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नई दिल्ली@कुत्तों के चलते लोग कब तक परेशानी झेलेंगे : सुप्रीम कोर्ट

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स्कूल और कोर्ट कैंपस में कुत्तों की क्या जरूरत,वे बच्चों-बड़ों को काट रहे,लोग मर रहे


नई दिल्ली,07 जनवरी 2026। सुप्रीम कोर्ट में बुधवार को आवारा कुत्तों से जुड़े मामले पर सुनवाई हुई। बहस में कुत्तों के मूड, कुत्तों की काउंसलिंग,कम्युनिटी डॉग्स और इंस्टीट्यूशनलाइज्ड डॉग्स जैसे शब्द सामने आए। कोर्ट ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि कुत्तों के कारण आम लोगों को आखिर कब तक परेशानी झेलनी पड़ेगी।
अदालत ने स्पष्ट किया कि उसका आदेश सड़कों के लिए नहीं,बल्कि केवल संस्थागत क्षेत्रों के लिए है। पीठ ने सवाल उठाया कि स्कूलों,अस्पतालों और अदालत परिसरों के भीतर आवारा कुत्तों की क्या आवश्यकता है और उन्हें वहां से हटाने पर क्या आपत्ति हो सकती है। बुधवार को मामले की सुनवाई ढाई घंटे तक चली। अगली सुनवाई 8 जनवरी को सुबह 10.30 बजे से फिर शुरू होगी। बहस में आवारा कुत्तों के फेवर में पैरवी कर रहे कपिल सिब्बल ने कहा कि जो कुत्ता काटे उसकी नसबंदी की जा सकती है। इस पर कोर्ट ने कहा, अब तो बस एक ही चीज बाकी है,कुत्तों को भी काउंसलिंग देना। ताकि वापस छोड़े जाने पर वह काटे नहीं। इस बीच सिब्बल ने कहा, जब भी मैं मंदिरों वगैरह में गया हूं, मुझे कभी किसी ने नहीं काटा। सुप्रीम कोर्ट ने जवाब दिया- ‘आप खुशकिस्मत हैं। लोगों को काटा जा रहा है, बच्चों को काटा जा रहा है। लोग मर रहे हैं।’ कोर्ट ने सरकार से पूछा कि 2018 में एनिमल बर्थ कंट्रोल को लेकर सख्त निर्देश दिए गए थे। ये ठीक से लागू क्यों नहीं हुए। कोर्ट ने साफ कहा कि नियमों के कमजोर अमल से जनता को नुकसान नहीं होना चाहिए।
कल सोसाइटी में कोई भैंस ले आएगा
तो क्या करेंगे : सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा…‘यही बात गेटेड कम्युनिटी पर भी लागू होती है। गेटेड कम्युनिटी में कुत्ते को घूमने देना चाहिए या नहीं, यह समुदाय को तय करना होगा। मान लीजिए,90 प्रतिशत निवासियों को लगता है कि यह बच्चों के लिए खतरनाक होगा, लेकिन 10 फीसदी कुत्ते रखने पर जोर देते हैं। कोई कल भैंस ला सकता है। वे कह सकते हैं कि मुझे भैंस का दूध चाहिए।’
कुत्तों को लेकर गेटेड कम्युनिटी कर
सकें फैसला, होना चाहिए प्रावधान : सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि ऐसा कोई प्रावधान होना चाहिए जिसके तहत गेटेड कम्युनिटी मतदान के जरिए फैसला ले सके। वकील वंदना जैन ने कहा…‘हम कुत्तों के खिलाफ नहीं हैं। हमें कुत्तों के खतरे और सार्वजनिक सुरक्षा को देखना होगा। 6.2 करोड़ कुत्तों की आबादी है और स्थिति नियंत्रण से बाहर होती जा रही है।’ मामले की सुनवाई कल भी जारी रहेगी। सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं की दलीलों पर सवाल करते हुए कहा…‘क्या कुत्तों को यह सिखाया जा सकता है कि वे किसी को न काटें? किसी को कैसे पता चलेगा कि कौन सा कुत्ता काटने के मूड में है या नहीं?’ सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि पशुप्रेमियों को शेल्टर में मौजूद कुत्तों को खाना खिलाना चाहिए।


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