बिलासपुर,19 मार्च 2026। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने राज्य में फायर स्टेशनों की भारी कमी और अग्निशमन व्यवस्था में व्याप्त खामियों पर कड़ी चिंता जताई है। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा की डिवीजन बेंच ने एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार को फटकार लगाई और भविष्य के लिए स्पष्ट ‘एक्शन प्लान’ पेश करने का निर्देश दिया है। मामले की अगली सुनवाई 4 मई को तय की गई है। शासन द्वारा कोर्ट में पेश किए गए शपथपत्र के अनुसार, वर्तमान में प्रदेश के केवल 9 जिलों—दुर्ग, नवा रायपुर, अंबिकापुर, जगदलपुर, जांजगीर-चांपा, कोरबा, रायगढ़, राजनांदगांव और कबीरधाम—में ही पूर्ण रूप से फायर स्टेशन संचालित हैं। शेष जिलों में अभी भी होमगार्ड परिसर से अस्थाई रूप से काम चलाया जा रहा है। हालांकि, शासन ने बताया कि बिलासपुर और उरला-सिलतरा में निर्माण कार्य जारी है, जबकि 7 अन्य जिलों (जशपुर, महासमुंद, कोरिया, दंतेवाड़ा, कांकेर, बलौदाबाजार, धमतरी) में टेंडर प्रक्रिया चल रही है। हैरानी की बात यह है कि बिलासपुर में फायर स्टेशन निर्माण की मंजूरी साल 2020 में ही मिल गई थी,लेकिन जिला प्रशासन पिछले चार वर्षों में इसके लिए उपयुक्त जमीन नहीं खोज पाया है। मोपका सब-स्टेशन में लगी आग के बाद यह मुद्दा फिर गरमाया था। शासन ने कोर्ट को बताया कि शहर के भीतर जमीन न मिलने के कारण रिस्पॉन्स टाइम बढ़ जाता है। अब सभी कलेक्टरों को निर्देश दिए गए हैं कि वे उपयुक्त स्थान पर कम से कम 2 एकड़ जमीन उपलब्ध कराएं। आंकड़ों के अनुसार, पूरे राज्य में मात्र 147 फायर फाइटिंग वाहन उपलब्ध हैं।
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