छत्तीसगढ़ श्रमजीवी पत्रकार कल्याण संघ ने एसपी को सौंपा ज्ञापन,निष्पक्ष जांच व तत्काल गिरफ्तारी की मांग…
-संवाददाता-
सूरजपुर,26 फरवरी 2026 (घटती-घटना)। जिले के खड़गवां कला क्षेत्र से एक बेहद गंभीर और चिंताजनक मामला सामने आया है,जहां एक पत्रकार के परिवार पर दबंगों ने घर में घुसकर बर्बर हमला कर दिया,आरोप है कि हमलावरों ने न केवल महिला के साथ बेरहमी से मारपीट की,बल्कि घटना का वीडियो रिकॉर्ड कर रहे मोबाइल को छीनकर उसे रिसेट कर दिया,ताकि साक्ष्य नष्ट हो जाएं,इस घटना ने पूरे पत्रकारिता जगत में आक्रोश पैदा कर दिया है,मामले को लेकर छत्तीसगढ़ श्रमजीवी पत्रकार कल्याण संघ के पदाधिकारियों ने पुलिस अधीक्षक सूरजपुर को ज्ञापन सौंपकर आरोपियों की तत्काल गिरफ्तारी,निष्पक्ष जांच और पीडि़त परिवार को सुरक्षा प्रदान करने की मांग की है।
जमीन विवाद से शुरू हुआ तनाव
प्राप्त जानकारी के अनुसार,यह पूरा मामला जमीन संबंधी विवाद से जुड़ा हुआ है, शिकायत के अनुसार 20 फरवरी की शाम कुछ लोग तारा चक्रधारी,पति वीरेंद्र चक्रधारी,के घर के बाहर पहुंचे और गाली-गलौज करते हुए जान से मारने की धमकी देने लगे,पीडि़त परिवार ने तत्काल खड़गवां चौकी में इसकी सूचना दी,परिवार का आरोप है कि पुलिस ने शिकायत के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं की,न तो आरोपियों को समझाइश दी गई और न ही कोई प्रभावी कानूनी कदम उठाया गया,स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि उसी समय सख्ती दिखाई जाती, तो अगले दिन की भयावह घटना को रोका जा सकता था।
मोबाइल छीनकर साक्ष्य नष्ट करने का आरोप
घटना के दौरान जब तारा चक्रधारी मोबाइल से वीडियो रिकॉर्ड कर रही थीं,तो हमलावरों ने इसे देख लिया,आरोप है कि उन्होंने मोबाइल छीन लिया और उसे रिसेट कर दिया,ताकि घटना का कोई डिजिटल प्रमाण शेष न रहे,डिजिटल साक्ष्य को नष्ट करने की यह कोशिश मामले को और अधिक गंभीर बना देती है,यदि यह आरोप सही साबित होता है, तो यह कानून की खुली अवहेलना और न्याय प्रक्रिया में बाधा डालने का मामला भी बनता है।
पत्रकार संगठन का आक्रोश
घटना के विरोध में छत्तीसगढ़ श्रमजीवी पत्रकार कल्याण संघ के जिला एवं संभागीय पदाधिकारियों ने पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुंचकर ज्ञापन सौंपा,ज्ञापन में कहा गया है कि पत्रकार के परिवार पर हमला लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है,पुलिस की प्रारंभिक लापरवाही से आरोपियों का मनोबल बढ़ा, आरोपियों को तत्काल गिरफ्तार किया जाए, पीडि़त परिवार को सुरक्षा दी जाए,मोबाइल डेटा रिकवरी कर डिजिटल साक्ष्य जुटाए जाएं,संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र कार्रवाई नहीं हुई तो प्रदेश स्तर पर आंदोलन किया जाएगा।
भय के साये में जी रहा परिवार
हमले के बाद से पीडि़त परिवार मानसिक और शारीरिक रूप से आहत है। परिजनों का कहना है कि उन्हें लगातार डर बना हुआ है कि आरोपी फिर से हमला कर सकते हैं,स्थानीय ग्रामीणों में भी दहशत का माहौल है,कई लोगों का कहना है कि क्षेत्र में दबंगों का प्रभाव बढ़ता जा रहा है और आम नागरिक स्वयं को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं।
प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती
अब यह मामला पुलिस प्रशासन के लिए अग्निपरीक्षा बन गया है,क्या पुलिस निष्पक्ष जांच कर आरोपियों को गिरफ्तार करेगी? क्या डिजिटल साक्ष्य की फोरेंसिक जांच कर सच्चाई सामने लाई जाएगी? क्या पीडि़त परिवार को सुरक्षा प्रदान की जाएगी? ये सवाल अब सिर्फ एक परिवार तक सीमित नहीं रहे, बल्कि पूरे जिले की कानून-व्यवस्था से जुड़ गए हैं।
लोकतंत्र के चौथे स्तंभ पर सवाल
पत्रकार संगठनों का कहना है कि यदि पत्रकार और उनके परिवार सुरक्षित नहीं हैं,तो यह लोकतंत्र के चौथे स्तंभ के लिए खतरे की घंटी है,इस घटना ने यह भी सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या जमीन विवादों में प्रभावशाली लोगों का दबाव कानून से ऊपर होता जा रहा है? फिलहाल, सभी की निगाहें पुलिस प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी हैं, यदि आरोपियों पर सख्त और त्वरित कार्रवाई होती है, तो यह न्याय व्यवस्था में विश्वास को मजबूत करेगा; अन्यथा यह मामला बड़े आंदोलन का रूप ले सकता है।
अगली सुबह घर में घुसकर किया हमला…
21 फरवरी की सुबह लगभग 10 बजे,कार्रवाई न होने से हौसला बुलंद आरोपियों ने लाठी-डंडों से लैस होकर पीडि़त के घर में घुसकर हमला कर दिया, हमले के दौरान तारा चक्रधारी को बेरहमी से पीटा गया,उनके हाथ और जांघ में गंभीर चोटें आईं,बाल पकड़कर जमीन पर पटका गया,कपड़े फाड़ दिए गए, घर में तोड़फोड़ की गई,प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, हमलावरों ने महिला के साथ अमानवीय व्यवहार किया और पूरे परिवार को आतंकित करने की कोशिश की।
पत्रकार पति पर भी बरसाए डंडे…
जब उनके पति वीरेंद्र कुमार चक्रधारी,जो पेशे से पत्रकार हैं और संगठन के प्रतापपुर ब्लॉक अध्यक्ष भी हैं,पत्नी को बचाने के लिए आगे आए,तो आरोपियों ने उनके साथ भी मारपीट की, बताया जा रहा है कि हमलावरों का उद्देश्य केवल मारपीट करना नहीं,बल्कि परिवार को सबक सिखाने और भयभीत करने का था,पत्रकार संगठनों का कहना है कि यह हमला सिर्फ एक परिवार पर नहीं,बल्कि पत्रकारिता की स्वतंत्रता पर भी हमला है।
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