अहमदाबाद,14अप्रैल 2026। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने मंगलवार को लोगों से जातिगत विभाजन से ऊपर उठकर एक समावेशी समाज के निर्माण की दिशा में काम करने की अपील की। उन्होंने कहा कि देश को अब ‘अमीर और गरीब’ के बीच की खाई को पाटने पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। डॉ. बी.आर. अंबेडकर की जयंती के अवसर पर गुजरात के गांधीनगर में ‘सामाजिक समरसता महोत्सव’ को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा कि जाति व्यवस्था अतीत की बात है और लोगों को अब एक समाज के रूप में आगे बढ़ना चाहिए। उन्होंने कहा ‘जिन्होंने जाति व्यवस्था बनाई, वे अब नहीं रहे। हमें मिलकर आगे बढ़ना चाहिए और सामाजिक सद्भाव को मजबूत करना चाहिए। एक तरह से, अब केवल दो ही जातियां हैं – ‘हैव्स’ (अमीर) और ‘हैव-नॉट्स’ (गरीब)।’ उन्होंने पिछड़ों के उत्थान की आवश्यकता पर जोर दिया।
एकजुट खड़े रहना सामाजिक सद्भाव की सच्ची अभिव्यक्ति
राष्ट्रपति ने एकता का आह्वान करते हुए कहा किसी को भी केवल अपने हित के बारे में नहीं सोचना चाहिए। हम सब एक हैं। हम भाई-बहन हैं। उन्होंने भारत की सांस्कृतिक एकता पर जोर देते हुए कहा कि देश की परंपराएं करुणा, समानता, आपसी कल्याण और सद्भाव में निहित हैं। उन्होंने कहा, ‘सभी विभाजनों से ऊपर उठकर और बिना किसी भेदभाव के एकजुट खड़े रहना सामाजिक सद्भाव की सच्ची अभिव्यक्ति है।
’गांव समृद्ध होंगे, तो देश समृद्ध होगा’
राष्ट्रपति मुर्मू ने इस बात पर भी जोर दिया कि भारत के विकास और सामाजिक ताने-बाने में गांव केंद्रीय भूमिका निभाते हैं। उन्होंने कहा राष्ट्र की आत्मा उसके गांवों में बसती है। एक सामंजस्यपूर्ण समाज के निर्माण का मार्ग गांवों से होकर गुजरता है। विविधता के बावजूद, गांवों में लोगों के बीच स्नेह, गर्मजोशी और आपसी समझ है और यह भारतीय संस्कृति की सच्ची भावना को दर्शाता है। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि यदि गांव समृद्ध होंगे, तो देश समृद्ध होगा।
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