
- दिनदहाड़े दौड़ रहे कोयला ट्रक,ऊपर मिट्टी,नीचे माफिया का खेल….
- मिट्टी के नीचे छुपा कोयला रैकेटः चिरमिरी-खड़गवां रूट बना ‘ब्लैक कॉरिडोर’
- आदेश बेअसर,सड़कों पर ‘काला खेल’, अवैध कोयला परिवहन पर प्रशासन मौन
- किसके संरक्षण में चल रहा नेटवर्क? ईंट भट्ठों तक कोयले की सप्लाई पर सवाल
- ऊपर सफेद, अंदर काला : मिट्टी नहीं,माफिया ढो रहे हैं ट्रक
- सख्ती के दावों के बीच बेखौफ कारोबार,चिरमिरी में अवैध कोयले की सप्लाई जारी
-राजेन्द्र शर्मा-
खड़गवां/एमसीबी,11 अप्रैल 2026 (घटती-घटना)। मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर (एमसीबी) जिले में अवैध कोयला कारोबार का एक संगठित और चौंकाने वाला नेटवर्क सामने आ रहा है,जो प्रशासनिक सख्ती के तमाम दावों को चुनौती देता नजर आ रहा है,चिरमिरी बड़ी बाजार से शुरू होकर गोदरीपारा,भुकभुकी,दुबछोला,सिंघट और दुग्गी जैसे ग्रामीण मार्गों से गुजरते हुए पोड़ी-बचरा क्षेत्र के ईंट भट्ठों तक कोयले की सप्लाई दिनदहाड़े की जा रही है,सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि इस अवैध परिवहन को छुपाने के लिए एक बेहद चालाक तरीका अपनाया जा रहा है, कोयले से भरे मिनी ट्रकों के ऊपर सफेद मिट्टी की मोटी परत डाल दी जाती है, जिससे पहली नजर में वाहन सामान्य मिट्टी से लदा दिखाई देता है,यह न केवल कानून की आंखों में धूल झोंकने का तरीका है,बल्कि यह भी दर्शाता है कि अवैध कारोबार किस हद तक संगठित और संरक्षित है, सवाल यह उठता है कि इतने लंबे रूट पर खुलेआम हो रहे इस परिवहन पर खनिज विभाग,पुलिस और राजस्व अमले की नजर क्यों नहीं पड़ रही, या फिर यह सब कुछ नजरअंदाज किया जा रहा है। चिरमिरी से पोड़ी-बचरा तक चल रहा यह ‘काला खेल’ अब किसी से छुपा नहीं है। सफेद मिट्टी की आड़ में चल रहा यह कारोबार प्रशासन की आंखों के सामने ही पनप रहा है, अब सबसे बड़ा सवाल यही है क्या प्रशासन इस नेटवर्क पर सर्जिकल स्ट्राइक करेगा, या फिर यह खेल इसी तरह चलता रहेगा?आने वाले दिनों में की गई कार्रवाई ही तय करेगी कि यह मामला एक बड़ी जांच में बदलता है या फिर एक और ‘अनदेखी’ बनकर रह जाता है।
दिनदहाड़े ‘काला खेल’, सफेद परत का छलावा
चिरमिरी-खड़गवां क्षेत्र में अवैध कोयले का परिवहन अब रात के अंधेरे तक सीमित नहीं रहा, स्थानीय लोगों और सूत्रों के अनुसार, यह कारोबार अब दिनदहाड़े खुलेआम संचालित हो रहा है,मिनी ट्रकों में कोयला भरने के बाद उसके ऊपर सफेद मिट्टी की मोटी परत डाल दी जाती है। इस ‘कवर’ की वजह से वाहन पहली नजर में सामान्य निर्माण सामग्री या मिट्टी से भरा लगता है, यही वजह है कि चेकिंग के दौरान कई बार यह वाहन संदेह से बच निकलते हैं, यह तरीका कोई नया नहीं,बल्कि लंबे समय से अपनाया जा रहा एक सुनियोजित तंत्र है,जो प्रशासनिक निगरानी को चुनौती देता है।
लंबा रूट,मजबूत नेटवर्क का संकेत
सूत्र बताते हैं कि अवैध कोयला चिरमिरी बड़ी बाजार से निकलकर गोदरीपारा,भुकभुकी, दुबछोला,सिंघट और दुग्गी जैसे कई गांवों से होते हुए पोड़ी-बचरा क्षेत्र तक पहुंचाया जाता है, इतने लंबे और व्यस्त मार्ग पर लगातार मिनी ट्रकों का आना-जाना यह दर्शाता है कि यह कोई छिटपुट गतिविधि नहीं, बल्कि एक संगठित नेटवर्क है, विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह का नेटवर्क बिना स्थानीय स्तर पर मजबूत समन्वय और संरक्षण के संचालित नहीं हो सकता।
ईंट भट्ठों तक सीधी सप्लाई मांग और आपूर्ति का खेल
