Breaking News

नई दिल्ली@मोदी ने 28 वें कॉमनवेल्थ स्पीकर्स और प्रेसाइडिंग ऑफिसर्स कॉन्फें्रस का किया उद्घाटन

Share


25 करोड़ भारतीय गरीबी से बाहर निकले : पीएम मोदी
नई दिल्ली,15 जनवरी 2026। पीएम नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को संसद परिसर में 28वें कॉमनवेल्थ स्पीकर्स और प्रेसाइडिंग ऑफिसर्स कॉन्फ्रेंस का उद्घाटन किया। पीएम मोदी ने कहा कि आज भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था है। पिछले कुछ सालों में 25 करोड़ लोगों को गरीबी से बाहर निकले हैं। पीएम मोदी ने कॉन्फ्रेंस में कहा कि भारत में यूपीआई दुनिया का सबसे बड़ा डिजिटल पेमेंट सिस्टम है। भारत दुनिया का सबसे बड़ा वैक्सीन प्रोड्यूसर है। दुनिया का नंबर-2 स्टील प्रोड्यूसर है।
दुनिया का तीसरा बड़ा स्टार्टअप इकोसिस्टम है। दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा एविएशन मार्केट है। दुनिया का चौथा सबसे बड़ा रेल नेटवर्क है। दुनिया का तीसरा बड़ा मेट्रो रेल नेटवर्क है। सम्मेलन की अध्यक्षता लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला संभाल रहे हैं। इसमें कॉमनवेल्थ के 42 देशों से 61 स्पीकर्स और प्रेसाइडिंग ऑफिसर्स शामिल हो रहे हैं। सम्मेलन 14 से 16 जनवरी यानी तीन दिनों तक चलेगा। भारत में लोकतंत्र की पहचान है कि वह आखिरी व्यक्ति तक फायदे पहुंचे। हम लोक कल्याण की भावना से हर व्यक्ति के लिए बिना किसी भेदभाव से काम कर रहे हैं। इसी लोक कल्याण की भावना के कारण बीते कुछ सालों में भारत में 25 करोड़ लोग गरीबी से बाहर निकले हैं।
जब भारत आजाद हुआ तब उस दौर में आशंका व्यक्त की गई थी कि इतनी विविधता में भारत में लोकतंत्र टिक नहीं पाएगा लेकिन भारत ने विविधता को अपने लोकतंत्र की ताकत में बदल दिया है।
कोविड-19 महामारी के दौरान जब पूरी दुनिया संकट का सामना कर रही थी, भारत भी कई चुनौतियों का सामना कर रहा था। इसके बावजूद उन कठिन परिस्थितियों में भी भारत ने 150 से अधिक देशों को दवाइयां और वैक्सीन उपलब्ध कराई। यह हमारे सिद्धांत को दर्शाता है- ‘पहले लोग, पहले मानवता।’
आप जिस स्थान पर बैठे हैं, वह भारत के लोकतांत्रिक सफर का महत्वपूर्ण स्थल है। स्वतंत्रता के अंतिम सालों में इसी सेंट्रल हॉल में संविधान सभा की बैठकें हुई थीं। स्वतंत्रता के बाद 75 साल तक यह भारत की संसद रही। देश के भविष्य से जुड़े कई निर्णय इसी हॉल में लिए गए। लोकतंत्र को समर्पित इस स्थल का नाम ‘संविधान सदन’ रखा गया है।
भारतीय लोकतंत्र का एक और मजबूत स्तंभ महिलाओं का प्रतिनिधित्व है। हमारे देश की प्रथम नागरिक राष्ट्रपति महिला हैं। दिल्ली की मुख्यमंत्री भी महिला हैं। ग्रामीण और स्थानीय निकायों में भारत में लगभग 15 लाख महिला निर्वाचित प्रतिनिधि हैं। ये लगभग 50 प्रतिशत नेतृत्व का प्रतिनिधित्व करती हैं, जो वैश्विक स्तर पर अभूतपूर्व है।
एआई और सोशल मीडिया पर होगी चर्चा
सम्मेलन के दौरान आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के संसदीय कामकाज में उपयोग,सोशल मीडिया के प्रभाव,नागरिक सहभागिता बढ़ाने,सांसदों की सुरक्षा और कार्य परिस्थितियों जैसे विषयों पर सत्र आयोजित किए जाएंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि ये चर्चाएं भविष्य की संसदीय प्रक्रियाओं को नई दिशा दे सकती हैं। सम्मेलन के समापन पर साझा प्रस्ताव और सिफारिशें सामने आने की संभावना है,जिनका उद्देश्य लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं को अधिक पारदर्शी,तकनीक-सक्षम और जनोन्मुखी बनाना होगा। भारत की मेजबानी में हो रहा यह सम्मेलन अंतरराष्ट्रीय संसदीय सहयोग को नई मजबूती देने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।
लोकतंत्र और समावेशिता पर जोर
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि भारतीय लोकतंत्र की बुनियाद समावेशिता पर टिकी है। उन्होंने कहा कि सरकार की नीतियों का केंद्र अंतिम पंक्ति में खड़ा नागरिक है। विविधताओं से भरे समाज में लोकतंत्र को लेकर पहले आशंकाएं जताई जाती थीं, लेकिन भारत ने यह साबित किया कि विविधता लोकतंत्र की कमजोरी नहीं, बल्कि उसकी ताकत है।

