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खड़गवां@ ओपन परीक्षा में नकल का खेल बेनकाब देवाडांड-खड़गवां केंद्रों पर “सेटिंग” से पास कराने के आरोप

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  • परीक्षा केंद्र बने नकल के अड्डे! देवाडांड और खड़गवां में खुलेआम धांधली
  • पैसे दो,पास हो जाओ! ओपन परीक्षा में “सेटिंग” का संगठित खेल उजागर
  • ईमानदार छात्रों के साथ अन्याय: ओपन परीक्षा में नकल और सेटिंग का बोलबाला
  • उड़नदस्ता नदारद, नकल जारी: देवाडांड-खड़गवां केंद्रों की व्यवस्था पर सवाल
  • ओपन परीक्षा में गड़बड़ी की आशंका: नकल, सेटिंग और निगरानी पर उठे सवाल
  • ओपन परीक्षा में खुलेआम नकल का खेल! देवाडांड और खड़गवां केंद्रों पर “सेटिंग” से परीक्षा पास कराने के आरोप
  • सूत्रों के हवाले से बड़े पैमाने पर नकल, केंद्र प्रबंधन और बाहरी लोगों की भूमिका पर गंभीर सवाल,शिक्षा व्यवस्था की साख दांव पर
  • भूमिका: परीक्षा व्यवस्था पर उठते गंभीर सवाल


