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नई दिल्ली@एआई जेनरेटेड सबूतों पर फैसला लेना बिल्कुल गलत,इसका सीधा असर न्याय प्रक्रिया पर पड़ता है : सुप्रीम कोर्ट

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नई दिल्ली,02 मार्च 2026। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार आंध्र प्रदेश हाइकोर्ट के फैसले के खिलाफ याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस(एआई) की मदद से बनाए गए सबूतों पर फैसला लिखना गलत काम है। कोर्ट ने कहा कि ये कोई गलती से होने वाला काम नहीं है। जस्टिस पी एस नरसिम्हा और आलोक अराधे की बेंच ने कहा कि इसके नतीजों और जवाबदेही की जांच करना चाहते हैं क्योंकि इसका सीधा असर फैसले की प्रक्रिया की ईमानदारी पर पड़ता है। कोर्ट ने इस मामले में अटॉर्नी जनरल आर वेंकटरमणी, सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता और बार काउंसिल ऑफ इंडिया को नोटिस जारी किया है। दरअसल, पिछले साल अगस्त में आंध्र प्रदेश की एक ट्रायल कोर्ट ने विवादित प्रॉपर्टी के केस में एआई से बनी तस्वीर के आधार पर फैसला दिया था। फैसले के खिलाफ आंध्र प्रदेश हाइकोर्ट में याचिका दायर की गई थी। इसी साल जनवरी में हाइकोर्ट ने भी याचिका खारिज कर दी थी। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट में अपील की गई।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा…
अगर किसी फैसले का आधार गैर-मौजूद या नकली सबूत हों, तो यह सिर्फ गलती नहीं बल्कि गंभीर गलत आचरण (मिसकंडक्ट) है। ऐसे मामले में कानूनी कार्रवाई हो सकती है। अटॉर्नी जनरल, सॉलिसिटर जनरल और बार काउंसिल ऑफ इंडिया को नोटिस जारी किया जाता है। ट्रायल कोर्ट ने केस के दौरान विवादित प्रॉपर्टी की स्थिति देखने के लिए एक एडवोकेट-कमिश्नर नियुक्त किया था। याचिकाकर्ताओं ने कमिश्नर की रिपोर्ट पर ऑब्जेक्शन जताया।


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