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डीडवाना-कुचामन@हमारे पूर्वज धर्म का सत्य जानते थे…मर्यादा अनुशासन और संतुलन राष्ट्र प्रगति की नींव दुनिया के देश स्वार्थ के साथ चल रहे : भागवत

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डीडवाना-कुचामन,22 जनवरी 2026। दुनिया के देश आजकल अपने स्वार्थ के साथ चल रहे हैं। हर कोई चाहता है कि मेरा स्वार्थ सिद्ध होना चाहिए, मेरा हित होना चाहिए, मैं बढ़ता रहूं,बाकि लोगों का क्या होगा वो बाद का सवाल है। सभी इसी सोच के साथ चल रहे हैं। लेकिन भारत देश और भारत के लोग कभी भी इस सोच के साथ नहीं चले, न ही चल रहे हैं और न ही चलेंगे, क्योंकि वो धर्म जानते हैं। यह ये बातें राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने डीडवाना-कुचामन जिले के छोटी खाटू कस्बे में जैन श्वेतांबर तेरापंथ धर्मसंघ के 162वें मर्यादा महोत्सव में कहीं। इस दौरान भागवत ने कई मुद्दों पर अपनी बात रखी।
सब लोग दिखते अलग-अलग,लेकिन मूल में सब एक
मर्यादा महोत्सव में सरसंघचालक ने कहा कि एक महत्वपूर्ण बात हमारे पूर्वजों को पता चली, बाकि दुनिया को पता नहीं चली… वो बात यह है कि हम सब लोग दिखते अलग-अलग हैं,विश्व में सर्व बातें दिखती अलग-अलग हैं,लेकिन मूल में सब एक है।
धर्म के पीछे का सत्य हमारे पूर्वज जानते थे
भागवत ने कहा कि धर्म के पीछे जो सत्य है वो बाकि दुनिया नहीं जानती, हमारे पूर्वज जानते थे। इसलिए सत्य,अहिंसा,अपरिग्रह,ब्रह्मचर्य आदि कई बातें हमारे यहां हैं,बाहर नहीं है। पुस्तकें सबने पढ़ी है। हमारे संतों की पुस्तकें भी उन्होंने पढ़ी है, उनकी भी हम पढ़ते हैं। परंतु प्रत्यक्ष जानना, अनुभव…यह केवल हमारे यहां हुआ,वहां नहीं हुआ।
भागवत ने मर्यादा, अनुशासन और संतुलन को राष्ट्र प्रगति की मजबूत नींव बताया हैं।


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