-राजेन्द्र शर्मा-
खड़गवां,04 अप्रैल 2026(घटती-घटना)।
ओपन स्कूल परीक्षाओं की पारदर्शिता और निष्पक्षता को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं, विकासखंड खड़गवां के अंतर्गत देवाडांड और खड़गवां परीक्षा केंद्रों से सामने आ रही सूचनाओं ने पूरे शिक्षा तंत्र को कटघरे में ला खड़ा किया है।
सूत्रों के अनुसार इन केंद्रों में खुलेआम नकल कराए जाने के साथ-साथ सेटिंग के जरिए परीक्षार्थियों को पास कराने का संगठित खेल चल रहा है। यदि यह आरोप सही साबित होते हैं, तो यह केवल परीक्षा नियमों का उल्लंघन नहीं,बल्कि शिक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर सीधा आघात है।
उड़नदस्ता व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल
जानकारी के अनुसार विकासखंड खड़गवां के विकास खंड शिक्षा अधिकारी को उड़नदस्ता अधिकारी नियुक्त किया गया है, लेकिन उनके मोबाइल नंबर पर संपर्क करने के कई प्रयासों के बावजूद उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया, सूत्रों से यह भी जानकारी मिल रही है कि संबंधित अधिकारी वर्तमान में छत्तीसगढ़ से बाहर हैं, ऐसे में यह बड़ा प्रश्न खड़ा होता है कि परीक्षा केंद्रों का निरीक्षण आखिर कौन कर रहा है? यदि अधिकारी मुख्यालय में उपस्थित नहीं हैं और किसी अन्य को जिम्मेदारी नहीं सौंपी गई है, तो यह प्रशासनिक लापरवाही का गंभीर मामला बनता है।
जिला शिक्षा अधिकारी का पक्ष
इस संबंध में जिला शिक्षा अधिकारी आर.पी. मिरे से जानकारी लेने पर उन्होंने कहा कि मेरे द्वारा विकास खंड शिक्षा अधिकारी को उड़नदस्ता नियुक्त किया गया है, यदि नकल की कोई शिकायत प्राप्त होती है, तो निश्चित रूप से कार्रवाई की जाएगी, हालांकि, इस बयान के बाद भी सवाल बना हुआ है कि जब मौके पर अनियमितताओं की चर्चाएं हैं, तो सक्रिय निगरानी क्यों नहीं हो रही है।
जांच से हो सकता है बड़ा खुलासा
स्थानीय लोगों और अभिभावकों का मानना है कि यदि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए,तो कई बड़े खुलासे सामने आ सकते हैं,विशेष रूप से सीसीटीवी फुटेज,ड्यूटी रजिस्टर,प्रवेश नियंत्रण और उड़नदस्ता निरीक्षण रिपोर्ट की गहन जांच आवश्यक है, लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए,ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
शिक्षा व्यवस्था की साख बचाने की चुनौती
देवाडांड और खड़गवां परीक्षा केंद्रों से सामने आए ये आरोप केवल स्थानीय स्तर की समस्या नहीं हैं, बल्कि पूरे शिक्षा तंत्र की पारदर्शिता और विश्वसनीयता पर सवाल खड़े करते हैं, यदि समय रहते सख्त कदम नहीं उठाए गए,तो यह प्रवृत्ति और अधिक बढ़ सकती है,जिससे शिक्षा व्यवस्था की साख को अपूरणीय क्षति पहुंच सकती है,अब देखना यह होगा कि प्रशासन इन गंभीर आरोपों को कितनी गंभीरता से लेता है और क्या दोषियों पर ठोस कार्रवाई की जाती है या नहीं।
केंद्रों में खुलेआम नकल,नियम सिर्फ औपचारिकता तक सीमित
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार कई परीक्षा कक्षों में परीक्षार्थियों को खुले तौर पर नकल सामग्री उपलब्ध कराई जा रही है,इसमें किताबें,हल प्रश्नपत्र और अन्य संदिग्ध माध्यम शामिल हैं,स्थिति यह है कि परीक्षा कक्ष में मौजूद जिम्मेदार कर्मचारियों की उपस्थिति के बावजूद नियमों का पालन नहीं हो रहा है,यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि जब परीक्षा केंद्रों में निगरानी के लिए पर्यवेक्षक,केंद्राध्यक्ष और अन्य व्यवस्थाएं मौजूद हैं,तो इतनी बड़ी लापरवाही या मिलीभगत कैसे संभव हो रही है?
सेटिंग का संगठित खेल : सुविधा शुल्क लेकर पास कराने के आरोप
सूत्रों के अनुसार कुछ परीक्षा केंद्रों में पहले से सेटिंग कर छात्रों को पास कराने का खेल चल रहा है,बताया जा रहा है कि कुछ परीक्षार्थियों से सुविधा शुल्क लेकर उन्हें नकल करने की खुली छूट दी जाती है,जिससे वे आसानी से परीक्षा पास कर सकें,यह स्थिति अत्यंत गंभीर है,क्योंकि इससे परीक्षा की निष्पक्षता पूरी तरह समाप्त हो जाती है और योग्य एवं मेहनती छात्रों के अधिकारों का हनन होता है।
बाहरी लोगों की संदिग्ध भूमिका,सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल
परीक्षा केंद्रों के आसपास बाहरी लोगों की आवाजाही भी संदेह के घेरे में है, सूत्रों का कहना है कि कई स्थानों पर मोबाइल फोन और पर्चियों के माध्यम से उत्तर पहुंचाए जा रहे हैं,यदि यह सही है,तो यह स्पष्ट संकेत है कि परीक्षा केंद्रों की सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह कमजोर है और नियमों का पालन केवल कागजों तक सीमित रह गया है।
ईमानदार विद्यार्थियों के साथ अन्याय
इस पूरे घटनाक्रम का सबसे नकारात्मक प्रभाव उन छात्रों पर पड़ रहा है, जो मेहनत और ईमानदारी से परीक्षा दे रहे हैं,नकल और सेटिंग के चलते परीक्षा परिणाम प्रभावित होने का खतरा बढ़ जाता है,जिससे योग्य छात्रों का मनोबल टूटता है और उनके भविष्य पर भी असर पड़ता है,यह स्थिति शिक्षा व्यवस्था के मूल उद्देश्य को ही कमजोर करती है।
प्रशासन के लिए प्रमुख जांच बिंदु

  • देवाडांड और खड़गवां परीक्षा केंद्रों में नकल की शिकायतें
  • सेटिंग और सुविधा शुल्क की सत्यता
  • परीक्षा केंद्रों में बाहरी लोगों की भूमिका
  • उड़नदस्ता और पर्यवेक्षण व्यवस्था की सक्रियता
  • सीसीटीवी फुटेज और ड्यूटी रजिस्टर की जांच
  • परीक्षा केंद्रों में प्रवेश और निगरानी प्रणाली

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