
- अभियान की गाड़ियों के सायरन गूंजे, मगर नकली पनीर अब भी बाजार का राजा
- जांच के नाम पर खानापूर्ति, शादी सीजन में ‘केमिकल भोज’ परोसने वालों पर मेहरबान सिस्टम!
- सही दवा-शुद्ध आहार” या सिर्फ दिखावा? नकली पनीर के खेल पर मेहरबान सिस्टम
- जांच के नाम पर खानापूर्ति! शादी सीजन में धड़ल्ले से बिक रहा ‘केमिकल पनीर’
- अभियान जारी, मिलावट बेखौफ…चौपाटियों से होटलों तक अमानक खाद्य पदार्थों की भरमार
- सही दवा-शुद्ध आहार अभियान बना मजाक? नकली पनीर और बासी खाद्य पदार्थों से खिलवाड़
- जांच से पहले पहुंच जाती है खबर! ‘सेटिंग सिस्टम’ के भरोसे चल रहा मिलावट का कारोबार
- “सब सेट है साहब!” अभियान के बीच बेखौफ बिक रहे अमानक खाद्य पदार्थ
- मुनाफे के लिए मौत परोसने का खेल… नकली पनीर पर विभाग क्यों मौन?
- सही आहार के दावे, लेकिन बाजार में मिलावट का साम्राज्य कायम
-रवि सिंह-
बैकुंठपुर/कोरिया,06 मई 2026(घटती-घटना)। जिले में इन दिनों सही दवा, शुद्ध आहार अभियान बड़े जोर-शोर से चल रहा है, पोस्टर लग रहे हैं,टीम निकल रही है,फोटो खिंच रहे हैं,प्रेस नोट जारी हो रहे हैं और जनता को भरोसा दिलाया जा रहा है कि अब मिलावटखोरों की खैर नहीं,लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि मिलावटखोरों के चेहरे पर डर नहीं, बल्कि मुस्कान दिखाई दे रही है,वजह भी साफ है उन्हें पता है कि यह अभियान ज्यादा दिन का मेहमान नहीं, केवल मौसम की तरह आया है और चला जाएगा,जिले में नकली पनीर, केमिकल वाला खोया,बासी ब्रेड,गंदे तेल में तले खाद्य पदार्थ और अमानक मिठाइयों का कारोबार धड़ल्ले से जारी है,शादी-विवाह का सीजन शुरू होते ही मिलावटखोरों की फैक्टि्रयां भी फुल स्पीड में चलने लगी हैं,लेकिन जिम्मेदार विभागों की कार्यशैली देखकर ऐसा लगता है मानो अभियान जनता के लिए नहीं, बल्कि फाइलों और फोटो एल्बम के लिए चलाया जा रहा हो।
मिलावट का मौसम,अभियान का अभिनय
गर्मी का मौसम आते ही दूध फटने लगता है,ब्रेड खराब होने लगती है और मिठाइयों की गुणवत्ता गिरने लगती है,लेकिन जिले में मिलावट का कारोबार इतना आधुनिक हो चुका है कि अब असली और नकली का फर्क पहचानना मुश्किल हो गया है,बाजार में ऐसा पनीर बिक रहा है जो शायद दूध से कम और केमिकल से ज्यादा बना है,खोया ऐसा कि गाय-भैंस भी देख लें तो पहचानने से इंकार कर दें,लेकिन यह सब खुलेआम बिक रहा है और जिम्मेदार विभाग अभियान चलाने में व्यस्त हैं, लोग अब मजाक में कहने लगे हैं — जितना शुद्ध अभियान का नाम है, उतनी ही अशुद्ध बाजार की हालत है।
जांच से पहले पहुंच जाता है संदेश! साहब आ रहे हैं, फ्रिज बदल दो
सूत्रों की मानें तो जिले में चल रहा यह सघन जांच अभियान इतना गोपनीय है कि जांच से पहले ही संबंधित दुकानदारों तक सूचना पहुंच जाती है, यानी अचानक छापा कम और पूर्व सूचना वाला दौरा ज्यादा हो रहा है,बताया जा रहा है कि जैसे ही टीम निकलती है,वैसे ही कुछ दुकानों में सफाई अभियान शुरू हो जाता है। खराब सामान पीछे के कमरे में पहुंच जाता है,नकली पनीर गायब हो जाता है और कर्मचारियों को आज दस्ताने पहन लो वाला आदेश जारी हो जाता है,कुछ दुकानदार तो मजाक में यह भी कहते सुने गए —सरकारी जांच का टाइमटेबल अब हमसे ज्यादा किसे पता होगा?
