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अम्बिकापुर@अंबिकापुर में डीजीपी की उच्चस्तरीय बैठक…कानून-व्यवस्था व नक्सलवाद पर बड़ा बयान…

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ग्रामीण क्षेत्रों में पुलिसिंग मजबूत करने के निर्देश ड्रग्स सप्लाई रोकने के साथ मांग कम करने पर जोर

-संवाददाता-
अम्बिकापुर,04 अप्रैल 2026 (घटती-घटना)। सरगुजा संभाग मुख्यालय अंबिकापुर में शनिवार को पुलिस विभाग की एक महत्वपूर्ण उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता छत्तीसगढ़ के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) अरुण देव गौतम ने की।
इस दौरान सरगुजा रेंज के आईजी दीपक कुमार झा सहित संभाग के सभी जिलों के पुलिस अधीक्षक और राजपत्रित अधिकारी उपस्थित रहे। बैठक में संभाग की कानून-व्यवस्था,अपराध नियंत्रण और सुरक्षा व्यवस्था की विस्तार से समीक्षा की गई। डीजीपी गौतम ने थाना स्तर पर पुलिस की कार्यप्रणाली को बेहतर बनाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि सरगुजा एक विस्तृत ग्रामीण क्षेत्र है,जहां कई बार पुलिस की पहुंच सीमित रह जाती है। ऐसे में पारंपरिक और व्यवहारिक पुलिसिंग तरीकों को अपनाने की आवश्यकता है। उन्होंने डीजीपी स्तर के अधिकारियों को अपने क्षेत्र और थाना की सूक्ष्म जानकारी रखने तथा सुधार करने के निर्देश दिए। वहीं, पुलिस अधीक्षकों को कम्युनिटी पुलिसिंग को बढ़ावा देने और रेंज आईजी को डीजीपी के कार्यों की नियमित समीक्षा करने को कहा गया।
नक्सलवाद पर बड़ा बयान : बैठक के बाद मीडिया से चर्चा में डीजीपी अरुण देव गौतम ने बस्तर में नक्सलवाद को लेकर बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि वर्तमान स्थिति स्पष्ट है और अब केवल कुछ इक्का-दुक्का लोग ही हथियार छोडकर गांवों में छिपे हुए हैं। छत्तीसगढ़ की सीमा में अब कोई बड़ा हथियारबंद नक्सली समूह सक्रिय नहीं है।
नाबालिग वाहन चालकों पर सख्ती : नाबालिगों द्वारा वाहन चलाने के मुद्दे पर डीपीपी ने कहा कि कानून काफी सख्त है। यदि कोई नाबालिग वाहन चलाते पकड़ा जाता है तो वाहन मालिक पर कार्रवाई का प्रावधान है। उन्होंने बताया कि इस तरह के मामलों में कई कार्रवाई की जा चुकी है और हाई कोर्ट ने भी इसे गंभीरता से लिया है।
उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी में यातायात नियमों के उल्लंघन की प्रवृत्ति बढ़ रही है, जिसे रोकने में परिवार और स्कूलों की अहम भूमिका है।
अफीम खेती को लेकर अलर्ट : डीजीपी ने बताया कि कुछ बाहरी राज्यों के लोग छत्तीसगढ़ में जमीन किराए पर लेकर अफीम की खेती करने की कोशिश कर रहे हैं। भोले-भाले किसानों को धोखे में रखकर खेती कराई जाती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि पुलिस इस मामले में पूरी तरह सतर्क है और ऐसी गतिविधियों पर सख्ती से कार्रवाई की जाएगी।
ड्रग्स पर सख्ती के साथ सामाजिक जिम्मेदारी पर जोर
डीजीपी ने राज्य में गांजा,अफीम और अन्य नशीले पदार्थों की सप्लाई रोकने को लेकर भी महत्वपूर्ण बातें कही। उन्होंने कहा कि ड्रग्स की सप्लाई पर नियंत्रण जितना जरूरी है, उतना ही जरूरी इसकी मांग को कम करना भी है। इसे केवल पुलिस की जिम्मेदारी नहीं मानना चाहिए, बल्कि समाज को भी इसमें भागीदारी निभानी होगी। उन्होंने बताया कि पहले नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर गांजा की खेती होती थी, जिससे नक्सलियों को आर्थिक मदद मिलती थी। वर्तमान में इस पर काफी हद तक नियंत्रण पाया गया है। हालांकि हालिया रिपोर्ट में राज्य में गांजा की खपत बढऩे की बात सामने आई है, जो चिंता का विषय है। डीजीपीने कहा कि पहले छत्तीसगढ़ को केवल ट्रांजिट रूट के रूप में इस्तेमाल किया जाता था, लेकिन अब स्थानीय स्तर पर खपत बढऩे से इसके दुष्परिणाम सामने आ रहे हैं। ऐसे में पुलिस और समाज दोनों को मिलकर इस पर नियंत्रण करना होगा।


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