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चांदनी बिहारपुर/सूरजपुर@ सुशासन के पोस्टर चमक रहे, किसान प्यास से तड़प रहे!

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चांदनी बिहारपुर के धान खरीदी केंद्रों में पानी नहीं,भीषण गर्मी में रोज परेशान हो रहे सैकड़ों किसान
नवगई और मोहरसोप समिति में पेयजल संकट,धान खरीदी बंद फिर भी रोज पहुंच रहे किसान…बोरिंग और सोलर पंप की मांग तेज
-ओंकार पाण्डेय-
चांदनी बिहारपुर/सूरजपुर,06 मई 2026 (घटती-घटना)। एक तरफ सरकार सुशासन त्योहार मना रही है,योजनाओं और सुविधाओं के बड़े-बड़े दावे किए जा रहे हैं,वहीं दूसरी तरफ सूरजपुर जिले के चांदनी बिहारपुर क्षेत्र की हकीकत इन दावों को पसीने में बहाती नजर आ रही है। यहां किसान धान बेचने नहीं, अब पानी खोजने समिति पहुंच रहे हैं।
आ.जा. सेवा सहकारी समिति मर्यादित नवगई और मोहरसोप धान खरीदी केंद्रों में पेयजल जैसी बुनियादी सुविधा तक उपलब्ध नहीं है,हालात ऐसे हैं कि भीषण गर्मी में रोज सैकड़ों किसान समिति पहुंचते हैं,लेकिन उन्हें पानी की एक बूंद तक नसीब नहीं हो रही, धान खरीदी भले बंद हो चुकी हो,लेकिन समितियों में किसानों का आना-जाना लगातार जारी है,खाद-बीज,दस्तावेज, खाते और अन्य कार्यों के लिए किसान रोज यहां पहुंचते हैं। मगर विडंबना देखिए कि किसानों के नाम पर चलने वाली समितियों में किसानों के लिए पानी तक नहीं है।
सुशासन के बैनर तले प्यासा किसान, कागजों में सुविधा,जमीन पर सूखा
चांदनी बिहारपुर की इन समितियों में स्थिति ऐसी है कि किसान घंटों तक गर्मी में बैठकर अपने काम का इंतजार करते हैं,लेकिन प्यास बुझाने के लिए उन्हें इधर-उधर भटकना पड़ता है,कुछ किसान घर से बोतल लेकर आते हैं, तो कई पास के गांवों या दुकानों की ओर पानी खोजने निकल जाते हैं। जो किसान दूरदराज इलाकों से आते हैं,उनकी परेशानी और बढ़ जाती है, गर्मी का तापमान लगातार बढ़ रहा है,लेकिन जिम्मेदारों की संवेदनाएं शायद एसी कमरों से बाहर नहीं निकल पा रहीं,अब क्षेत्र में लोग तंज कसते हुए कह रहे हैं समिति में धान तौलने का कांटा है,लेकिन पानी नापने के लिए एक बूंद भी नहीं।
धान खरीदी बंद,लेकिन परेशानी चालू
अक्सर यह तर्क दिया जाता है कि धान खरीदी खत्म होने के बाद समितियों में भीड़ कम हो जाती है,लेकिन नवगई और मोहरसोप समितियों की हकीकत इससे अलग है, यहां किसान सालभर किसी न किसी कार्य से पहुंचते हैं,बैंकिंग संबंधी काम,दस्तावेज सुधार, खाद-बीज जानकारी और अन्य प्रक्रियाओं के कारण रोज सैकड़ों लोगों का आना-जाना बना रहता है,इसके बावजूद पानी जैसी न्यूनतम सुविधा उपलब्ध नहीं होना सीधे तौर पर प्रशासनिक लापरवाही को उजागर करता है।
समिति या तपता हुआ प्रतीक्षालय?
