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नई दिल्ली@अरावली केस…सुप्रीम कोर्ट का अपने ऑर्डर पर स्टे

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पहले 100 मीटर से छोटी पहाडि़यों पर खनन को मंजूरी दी थी,अब रोक लगाई
21 जनवरी तक खनन भी नहीं होगा,राजस्थान सहित 4 राज्यों से जवाब मांगा…


नई दिल्ली,29 दिसम्बर 2025। अरावली पर्वतमाला को लेकर उठे विवाद के बीच सुप्रीम कोर्ट ने अपने ही आदेश पर सोमवार को रोक लगा दी है। 20 नवंबर को जारी आदेश में 100 मीटर से छोटी पहाडि़यों पर खनन के आदेश दिए थे, अब 21 जनवरी 2026 तक खनन पर रोक लगा दी है। कोर्ट ने कहा है कि इस मामले की जांच के लिए एक्सपर्ट कमेटी गठित की जाए। यह कमेटी मौजूदा विशेषज्ञ समिति की रिपोर्ट का विश्लेषण करेगी। इसके बाद संबंधित मुद्दों पर कोर्ट को सुझाव देगी। कोर्ट ने केंद्र और अरावली के चार राज्यों (राजस्थान, गुजरात, दिल्ली और हरियाणा) को भी नोटिस जारी कर इस मुद्दे पर जवाब मांगा है। सोमवार को मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत,न्यायमूर्ति जेके माहेश्वरी और एजी मसीह की वैकेशन बेंच ने अरावली केस की सुनवाई की। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने निर्देश दिया है कि विशेषज्ञ समिति की सिफारिशें और उन पर सुप्रीम कोर्ट की ओर से की गई आगे की टिप्पणियां फिलहाल स्थगित रहेंगी। अदालत ने साफ किया कि अगली सुनवाई तक इन सिफारिशों को लागू नहीं किया जाएगा। इन सिफारिशों में से एक में कहा गया है कि 100 मीटर से ऊंची पहाडि़यों को ही अरावली पर्वतमाला माना जाए।
कोर्ट ने कहा…अदालत की टिप्पणियों का गलत अर्थ निकाला जा रहा…
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि अदालत की भी यही भावना है कि विशेषज्ञ समिति की रिपोर्ट और उसके आधार पर अदालत द्वारा की गई कुछ टिप्पणियों को लेकर गलत अर्थ निकाले जा रहे हैं। मुख्य न्यायाधीश ने संकेत दिया कि इन गलत धारणाओं को दूर करने के लिए स्पष्टीकरण की जरूरत पड़ सकती है, ताकि अदालत की मंशा और निष्कर्षों को लेकर कोई भ्रम न रहे। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि विशेषज्ञ समिति की रिपोर्ट या अदालत के फैसले को लागू करने से पहले एक निष्पक्ष और स्वतंत्र मूल्यांकन जरूरी है, ताकि कई अहम सवालों पर स्पष्ट दिशा मिल सके।मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि अदालत पहले ही यह संकेत दे चुकी है कि इन सवालों पर गहराई से विचार आवश्यक है। इसी को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने प्रस्ताव रखा है कि एक्सपर्ट्स की एक हाई पावर्ड कमेटी गठित की जाए। यह कमेटी मौजूदा विशेषज्ञ समिति की रिपोर्ट का विश्लेषण करे और इन मुद्दों पर स्पष्ट सुझाव दे। चीफ जस्टिस सूर्यकांत की वैकेशन बेंच में मामले की सुनवाई चल रही है। जमीन से 100 मीटर या उससे अधिक ऊंचाई वाली पहाडि़यों को ही अरावली मानने की नई परिभाषा का विरोध हो रहा है। इस मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लिया है। सीजेआई के वैकेशन कोर्ट में यह मामला पांचवें नंबर पर लिस्टेड था।
सॉलिसिटर जनरल ने कहा…गलतफहमियां फैलाई जा रहीं…
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत से कहा कि इस मामले में अदालत के आदेशों, सरकार की भूमिका और पूरी प्रक्रिया को लेकर कई तरह की गलतफहमियां फैलाई जा रही हैं। इन्हीं भ्रमों को दूर करने के लिए एक विशेषज्ञ समिति गठित की गई थी। समिति ने अपनी रिपोर्ट सौंपी थी, जिसे अदालत ने स्वीकार भी किया था।
अशोक गहलोत बोले…मंत्री जनता
की इच्छा क्यों नहीं समझ पा रहे…

कांग्रेस नेता अशोक गहलोत ने कहा…हमें बहुत खुशी है कि सर्वोच्च न्यायालय ने आज स्थगन आदेश जारी किया है। हम इसका स्वागत करते हैं और आशा करते हैं कि सरकार भी जनता की इच्छा को समझेगी। चारों राज्यों की जनता,और वास्तव में पूरे देश की जनता,इस आंदोलन में शामिल हुई है। सड़कों पर उतरी है। विभिन्न रूपों में विरोध प्रदर्शन किया है। यह समझ से परे है कि मंत्री (पर्यावरण मंत्री) इसे क्यों नहीं समझ पा रहे हैं।
कांग्रेस ने वन-पर्यावरण
मंत्री से इस्तीफा मांगा…

कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने कहा…इस मामले का और अधिक विस्तार से अध्ययन करने की आवश्यकता है। और याद दिलाया कि प्रस्तावित पुनर्परिभाषा का भारतीय वन सर्वेक्षण,सर्वोच्च न्यायालय की केंद्रीय अधिकार प्राप्त समिति और स्वयं एमिकस क्यूरी ने विरोध किया था। रमेश ने पर्यावरण,वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री के तत्काल इस्तीफे की मांग की। साथ ही कहा- यह फैसला पुनर्परिभाषा के पक्ष में उनके द्वारा दिए गए सभी तर्कों को खारिज करता है।
आरपी बलवान की याचिका पर केंद्र,राज्यों को नोटिस
हरियाणा के वन विभाग के रिटायर अधिकारी आरपी बलवान ने भी पिछले सप्ताह केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय की समिति की सिफारिशों को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में पहले से चल रहे गोदावर्मन मामले में याचिका दाखिल की, जिस पर कोर्ट ने केंद्र,राजस्थान, हरियाणा सरकार और पर्यावरण मंत्रालय को नोटिस जारी किया था। सुप्रीम कोर्ट शीतकालीन अवकाश के बाद इस मामले में सुनवाई करेगा।


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