अम्बिकापुर,30 नवम्बर 2025 (घटती-घटना)। छत्तीसगढ़ के मैनपाट में कंडराजा और उरगा क्षेत्र में प्रस्तावित बाक्साइट खदान विस्तार को लेकर स्थानीय ग्रामीणों का विरोध तेज हो गया है। रविवार को नर्मदापुर मिनी स्टेडियम में आयोजित प्रशासनिक जनसुनवाई के दौरान विरोध कर रहे ग्रामीणों ने विरोध प्रदर्शन किया और यहां लगाए गए पंडाल को उखाड़ दिया। इस दौरान पुलिस बल और प्रशासनिक अधिकारी भी मौके पर मौजूद थे,लेकिन ग्रामीणों के गुस्से के सामने उनकी कोई नहीं चली। मैनपाट,जिसे छत्तीसगढ़ का ‘शिमला’ भी कहा जाता है, में प्रस्तावित बाक्साइट खदान के विस्तार को लेकर जनसुनवाई का आयोजन किया गया था। प्रशासन ने इस कार्यक्रम के लिए नर्मदापुर में पंडाल लगाया था,लेकिन क्षेत्रीय ग्रामीणों ने इसका विरोध करना शुरू कर दिया। उनका कहना था कि पहले से चल रहे बाक्साइट खदानों ने पर्यावरण पर भारी असर डाला है, और खदान के विस्तार से यह स्थिति और भी बिगड़ेगी। इस विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व जिला पंचायत सदस्य रतनी नाग ने किया, जो क्षेत्र के अन्य ग्रामीणों के साथ खदान विस्तार के खिलाफ खड़े हुए थे। ग्रामीणों का आरोप है कि खदान के विस्तार से न केवल स्थानीय पर्यावरण को नुकसान होगा, बल्कि उनके जल, जंगल और जमीन पर भी खतरा मंडराएगा। मैनपाट में खेती-किसानी ही मुख्य आजीविका का स्रोत है और खदान की वजह से जमीन का उपजाऊपन समाप्त हो सकता है। इसके साथ ही, भूजल स्तर में गिरावट और जलस्रोतों की कमी की संभावना भी जताई जा रही है।
मैनपाट की पहचान उसकी हरी-भरी वादियों और शांतिपूर्ण पर्यावरण से है, और स्थानीय लोग इसे एक प्रमुख पर्यटन स्थल मानते हैं। खदान विस्तार से इस क्षेत्र की प्राकृतिक सुंदरता और हरियाली को भारी नुकसान हो सकता है,जिससे यहां के पारंपरिक जीवन में भी बदलाव आ सकता है। इसके अलावा, क्षेत्र में हाथियों का भी बसेरा है, और खदान के विस्तार से इन जंगली जानवरों के आक्रामक होने की संभावना जताई जा रही है, जो स्थानीय समुदाय के लिए एक गंभीर समस्या बन सकती है। ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि जनसुनवाई से पहले,प्रभावित क्षेत्र के कुछ ग्रामीणों को शराब पिलाकर उनकी राय बदलने की कोशिश की गई,ताकि वे खदान के विस्तार के पक्ष में वोट दें। इस मामले को लेकर जिला पंचायत सदस्य रतनी नाग ने प्रशासन और खदान कंपनी पर गंभीर आरोप लगाए। जनसुनवाई के दौरान हुई गहमागहमी को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए थे। पुलिस बल मौके पर तैनात था और प्रशासनिक अधिकारी भी स्थिति पर नजर बनाए हुए थे। हालांकि, विरोधी ग्रामीणों के गुस्से को देखते हुए जनसुनवाई का माहौल तनावपूर्ण हो गया था।
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