एआई वीडियो और सोशल मीडिया संचालन को लेकर पूर्व सीएम के गंभीर आरोप…भाजपा नेता ने दी सलाह…‘धमकी नहीं,मुद्दों पर करें राजनीति’

-न्यूज डेस्क-
रायपुर,06 मई 2026। छत्तीसगढ़ की राजनीति में एक बार फिर बयानबाजी तेज हो गई है। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और भाजपा नेता पंकज कुमार झा के बीच सोशल मीडिया और ‘छत्तीसगढ़ संवाद’ को लेकर तीखा शब्दवार सामने आया है,जिससे प्रदेश की सियासत में नया विवाद खड़ा हो गया है। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने नवा रायपुर स्थित ‘छत्तीसगढ़ संवाद’ को लेकर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि इसे अब ‘भाजपा कार्यालय,नवा रायपुर’ का बोर्ड लगा लेना चाहिए। उन्होंने दावा किया कि गुजरात की एजेंसियों के माध्यम से एआई वीडियो बनाकर उनकी और अन्य कांग्रेस नेताओं की छवि धूमिल करने का प्रयास किया जा रहा है। बघेल ने आरोप लगाया कि उक्त संस्थान अब एक तरह से ‘प्रोडक्शन हाउस’ बन गया है, जहां से न केवल राजनीतिक वीडियो तैयार हो रहे हैं,बल्कि विभिन्न सोशल मीडिया अकाउंट्स का संचालन और पोस्टिंग भी की जा रही है। उन्होंने सत्तापक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि अंदरूनी बैठकों में भले ही बातें छिपाने की कोशिश की जाती हो,लेकिन ‘दीवारों के भी कान होते हैं।’ बघेल ने अपने बयान में तंज कसते हुए कहा कि संबंधित लोग ‘खाकी पैंट पहनकर कमल का बिल्ला लगा लें और कार्यालय का नाम बदल दें।’ उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि समय के साथ हर साजिश का हिसाब होगा— ‘घड़ी रुकने से समय नहीं रुकता। ‘ वहीं,बघेल के इन आरोपों पर भाजपा नेता पंकज कुमार झा ने तीखा पलटवार करते हुए उन्हें ‘मुफ्त की सलाह’ दी। झा ने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री को अपने सलाहकारों को बदल लेना चाहिए, क्योंकि मौजूदा सलाहकार उनकी राजनीतिक छवि को नुकसान पहुंचा रहे हैं। झा ने अपने बयान में कहा कि भाजपा को प्रचार-प्रसार के लिए किसी शासकीय संस्थान की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने दावा किया कि वे स्वयं ‘संवाद’ में बैठते हैं और पूर्व सरकार के दौरान वहां क्या गतिविधियां होती थीं, इसकी पूरी जानकारी रखते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि उस समय सोशल मीडिया पर पोस्ट करने को लेकर दबाव बनाया जाता था, यहां तक कि लोगों को जेल भेजने और राजद्रोह जैसे गंभीर मामलों में फंसाने तक की कार्रवाई की जाती थी। भाजपा नेता ने कहा कि इन सबके बावजूद भाजपा कार्यकर्ताओं ने सोशल मीडिया के माध्यम से सरकार की नीतियों, वादाखिलाफी और कथित घोटालों को जनता तक पहुंचाया। उन्होंने यह भी कहा कि उस दौर में शासकीय संसाधनों के उपयोग के बावजूद विपक्ष प्रभावी जवाब देने में सफल नहीं हो पाया। झा ने आगे कहा कि केवल आक्रामक बयानबाजी, धमकी या ‘चमकी’ की भाषा से कोई राजनीतिक लाभ नहीं मिलता। उन्होंने बघेल को सलाह दी कि वे सोशल मीडिया पर अशालीन भाषा और गैर-गंभीर टिप्पणियों से बचें तथा ठोस और जनहित के मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करें। उन्होंने यह भी कहा कि ‘फेसबुक पोस्ट लिखने वालों’ को भी बदलने की जरूरत है, क्योंकि वर्तमान में भाषा और स्तर दोनों ही राजनीतिक गरिमा के अनुरूप नहीं हैं। अपने बयान के अंत में झा ने परोक्ष रूप से बघेल को संयम बरतने की सलाह देते हुए कहा कि ‘ऐसी वैसी बातों से बेहतर है खामोश रहो, या कुछ ऐसी बात कहो जो खामोशी से बेहतर हो। ‘
राजनीतिक
माहौल हुआ गरम
दोनों नेताओं के बीच इस तरह की तीखी बयानबाजी से प्रदेश की राजनीति में गर्माहट बढ़ गई है। एक ओर जहां बघेल ने सत्तापक्ष पर तकनीकी माध्यमों के दुरुपयोग और साजिश के आरोप लगाए हैं,वहीं भाजपा की ओर से इन आरोपों को खारिज करते हुए पलटवार किया गया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले समय में यह विवाद और गहराने की संभावना है, क्योंकि सोशल मीडिया और एआई जैसे मुद्दे अब राजनीतिक रणनीति के अहम हिस्से बनते जा रहे हैं। ऐसे में दोनों पक्षों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला जारी रहने के संकेत मिल रहे हैं।
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