- 15 लाख का रपटा भी मंजूर नहीं, स्थायी पुल कितने साल में बनेगा?
- विकास के दावों के बीच गोबरी नदी बना अभिशाप, जनता परेशान
- निरीक्षण पर निरीक्षण, लेकिन पुल नहीं—मंत्री जी जवाब देंगे?
- 150 करोड़ की घोषणाएं, गोबरी नदी के लिए बजट शून्य?
- मंत्री के गृह क्षेत्र में टूटा पुल, टूटा भरोसा,बरसात फिर न डुबो दे रास्ता—गोबरी नदी पुल पर सन्नाटा
- फोटो खिंचवाने तक सीमित रहे निरीक्षण? पुल कब बनेगा
- सरकार की प्राथमिकता सूची से गायब गोबरी नदी का पुल?
- गोबरी नदी पुल मामला: समाधान की प्रतीक्षा में ग्रामीण

-ओंकार पाण्डेय-
सूरजपुर,08 जनवरी 2026 (घटती-घटना)। विकास के बड़े-बड़े दावों और करोड़ों की स्वीकृतियों के बीच मंत्री जी के अपने ही विधानसभा क्षेत्र में एक पुल जनता के लिए अभिशाप बन गया है,30 जून 2025 को गोबरी नदी पर बना पुल धराशायी हो गया था, आज छह महीने से अधिक का समय बीत चुका है, लेकिन न तो स्थायी पुल की दिशा साफ है और न ही वैकल्पिक रपटा पुल की स्वीकृति पूरी हो पाई है, यह मामला केवल एक पुल का नहीं, बल्कि प्राथमिकता, संवेदनशीलता और जवाबदेही का है, अगर मंत्री के विधानसभा क्षेत्र में ही जनता को इस तरह इंतजार करना पड़ रहा है, तो बाकी क्षेत्रों की स्थिति का अंदाजा लगाना मुश्किल नहीं, अब जनता सवाल पूछ रही है, क्या गोबरी नदी का पुल सिर्फ निरीक्षण और भाषणों तक ही सीमित रहेगा, या सच में बनेगा भी?
वैकल्पिक रपटा पुल भी अधर में- पुल टूटने के बाद प्रशासन ने तात्कालिक समाधान के तौर पर 15 लाख रुपये के वैकल्पिक रपटा पुल का प्रस्ताव तैयार किया, लेकिन हैरानी की बात यह है कि इतनी छोटी राशि की स्वीकृति भी अब तक नहीं हो सकी, सवाल सीधा है, जब 15 लाख का रपटा पुल मंजूर नहीं हो पा रहा, तो स्थायी पुल की स्वीकृति कितने साल में मिलेगी?
मंत्री, निरीक्षण और सिर्फ आश्वासन- पुल टूटने के बाद कलेक्टर और संबंधित विभाग ने मौके का निरीक्षण किया, क्षेत्र की विधायक एवं महिला एवं बाल विकास विभाग मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े और उनके पति ठाकुर राजवाड़े ने भी कई बार स्थल निरीक्षण किया, लेकिन सवाल यह है कि निरीक्षण के बाद परिणाम क्या निकला? स्वीकृति कहां अटकी है? जनता पूछ रही है कि क्या निरीक्षण सिर्फ फोटो खिंचवाने तक सीमित रह गए?
विकास की गाथा, लेकिन गृह क्षेत्र में बदहाली- जहां एक ओर क्षेत्र में विकास की कहानियां सुनाई जा रही हैं, वहीं मंत्री के गृह क्षेत्र में लोग रोजमर्रा की जरूरतों के लिए लंबा चक्कर काटने को मजबूर हैं, स्कूल, अस्पताल, बाजार—सब कुछ दूर हो गया है, आने वाली बरसात को लेकर ग्रामीणों में डर है कि क्या फिर से नदी पार करने के लिए जान जोखिम में डालनी पड़ेगी?
150 करोड़ की स्वीकृतियां, लेकिन गोबरी नदी के लिए पैसा नहीं?- विगत दिनों क्षेत्र को 150 करोड़ रुपये से अधिक की स्वीकृतियां मिलने की खबरें आईं, तो फिर सवाल यह भी उठता है, क्या सरकार के पास गोबरी नदी पर पुल बनाने के लिए पैसा नहीं है? या फिर यह पुल प्राथमिकता सूची में ही नहीं है?
जनता ने खुद संभाला मोर्चा- सरकारी देरी से परेशान होकर ग्रामीणों ने जनसहयोग से रपटा पुल बनाने की कोशिश शुरू की, लेकिन बिना तकनीकी सहयोग और स्थायी समाधान के यह व्यवस्था भी जर्जर हालत में पहुंच चुकी है, न इसकी मरम्मत हो रही है, न ही कोई सुध लेने वाला नजर आ रहा है।
सवाल जो मंत्री जी को जवाब देने होंगे
पुल टूटे 6 महीने बीत गए—अब तक क्या प्रगति हुई?
वैकल्पिक रपटा पुल की स्वीकृति किस फाइल में अटकी है?
स्थायी पुल का टाइमलाइन क्या है?
क्या मंत्री जी खुद बता पाएंगी कि यह पुल कब बनेगा?
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