- अमृत काल में ‘छिलकों’ का सहारा,एमसीबी के गांवों में विकास की खुली पोल
- सड़क नहीं, पुल नहीं…बस जुगाड़, क्या यही है वनांचल का विकास मॉडल?
- सौर ऊर्जा बनी शो-पीस, अंधेरे में डूबे गांव—जिम्मेदार कौन?
- छाल के पुल पर चलती जिंदगी,सिस्टम की नाकामी की जिंदा तस्वीर
- फाइलों में दफन विकास,जंगल में भटकती जिंदगी—एमसीबी की हकीकत
- डिजिटल इंडिया बनाम ‘छाल इंडिया’…एमसीबी में विकास का असली चेहरा
- जी के दौर में ‘खाट एम्बुलेंस’ क्या यही है अमृत काल?
- हर दिन मौत से जंग…छाल के पुल पर गुजरती वनांचल की जिंदगी
- अंधेरे में सपने,कंधों पर मरीज…विकास से दूर गांवों की दर्दनाक कहानी
- दुर्गम रास्तों का बहाना या सिस्टम की नाकामी? एमसीबी में विकास गायब
- क्या सिर्फ वोट बैंक हैं ये गांव? वनांचल की बदहाली पर बड़ा सवाल

-संवाददाता-
एमसीबी,19 मार्च 2026 (घटती-घटना)। देश जहां ‘अमृत काल’ में विकास की नई ऊंचाइयों का दावा कर रहा है, वहीं छत्तीसगढ़ के नवगठित जिला एमसीबी के दूरस्थ वनांचल क्षेत्रों में जनौरा, बडेरा और बेंगची की तस्वीर उस दावे पर गहरा सवाल खड़ा करती है,यहां के हालात बताते हैं कि विकास के आंकड़े चाहे जितने चमकदार क्यों न हों, जमीन पर हकीकत आज भी बेहद भयावह है,यहां के ग्रामीण आज भी मूलभूत सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहे हैं, न सड़क, न स्वास्थ्य, न शिक्षा और न ही स्थायी बिजली। मानो यह क्षेत्र आधुनिक भारत का हिस्सा न होकर किसी भूले-बिसरे युग में अटका हो।
छाल का पुलः विकास की
पोल खोलती तस्वीर
इस पूरे क्षेत्र की सबसे चौंकाने वाली तस्वीर उस नदी पर बने ‘जुगाड़ पुल’ की है, जो शासन-प्रशासन के दावों पर करारा तमाचा है,नदी पर आज तक कोई पक्का पुल नहीं बन पाया,जबकि यही नदी गांवों को मुख्य मार्ग से जोड़ती है। मजबूरी में वन विभाग ने लकड़ी परिवहन के लिए साल के पेड़ों की छाल बिछाकर अस्थाई रास्ता बना दिया,आज यही छाल का पुल ग्रामीणों की जीवनरेखा बन गया है,लेकिन यह सवाल खड़ा होता है की जब विभाग का काम खत्म होगा, तब ग्रामीणों का क्या होगा?
हर दिन ‘मौत का सफर’
इस नदी को पार करना ग्रामीणों के लिए रोज की मजबूरी है, गर्मी में रेत में वाहन धंसते हैं,बरसात में नदी उफान पर होती है, सर्दियों में भी रास्ता जोखिम भरा रहता है यहां हर यात्रा एक जंग है,और हर कदम जोखिम से भरा।
स्वास्थ्य व्यवस्था : खाट ही एम्बुलेंस
स्वास्थ्य सुविधाओं की हालत इतनी खराब है कि एम्बुलेंस गांव तक नहीं पहुंचती,मरीजों को खाट पर लादकर कई किलोमीटर तक ले जाना पड़ता है, गर्भवती महिलाओं और गंभीर मरीजों के लिए यह स्थिति जानलेवा साबित हो रही है।
शिक्षा : सपनों पर लगा ताला
पक्की सड़क नहीं होने के कारण शिक्षक आने से कतराते हैं,स्कूल भवन जर्जर हो चुके हैं,माध्यमिक शिक्षा के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ती है,यहां बच्चों का भविष्य,रास्तों की तरह ही अनिश्चित और कठिन है।
पेयजल संकट : दूषित पानी ही विकल्प
शुद्ध पेयजल की सुविधा न होने के कारण ग्रामीण झरिया,नदी या नाले के पानी पर निर्भर हैं,जिससे बीमारियों का खतरा लगातार बना रहता है।
ऊबड़-खाबड़ रास्ते… विकास का सबसे बड़ा रोड़ा
जनौरा,बडेरा और बेंगची के रास्ते इतने खराब हैं कि, दोपहिया वाहन चलाना जोखिम भरा,चारपहिया वाहन पहुंचना लगभग असंभव, गर्भवती महिलाओं और बुजुर्गों के लिए यह रास्ता किसी यातना से कम नहीं।
सौर ऊर्जा : ‘सफेद हाथी’ साबित हुई योजना
सरकार ने सौर ऊर्जा की सुविधा दी, लेकिन बैटरियां खराब, रखरखाव नहीं हल्की बारिश में सिस्टम बंद, नतीजा ये है की सूरज ढलते ही पूरा गांव अंधेरे में डूब जाता है,जंगली जानवरों का खतरा बढ़ जाता है।
शिकायतें बेअसरः ‘दुर्गम रास्ता’ बना बहाना
ग्रामीणों ने कई बार शिकायत की,लेकिन हर बार जवाब मिला रास्ता कठिन है,यानी समस्या भी रास्ता, और बहाना भी रास्ता।
वोट के समय वादे,बाद में भूल
हर चुनाव में नेता गांव तक पहुंचते हैं,वादे किए जाते हैं,योजनाएं गिनाई जाती हैं,लेकिन चुनाव खत्म होते ही गांव फिर उपेक्षा के अंधेरे में डूब जाते हैं।
क्या सिर्फ वोट बैंक बनकर रह गए हैं ये गांव?
– क्या उनकी अहमियत सिर्फ वोट देने तक सीमित है?
– क्या विकास सिर्फ शहरों तक ही सीमित रहेगा?
प्रशासन की जिम्मेदारीः क्या होगा स्वतः संज्ञान?
कानून प्रशासन को यह अधिकार देता है कि वह जनहित के मामलों में स्वतः संज्ञान लेकर कार्रवाई करे, तो सवाल यह है,क्या इन गांवों की हालत इतनी सामान्य है कि उस पर स्वतः संज्ञान की जरूरत नहीं?
अंतिम निष्कर्ष है की ‘अमृत काल’ या ‘अंधकार काल’?
एक ओर देश डिजिटल इंडिया और बुलेट ट्रेन की बात कर रहा है,दूसरी ओर ये गांव आज भी छाल के पुल और अंधेरे में जिंदगी जीने को मजबूर हैं, यह सिर्फ विकास की कमी नहीं, बल्कि उस व्यवस्था की विफलता है जहां योजनाएं बनती हैं,बजट पास होता है लेकिन जमीन तक कुछ नहीं पहुंचता।
घटती-घटना – Ghatati-Ghatna – Online Hindi News Ambikapur घटती-घटना – Ghatati-Ghatna – Online Hindi News Ambikapur