आज केवल एक जिले तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरे समाज को यह संदेश देती नजर आ रही है कि धर्म का सबसे सुंदर रूप वही है, जो इंसानों को जोड़ता है, सम्मान सिखाता है और प्रेम का रास्ता दिखाता है।
पत्रकार वार्ता के दौरान सूरजपुर कलेक्टर का अलग ही अंदाज आया नजर,संवाद ही समाधान और सुशासन का जरिया के तर्ज पर जिले को मिलेगी नई पहचान
कलेक्टर सुरजपुर ने जिले में अपने आगमन के तत्काल पश्चात पत्रकार वार्ता आयोजित की, पत्रकार वार्ता में नव पदस्थ सुरजपुर कलेक्टर का अंदाज अन्य पूर्व कलेक्टरों से अलग ही नजर आया, उन्होंने संवाद को ही समाधान और सुशासन का जरिया बतलाया, जहां आज यह देखने को मिलता है कि संवाद से अधिकारी दूर भागने का प्रयास करते हैं कलेक्टर सुरजपुर ने इसे आवश्यक बतलाते हुए इसे प्रेरणा बतलाया, उन्होंने कहा कि शासन की महत्वाकांक्षी योजनाएं तभी बेहतर ढंग से पूर्ण होंगी अंतिम व्यक्ति तक उसका लाभ पहुंच सकेगा जब संवाद बना रहेगा,उन्होंने कहा कि सरकार प्रदेश की जनता के लिए कई योजनाएं चला रही है उनकी प्राथमिकता है कि सभी का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंच सके, सुरजपुर कलेक्टर का अंदाज कोरिया की पूर्व कलेक्टर से अलग भी कहा जा रहा है, जहां कोरिया कलेक्टर सीमित एक समूह के भीतर संवाद कायम रखकर कार्य करने की आदि थीं सूरजपुर कलेक्टर ने संवाद के जरिए सुशासन की बात कही है।
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