-राजेन्द्र शर्मा-
खड़गवां,14 अप्रैल 2026(घटती-घटना)। मनेंद्रगढ़ महिला एवं बाल विकास परियोजना में कार्यरत आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने लंबे समय से लंबित भुगतान को लेकर खुलकर नाराजगी जताई है, पोषण ट्रैकर ऐप से जुड़े कार्यों के बदले मिलने वाली प्रोत्साहन राशि पिछले 9 महीनों से लंबित है, जबकि सुपोषण चौपाल के 6 माह के भुगतान भी अब तक नहीं किए गए हैं,नियमित रूप से कार्य करने के बावजूद भुगतान नहीं मिलने से कार्यकर्ताओं के सामने आर्थिक संकट गहराता जा रहा है,कार्यकर्ताओं ने परियोजना अधिकारी को लिखित आवेदन सौंपते हुए स्पष्ट कहा है कि यदि जल्द भुगतान नहीं हुआ तो इसका सीधा असर जमीनी स्तर पर चल रही सरकारी योजनाओं पर पड़ सकता है। आवेदन के साथ उठाई गई मांग,बिना भुगतान कैसे चलेगा काम?- आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने 26 मई 2025 को महिला एवं बाल विकास विभाग, मनेंद्रगढ़ के परियोजना अधिकारी को आवेदन सौंपा, आवेदन में उन्होंने उल्लेख किया कि जून 2024 से फरवरी 2025 तक की लगातार 9 माह की इंसेंटिव राशि अब तक प्राप्त नहीं हुई है, कार्यकर्ताओं का कहना है कि वे नियमित रूप से पोषण ट्रैकर ऐप में डेटा अपडेट कर रहे हैं, विभागीय निर्देशों का पालन कर रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद भुगतान नहीं मिल रहा है इस स्थिति को लेकर कार्यकर्ताओं ने सवाल उठाया जब काम पूरा है,तो भुगतान क्यों नहीं?
जमीनी स्तर पर बढ़ती नाराजगी
आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का यह विरोध संकेत देता है कि जमीनी स्तर पर काम करने वाले कर्मचारियों की समस्याएं लगातार बढ़ रही हैं, यदि समय रहते इस पर ध्यान नहीं दिया गया, तो योजनाओं के क्रियान्वयन पर असर पड़ेगा और सिस्टम पर भरोसा कमजोर होगा।
अब नजर प्रशासन पर…
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या विभाग इस मामले पर त्वरित संज्ञान लेगा? या फिर यह मुद्दा भी अन्य फाइलों की तरह लंबित रह जाएगा, फिलहाल, कार्यकर्ताओं की मांग साफ है काम का पूरा भुगतान, वह भी समय पर।
सुपोषण चौपाल का भुगतान भी अटका
आवेदन में यह भी बताया गया है कि केवल पोषण ट्रैकर ऐप की राशि ही नहीं,बल्कि सुपोषण चौपाल कार्यक्रम की 6 माह की राशि भी लंबित है, सुपोषण चौपाल, जो कि कुपोषण से निपटने और जागरूकता बढ़ाने का महत्वपूर्ण माध्यम है,उसमें सक्रिय भूमिका निभाने के बावजूद कार्यकर्ताओं को उसका भुगतान नहीं मिला है,यह स्थिति दर्शाती है कि विभागीय योजनाएं जमीन पर चल रही हैं लेकिन भुगतान प्रक्रिया में गंभीर देरी हो रही है।
आर्थिक संकट में कार्यकर्ता,बढ़ी चिंता
आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने बताया कि उन्हें पहले से ही सीमित मानदेय मिलता है,महंगाई के इस दौर में परिवार चलाना मुश्किल हो रहा है,ऐसे में महीनों तक भुगतान न होना उनके लिए आर्थिक और मानसिक दोनों स्तर पर परेशानी का कारण बन गया है,कार्यकर्ताओं का कहना है कि यदि यही स्थिति बनी रही,तो काम प्रभावित होना स्वाभाविक है।
पोषण ट्रैकर ऐपःसबसे अहम काम,लेकिन भुगतान नहीं
पोषण ट्रैकर ऐप के माध्यम से बच्चों की पोषण स्थिति,गर्भवती महिलाओं का डेटा,कुपोषण से जुड़े आंकड़े नियमित रूप से अपडेट किए जाते हैं, यह ऐप विभाग की प्रमुख योजनाओं में से एक है,लेकिन इसी से जुड़े कार्यकर्ताओं को समय पर भुगतान नहीं मिलना नीतिगत और प्रशासनिक दोनों स्तर पर सवाल खड़े करता है।
कार्यकर्ताओं की चेतावनी : योजनाओं पर पड़ सकता है असर
कार्यकर्ताओं ने स्पष्ट किया है कि यदि जल्द भुगतान नहीं हुआ,तो फील्ड लेवल पर काम प्रभावित हो सकता है, पोषण अभियान की निगरानी कमजोर पड़ सकती है,यह चेतावनी केवल विरोध नहीं,बल्कि जमीनी हकीकत की ओर इशारा है।
परियोजना अधिकारी से संपर्क नहीं हो पाया…
इस संबंध में जब महिला एवं बाल विकास परियोजना अधिकारी मनेंद्रगढ़ शशि जायसवाल से संपर्क करने का प्रयास किया गया,तो उनके मोबाइल नंबर पर कॉल रिसीव नहीं किया गया,इससे यह मामला और गंभीर हो जाता है,क्योंकि शिकायत दर्ज होने के बाद भी अधिकारियों की ओर से कोई स्पष्ट प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
जिम्मेदारी किसकी? उठ रहे बड़े सवाल
9 माह की प्रोत्साहन राशि आखिर क्यों अटकी है?
सुपोषण चौपाल की राशि किस स्तर पर रुकी है?
क्या बजट की कमी है या प्रशासनिक लापरवाही?
बिना भुगतान के कर्मचारियों से काम लेना क्या उचित है?
घटती-घटना – Ghatati-Ghatna – Online Hindi News Ambikapur घटती-घटना – Ghatati-Ghatna – Online Hindi News Ambikapur