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सोनहत@महाशिवरात्रि पर भक्ति का महासागर: शिवमहापुराण के समापन में उमड़ा जनसैलाब

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  • द्वादश ज्योतिर्लिंगों की महिमा से गुंजायमान हुआ सोनहत
  • द्वादश ज्योतिर्लिंग की महिमा से आलोकित हुआ पंडाल,हर-हर महादेव से थर्राया सोनहत
  • भक्ति के मंच पर दिखी सामाजिक समरसताः महाशिवरात्रि पर एकत्र हुए सत्ता-विपक्ष
  • पार्थिव पूजन और देवी चरित्र से भावविभोर श्रद्धालु, शिवकथा का भव्य समापन
  • मैं यहाँ वक्ता नहीं,केवल श्रोता हूँः महाशिवरात्रि पर डॉ. महंत का विनम्र संदेश…

सोनहत,15 फरवरी 2026(घटती-घटना)। महाशिवरात्रि के पावन पर्व पर सोनहत की पवित्र धरती भक्ति, श्रद्धा और सामाजिक सौहार्द के अद्भुत संगम की साक्षी बनी,कई दिनों से चल रही शिवमहापुराण कथा का भव्य समापन ‘द्वादश ज्योतिर्लिंग’ के दिव्य वर्णन, पार्थिव शिवलिंग पूजन और देवी चरित्र के मार्मिक प्रसंगों के साथ हुआ, अंतिम दिवस पर श्रद्धालुओं का ऐसा जनसैलाब उमड़ा कि पूरा पंडाल हर-हर महादेव और बोल बम के जयघोष से गूंज उठा।
द्वादश ज्योतिर्लिंगों का दिव्य वर्णनःआस्था का विस्तार
कथा के अंतिम दिन कथावाचक ने भारत के बारह पवित्र ज्योतिर्लिंगों की उत्पत्ति, महत्व और आध्यात्मिक प्रभाव का विस्तृत वर्णन किया, सोमनाथ मंदिर से लेकर रामेश्वरम मंदिर तक स्थापित शिवधामों का स्मरण कराया गया, कथावाचक ने बताया कि द्वादश ज्योतिर्लिंग केवल तीर्थस्थल नहीं,बल्कि शिव के साक्षात प्रकाश स्वरूप हैं, इनके नामों का स्मरण और दर्शन मात्र से जन्म-जन्मांतर के पाप नष्ट होते हैं और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है, श्रद्धालु पूरे समय भक्ति में लीन होकर कथा श्रवण करते रहे,कई श्रद्धालुओं की आंखें भावविभोर होकर नम हो गईं।
पार्थिव शिवलिंग पूजनः कलयुग का सरलतम साधन
महाशिवरात्रि के दिन विशेष रूप से पार्थिव शिवलिंग पूजन का आयोजन किया गया। कथावाचक ने बताया कि कलयुग में मिट्टी से निर्मित शिवलिंग का पूजन अत्यंत फलदायी और सरल साधना है, सैकड़ों श्रद्धालुओं ने सामूहिक रूप से मिट्टी के शिवलिंगों का निर्माण कर विधि-विधान से अभिषेक किया। दूध, जल, बेलपत्र और धतूरा अर्पित कर महादेव का आह्वान किया गया, पूरे पंडाल में धूप, दीप और मंत्रोच्चार की पवित्र सुगंध और ध्वनि वातावरण को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर रही थी।
देवी चरित्रः शक्ति और शिव का अभिन्न स्वरूप
कथा के दौरान देवी सती और माता पार्वती के चरित्र का भावपूर्ण वर्णन किया गया। कथावाचक ने बताया कि शिव और शक्ति एक-दूसरे के पूरक हैं, माता सती के आत्मसम्मान और माता पार्वती की कठोर तपस्या के प्रसंगों ने श्रद्धालुओं को भावुक कर दिया, नारी शक्ति, त्याग और समर्पण की महिमा को रेखांकित करते हुए कहा गया कि जहां शिव हैं, वहां शक्ति का वास अनिवार्य है।
भक्ति के मंच पर सत्ता-विपक्ष का सौहार्द
आयोजन की भव्यता उस समय और बढ़ गई जब प्रदेश के कैबिनेट मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल कथा स्थल पहुंचे,उन्होंने आयोजन समिति की प्रशंसा करते हुए कहा कि ऐसे आध्यात्मिक आयोजन समाज में सकारात्मक ऊर्जा और एकता का संचार करते हैं, मंच पर एक सादगीपूर्ण दृश्य तब देखने को मिला जब मंत्री जायसवाल ने नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत के समीप पहुंचकर विनम्रतापूर्वक हाथ जोड़कर अभिवादन किया। इस दृश्य ने यह संदेश दिया कि वैचारिक मतभेद अपनी जगह हैं, लेकिन आस्था के मंच पर सभी केवल भक्त होते हैं, मंत्री ने अपने संबोधन में कहा—महादेव की कथा जहां होती है, वहां केवल श्रद्धा और समर्पण का भाव होता है। सोनहत की यह पावन धरा आज पूरे प्रदेश को एकता का संदेश दे रही है।
मैं यहाँ वक्ता नहीं, केवल श्रोता हूँ : डॉ. महंत
कथा के दौरान जब व्यासपीठ से डॉ. चरणदास महंत को उद्बोधन के लिए आमंत्रित किया गया, तो उन्होंने अत्यंत विनम्रता से कहा—मैं यहां भाषण देने नहीं, बल्कि महादेव की कथा सुनने आया हूं। आज मुझे केवल एक भक्त के रूप में शिव रस का आनंद लेने दें। उनकी इस सादगी और विनम्रता से उपस्थित श्रद्धालु भावविभोर हो उठे। कथा वाचक ने भी इसे उनके व्यक्तित्व की सरलता और आध्यात्मिकता का परिचायक बताया।
इनकी रही गरिमामयी उपस्थिति
समापन अवसर पर सांसद ज्योत्स्ना महंत, पूर्व विधायक गुलाब कमरो, विनय जायसवाल सहित अनेक जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे, प्रभा पटेल, राजकुमार केशरवानी, योगेश शुक्ला, अशोक जायसवाल, वेदांती तिवारी सहित कांग्रेस और भाजपा के कई दिग्गज नेता भी कथा श्रवण हेतु पहुंचे।
आस्था और सामाजिक समरसता का संदेश
महाशिवरात्रि के इस आयोजन ने यह संदेश दिया कि धर्म और संस्कृति समाज को जोड़ने की सबसे बड़ी शक्ति हैं,जब शिवमहापुराण की कथा गूंजती है, तो राजनीतिक सीमाएं धुंधली पड़ जाती हैं और शेष रह जाता है केवल भक्ति, श्रद्धा और समर्पण का भाव, सोनहत में आयोजित यह भव्य आयोजन न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण रहा, बल्कि सामाजिक समरसता और सौहार्द का भी प्रेरक उदाहरण बन गया।


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