इस अवैध कोयले की अंतिम मंजिल पोड़ी-बचरा क्षेत्र के ईंट भट्ठे बताए जा रहे हैं,ईंट निर्माण में कोयले की बड़ी मात्रा में आवश्यकता होती है, और यही मांग इस पूरे अवैध नेटवर्क को बढ़ावा दे रही है, सूत्रों के अनुसार, कई भट्ठों तक नियमित रूप से कोयले की सप्लाई की जा रही है, यह सवाल उठता है कि क्या इन भट्ठों के पास वैध स्रोत से कोयला लेने की व्यवस्था नहीं है, या फिर अवैध कोयला सस्ता पड़ने के कारण जानबूझकर इसका उपयोग किया जा रहा है, यदि दूसरा मामला सही है, तो यह केवल परिवहन का ही नहीं,बल्कि उपभोग का भी अवैध नेटवर्क बन चुका है।
प्रशासनिक निर्देश बनाम जमीनी हकीकत
जिला और संभाग स्तर के अधिकारियों द्वारा समय-समय पर अवैध गतिविधियों पर सख्ती के निर्देश दिए जाते रहे हैं,बैठकों में स्पष्ट कहा जाता है कि किसी भी प्रकार का अवैध खनन या परिवहन बर्दाश्त नहीं किया जाएगा, लेकिन जमीनी हकीकत इन दावों से बिल्कुल अलग नजर आती है, दिनदहाड़े चल रहे इस कारोबार ने यह साबित कर दिया है कि या तो निगरानी तंत्र कमजोर है,या फिर कहीं न कहीं मिलीभगत का खेल चल रहा है।
कहां चूक रहा है सिस्टम?
इस पूरे मामले में तीन प्रमुख विभागों की भूमिका अहम है खनिज विभाग, पुलिस विभाग, राजस्व विभाग, यदि इतने बड़े पैमाने पर अवैध कोयले का परिवहन हो रहा है, तो यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि इन विभागों की संयुक्त कार्रवाई क्यों नहीं दिख रही,क्या चेक पोस्ट पर जांच नहीं हो रही? क्या स्थानीय स्तर पर जानकारी होने के बावजूद कार्रवाई नहीं की जा रही? या फिर यह सब कुछ जानबूझकर नजर अंदाज किया जा रहा है?
स्थानीय लोगों की गवाही : ‘सब जानते हैं,कोई बोलता नहीं’
स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि यह कारोबार कोई छुपा हुआ नहीं है, रोजाना मिनी ट्रकों की आवाजाही होती है और लोग जानते हैं कि इनमें क्या जा रहा है, लेकिन कार्रवाई न होने से लोगों में यह धारणा बन गई है कि इस नेटवर्क को किसी न किसी स्तर पर संरक्षण प्राप्त है,कुछ लोगों का यह भी कहना है कि शिकायत करने पर भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं होती,जिससे अवैध कारोबारियों के हौसले और बुलंद हो जाते हैं।
संभावित आर्थिक नुकसान और पर्यावरणीय खतरा
अवैध कोयला परिवहन केवल कानून का उल्लंघन नहीं है, बल्कि यह सरकार को राजस्व का भारी नुकसान भी पहुंचाता है, इसके अलावा, बिना नियमन के कोयले का उपयोग पर्यावरण के लिए भी गंभीर खतरा बन सकता है, ईंट भट्ठों में निम्न गुणवत्ता वाले कोयले के उपयोग से प्रदूषण बढ़ता है, जिसका असर आसपास के गांवों और लोगों के स्वास्थ्य पर पड़ता है।
कार्रवाई का रोडमैपः क्या किया जा सकता है?
विशेषज्ञों और स्थानीय लोगों के अनुसार, इस नेटवर्क को तोड़ने के लिए कुछ ठोस कदम उठाए जा सकते हैं, संवेदनशील मार्गों पर अचानक नाकेबंदी, मिनी ट्रकों की सघन जांच,ईंट भट्ठों की सप्लाई चेन की जांच, संयुक्त टीम बनाकर अभियान चलाना,ड्रोन और तकनीकी निगरानी का उपयोग यदि इन उपायों को गंभीरता से लागू किया जाए,तो अवैध नेटवर्क का पर्दाफाश संभव है।
बड़ी चुनौती या अनदेखी?
यह मामला अब केवल अवैध कोयले के परिवहन तक सीमित नहीं रह गया है, यह प्रशासनिक इच्छाशक्ति, निगरानी तंत्र और जवाबदेही की परीक्षा बन चुका है, यदि इस पर जल्द कार्रवाई नहीं होती, तो यह संकेत जाएगा कि अवैध कारोबार के सामने प्रशासनिक तंत्र कमजोर पड़ रहा है।
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