वैश्विक संकट में भारत की भूमिका
कोविड-19 महामारी का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि संकट के समय भारत ने न केवल अपने नागरिकों की जरूरतों को प्राथमिकता दी, बल्कि 150 से अधिक देशों को दवाइयां और टीके उपलब्ध कराए। उन्होंने इसे भारत की ‘मानवता पहले’ की सोच का उदाहरण बताया।
महिलाओं की भागीदारी को बताया मजबूत स्तंभ
प्रधानमंत्री ने लोकतंत्र में महिलाओं की भूमिका पर भी विशेष प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि भारत में सर्वोच्च संवैधानिक पदों से लेकर स्थानीय निकायों तक महिलाओं की सक्रिय भागीदारी दिखाई देती है। देशभर में लगभग 15 लाख महिला निर्वाचित प्रतिनिधि कार्यरत हैं, जो वैश्विक स्तर पर एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जाती है।
वैश्विक संकट में भारत की भूमिका
कोविड-19 महामारी का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि संकट के समय भारत ने न केवल अपने नागरिकों की जरूरतों को प्राथमिकता दी,बल्कि 150 से अधिक देशों को दवाइयां और टीके उपलब्ध कराए। उन्होंने इसे भारत की ‘मानवता पहले’ की सोच का उदाहरण बताया।
महिलाओं की भागीदारी
को बताया मजबूत स्तंभ

प्रधानमंत्री ने लोकतंत्र में महिलाओं की भूमिका पर भी विशेष प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि भारत में सर्वोच्च संवैधानिक पदों से लेकर स्थानीय निकायों तक महिलाओं की सक्रिय भागीदारी दिखाई देती है।
लोकसभा अध्यक्ष बोले…आज हम दुनिया की सबसे बड़े लोकतंत्र में जुटे हैं…
कॉमनवेल्थ स्पीकर्स और प्रेसाइडिंग ऑफिसर्स कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा कि हम आज दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र भारत में लोकतांत्रिक संवाद, सहयोग और साझा मूल्यों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से जुटे हैं। यहां संसदीय लोकतंत्र से जुड़ी प्रक्रियाओं, पहलों और अनुभवों को साझा किया जाएगा। उन्होंने कहा कि सात दशकों से अधिक की संसदीय यात्रा में जनकल्याण से जुड़ी नीतियां बनाकर लोकतंत्र को मजबूत किया गया है। कॉमनवेल्थ स्पीकर्स और प्रेसाइडिंग ऑफिसर्स कॉन्फ्रेंस में कॉमनवेल्थ देशों के स्पीकर्स और प्रेसाइडिंग ऑफिसर्स के बीच अनुभव और ज्ञान शेयर करने का मंच है। उद्देश्य लोकतंत्र को मजबूत करना और संसद के कामकाज को बेहतर बनाना है। इसमें नवीन तकनीक,एआई और सोशल मीडिया जैसे समकालीन मुद्दों पर चर्चा होगी।


Share

Check Also

उज्जैन@ उज्जैन में मॉडल हर्षा रिछारिया ने लिया संन्यास

Share अब स्वामी हर्षानंद गिरि के नाम से जानी जाएंगी,पिंडदान के साथ त्यागा पिछला जीवनउज्जैन,19 …

Leave a Reply