नकली पनीरः शादी सीजन का असली हीरो
जिले में शादी-विवाह का सीजन शुरू होते ही पनीर की मांग तेजी से बढ़ जाती है, लेकिन असली दूध से बने पनीर की लागत और बाजार में बिकने वाली कीमत का हिसाब जोड़ें तो कहानी खुद समझ में आ जाती है, सूत्र बताते हैं कि जिस कीमत पर कई डेयरी और दुकानदार पनीर बेच रहे हैं,उस दर पर असली पनीर बनाना संभव ही नहीं है। यानी या तो विज्ञान बदल गया है या फिर पनीर की परिभाषा, अब यह नकली पनीर होटल से लेकर शादी समारोह तक हर जगह पहुंच चुका है। लोग समझ रहे हैं कि वे शाही पनीर खा रहे हैं, जबकि असल में शरीर में केमिकल और सिंथेटिक पदार्थ पहुंच रहे हैं, स्वास्थ्य विशेषज्ञों की मानें तो ऐसा नकली पनीर पेट, लीवर, किडनी और पाचन तंत्र के लिए बेहद खतरनाक हो सकता है,लेकिन यहां सवाल स्वास्थ्य का नहीं, मुनाफे का है।
नियत बदले बिना नहीं बदलेगी व्यवस्था
सच यह है कि अभियान से ज्यादा जरूरत सिस्टम की नीयत बदलने की है, क्योंकि मिलावटखोरी केवल खाद्य पदार्थों में नहीं,अब व्यवस्था में भी दिखाई देने लगी है, जब तक कार्रवाई का डर नहीं होगा,नकली पनीर असली बनकर बिकता रहेगा,बासी ब्रेड ताजी बताकर परोसी जाती रहेगी और जनता सही दवा-शुद्ध आहार के नाम पर केवल भाषण सुनती रहेगी,अब देखना यह है कि जिम्मेदार विभाग इस अभियान को सचमुच जनता की सुरक्षा का माध्यम बनाते हैं या फिर यह भी बाकी अभियानों की तरह फाइलों में बंद होकर रह जाएगा।
सेटिंग,कमिशन और सिस्टम की चुप्पी
जिले में यह चर्चा अब खुलकर होने लगी है कि खाद्य कारोबारियों और जिम्मेदारों के बीच सेटिंग का खेल चलता है,सूत्रों की मानें तो कुछ दुकानदारों को पहले से ही भरोसा रहता है कि उन तक कार्रवाई पहुंचेगी ही नहीं, यही वजह है कि नकली खाद्य पदार्थ बेचने वाले बेखौफ हैं और आम जनता असुरक्षित, यदि वास्तव में सख्ती होती,तो अब तक कई डेयरियों, होटल और चौपाटियों पर ताले लग चुके होते,लेकिन फिलहाल तो स्थिति ऐसी है कि मिलावटखोरों का कारोबार और विभाग का अभियान दोनों साथ-साथ आराम से चल रहे हैं।
जनता पूछ रही है
जांच से पहले सूचना कौन पहुंचा रहा है?
नकली पनीर बेचने वालों पर बड़ी कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
शादी सीजन में खाद्य पदार्थों की विशेष जांच क्यों नहीं?
चौपाटियों और ठेलों की सफाई जांच का हिस्सा क्यों नहीं?
क्या “सही दवा-शुद्ध आहार” केवल 15 दिन का सरकारी उत्सव है?
चौपाटी और ठेलों में ‘स्वच्छता’ छुट्टी पर
जिला मुख्यालय की कई चौपाटियों,गुमटियों और ठेलों की हालत देखकर ऐसा लगता है कि स्वच्छता अभियान ने इन क्षेत्रों में प्रवेश करने से पहले ही हार मान ली, खुले में रखे खाद्य पदार्थ, धूल-मिट्टी से भरे बर्तन,काले पड़ चुके तेल में तलते पकवान और दूषित पानी का इस्तेमाल आम बात बन चुकी है,गर्मी के दिनों में जल्दी खराब होने वाली ब्रेड और खाद्य सामग्री भी धड़ल्ले से उपयोग की जा रही है, लेकिन जांच टीमों की नजर शायद वहां तक नहीं पहुंचती,जहां असली खतरा मौजूद है, क्योंकि असली खतरे पर कार्रवाई करने के लिए केवल अभियान नहीं, हिम्मत और नियत भी चाहिए।
फोटो में सख्ती,जमीन पर नरमी
अभियान के दौरान सबसे तेज चीज अगर चल रही है, तो वह है कैमरा। जांच के दौरान सैंपल लेते हुए तस्वीरें, अधिकारियों की मीटिंग,दुकानदारों को समझाइश — सबकुछ व्यवस्थित तरीके से हो रहा है, बस जो नहीं हो रहा, वह है बड़ी कार्रवाई,अब तक न तो किसी बड़े नकली पनीर कारोबारी पर सख्त कार्रवाई सामने आई, न ही किसी होटल या डेयरी को लेकर बड़ा खुलासा हुआ,ऐसे में जनता सवाल पूछ रही है कि आखिर यह अभियान कार्रवाई के लिए चल रहा है या प्रचार के लिए?
सैंपलिंग जारी है — सिस्टम का सबसे सुरक्षित जवाब
जब भी सवाल उठता है कि कार्रवाई क्यों नहीं हुई,तो एक जवाब तुरंत तैयार मिलता है सैंपलिंग की गई है, रिपोर्ट आने के बाद कार्रवाई होगी,यह वही रिपोर्ट है जो कई बार इतनी देर से आती है कि तब तक मौसम बदल जाता है,दुकान का बोर्ड बदल जाता है और अभियान भी खत्म हो जाता है,जनता अब यह समझ चुकी है कि रिपोर्ट आने वाली है सरकारी शब्दकोश का सबसे सुरक्षित वाक्य है।
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