नवगई और मोहरसोप समितियों की स्थिति देखकर ऐसा लगता है मानो किसान सुविधा केंद्र नहीं, बल्कि गर्मी की परीक्षा देने पहुंचे हों,ना पानी,ना छांव की पर्याप्त व्यवस्था और ना ही कोई वैकल्पिक इंतजाम,कई बुजुर्ग किसान घंटों प्यासे बैठे रहते हैं, कुछ लोग मजबूरी में गर्म पानी पीने को विवश हैं,सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब प्रशासन करोड़ों की योजनाओं का दावा करता है, तो क्या एक बोरिंग और सोलर पंप लगाना इतना मुश्किल काम है?
सुशासन त्योहार और जमीनी हकीकत
इन दिनों प्रदेश में सुशासन त्योहार का प्रचार जोर-शोर से किया जा रहा है,गांव-गांव तक प्रशासनिक संवेदनशीलता और बेहतर व्यवस्था के संदेश पहुंचाए जा रहे हैं,लेकिन चांदनी बिहारपुर की तस्वीरें कुछ और ही कहानी बयां कर रही हैं, यहां किसान पूछ रहे हैं — जब पानी जैसी मूलभूत सुविधा नहीं मिल पा रही,तो फिर सुशासन आखिर किसे कहते हैं? कई ग्रामीणों का कहना है कि सरकार की योजनाएं कागजों और भाषणों में ज्यादा दिखाई देती हैं,जमीन पर कम।
किसानों की मांगः तत्काल लगे बोरिंग और सोलर पंप
क्षेत्र के किसानों और ग्रामीणों ने जिला प्रशासन, सूरजपुर कलेक्टर और छत्तीसगढ़ शासन से मांग की है कि नवगई और मोहरसोप समितियों में जल्द से जल्द बोरिंग कराकर सोलर पंप स्थापित किया जाए, किसानों का कहना है कि यह केवल सुविधा का नहीं, बल्कि स्वास्थ्य और सम्मान का भी मामला है, भीषण गर्मी में पानी के बिना लोगों को परेशान होना पड़ रहा है, जिसे अब नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
बढ़ सकता है आक्रोश
यदि जल्द ही इस समस्या का समाधान नहीं हुआ,तो किसानों का आक्रोश बढ़ सकता है। क्षेत्र में अब यह चर्चा तेज हो रही है कि यदि समितियों में पानी जैसी बुनियादी सुविधा भी उपलब्ध नहीं कराई जा सकती,तो फिर किसानों के हितों के दावे किस काम के? अब देखना होगा कि जिला प्रशासन इस गंभीर समस्या को केवल शिकायत मानता है या फिर इसे प्राथमिकता देकर स्थायी समाधान की दिशा में कदम उठाता है।
प्यास से हालत खराब हो जाती है किसानों ने बयां किया दर्द…
किसानों का कहना है कि भीषण गर्मी में बिना पानी के घंटों तक समिति में बैठना बेहद कठिन हो गया है…

हम लोग रोज यहां आते हैं,धान के अलावा भी बहुत काम रहता है,लेकिन पानी की कोई व्यवस्था नहीं है, गर्मी में हालत खराब हो जाती है।
राजेश नामक किसान

धान खरीदी बंद होने के बाद भी हम लोग समिति आते हैं,लेकिन पानी नहीं मिलता। बहुत परेशानी हो रही है।
रामकुमार नामक किसान

रामचंद्र ने सरकार के दावों पर सवाल उठाते हुए कहा…सरकार सुशासन की बात करती है, लेकिन यहां बुनियादी सुविधा तक नहीं है। बोरिंग और सोलर पंप लगना जरूरी है।
—रामचंद्र नामक किसान

वहीं रामचरन नामक किसान का कहना है —सैकड़ों किसान रोज आते हैं, फिर भी पानी नहीं है। हम लोग मांग करते हैं कि जल्द से जल्द व्यवस्था की जाए।
— रामचरन नामक किसान


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