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सोमनाथ@सोमनाथ तोड़ने वाले इतिहास के पन्नों में सिमटेः पीएम मोदी

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1000 साल पहले का संघर्ष, आज का गौरव…
सोमनाथ,11 जनवरी 2026। गुजरात के सोमनाथ मंदिर पर 1000 साल पहले हुए हमले को लेकर पीएम ने कहा कि,उस वक्त आतताई सोच रहे थे कि वे जीत गए हैं, लेकिन आज भी सोमनाथ मंदिर में फहरा रही ध्वजा बता रही है कि हिंदुस्तान की शक्ति क्या है। दुर्भाग्य से आज भी हमारे देश में वे ताकतें मौजूद हैं,जिन्होंने सोमनाथ के पुनर्निर्माण का विरोध किया था। पीएम ने नेहरू का नाम लिए बिना कहा कि जब सरदार पटेल ने सोमनाथ के पुनर्निर्माण की शपथ ली तो उन्हें भी रोकने की कोशिश की गई। दरअसल 1951 में मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा में राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद के शामिल होने को लेकर जवाहरलाल नेहरू ने आपत्ति जताई थी। पीएम ने मंदिर से करीब 3 किमी दूर सद्भावना ग्राउंड में रैली को संबोधित करते हुए कहा कि हमें आज भी ऐसी ताकतों से सावधान रहना है, जो हमें बांटनें की कोशिश में लगी हुई हैं। पीएम ने सुबह मंदिर में करीब 30 मिनट तक पूजा-अर्चना की। शिवलिंग पर जल चढ़ाया, फूल अर्पित किए और पंचामृत से अभिषेक किया। हमें आज भी सावधान रहना है, एकजुट रहना है। ऐसी ताकतों से सावधान रहना है, जो हमें बांटनें की कोशिशों में लगी हुई हैं। आज हर देशवासी के मन में विकसित भारत को लेकर भरोसा है। भारत अपने गौरव को नई बुलंदी देगा। हम गरीबी के खिलाफ अपनी लड़ाई को जीतेंगें। जिस देश के पास विरासत होती है तो वह देश उस पर गर्व करता है। लेकिन हमारे देश की आजादी के बाद गुलामी की मानसिकता वाले लोगों ने उसी विरासत को भुला दिया। जब सरदार पटेल ने सोमनाथ के पुनर्निर्माण की शपथ ली तो उन्हें भी रोकने की कोशिश की गई।
पीएम ने कहा- ये वातावरण और उत्सव अद्भुत है…
रैली को संबोधित करते हएु पीएम ने कहा- ये समय अदभुत है। ये वातावरण अद्भुत है। यह उत्सव अद्भुत है। एक और स्वयं देवादिदेव महादेव, दूसरी और समुद्र की लहरें, सूर्य की किरणें, मंत्रों की गूंज , आस्था का ऊफान, इस दिव्य वातावरण में आप सब भक्तों की उपस्थिति इस अवसर को दिव्य बना रही है। भव्य बना रही है और मैं इसे अपना बहुत बड़ा सौभाग्य मानता हूं कि सोमनाथ मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष के रूप में मुझे सोमनाथ स्वाभिमान पर्व में सेवा का अवसर मिला।
1000 साल पहले का संघर्ष,आज का गौरव
पीएम मोदी ने कहा कि जब वे आज यहां खड़े होकर बोल रहे हैं,तो उनके मन में यह सवाल बार-बार आता है कि 1000 साल पहले इसी स्थान पर कैसा माहौल रहा होगा। उन्होंने कहा हमारे पुरखों ने अपनी आस्था और महादेव के लिए सब कुछ न्योछावर कर दिया। आक्रांताओं को लगा कि वे जीत गए, लेकिन 1000 साल बाद भी सोमनाथ की ध्वजा पूरी दुनिया को भारत की शक्ति का संदेश दे रही है। प्रधानमंत्री ने साफ कहा कि सोमनाथ का इतिहास विनाश का नहीं,बल्कि विजय और पुनर्निर्माण का इतिहास है। उन्होंने कहा कि आक्रांता आते रहे, लेकिन हर युग में सोमनाथ फिर से खड़ा हुआ इतना धैर्य,संघर्ष और पुनर्निर्माण का उदाहरण दुनिया के इतिहास में दुर्लभ है।
मोदी बोले- सोमनाथ की गाथा को शब्दों में बयां नहीं कर सकते
यहां 72 घंटों तक अनवरत ओमकार का नाद और मंत्रोच्चार किया गया। सोमनाथ की 1 हजार साल की गाथा का वर्णन और शौर्य यात्रा,सबकुछ मंत्रमुग्ध कर देने वाला है। इस अनुभुति को शब्द अभिव्यक्त नहीं कर सकते हैं। इसे केवल समय ही संकलित कर सकता है।
पीएम ने कहा- न तो सोमनाथ नष्ट हुआ, न ही भारत
ये भी संयोग है कि आज सोमनाथ आक्रमण के 1 हजार साल पूरे हो रहे हैं। और अब इसके पुनर्निमाण के 75 साल भी पूरे हो रहे हैं। सोमनाथ को नष्ट करने के एक नहीं,अनेकों प्रयास हुए। विदेशी आंक्राताओं द्वारा कई सदियों तक भारत को खत्म करने की कोशिशें होती रहीं।
गजनवी को लगा सोमनाथ का वजूद मिटाया,मंदिर फिर खड़ा हुआ
पीएम ने कहा- आज उस इतिहास के बारें में कल्पना कीजिए,1 हजार साल पहले 1026 में गजनवी ने मंदिर को तोड़ा था। उसे लगा उसने सोमनाथ का वजूद मिटा दिया। लेकिन इसके बाद ही मंदिर का पुननिर्माण शुरू हो गया। इसके बाद खिलजी ने मंदिर तोड़ा। लेकिन जूनागढ़ के राजाओं ने फिर से मंदिर का पुननिर्माण करा दिया।


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