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कुरुक्षेत्र@भारत औपनिवेशिक ‘मैकॉले मानसिकता’ से मुक्त होकर वैश्विक नेतृत्व की ओर बढ़ रहा है : उपराष्ट्रपति

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कुरुक्षेत्र,30 नवम्बर 2025। उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने कहा कि भारत अब औपनिवेशिक ‘मैकॉले मानसिकता’ को त्यागकर अपनी संस्कृति,परंपरा और मूल्यों पर आधारित शिक्षा व्यवस्था के साथ वैश्विक नेतृत्व की ओर तेजी से बढ़ रहा है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 ने देश को इस परिवर्तनशील यात्रा पर नई दिशा दी है। उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन ने राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईटी) कुरुक्षेत्र के 20 वें दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि कुरुक्षेत्र की पवित्र भूमि यह संदेश देती है कि धर्म सदैव अधर्म पर विजय प्राप्त करता है। उन्होंने कहा कि दीक्षांत केवल एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि वर्षों की साधना का परिणाम और नये दायित्वों की शुरुआत है। उन्होंने कृत्रिम बुद्धिमत्ता, नवीकरणीय ऊर्जा, अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी, जैव-प्रौद्योगिकी, साइबर सुरक्षा और सेमीकंडक्टर जैसे क्षेत्रों में हो रहे वैश्विक परिवर्तन का उल्लेख करते हुए कहा कि तकनीक का वास्तविक उद्देश्य ‘उद्देश्यपूर्णप्रगति’ होना चाहिए। उन्होंने डिजिटल इंडिया, स्टार्टअप इंडिया और मेक इन इंडिया जैसी पहलों को भारत की मजबूत उद्यमिता संस्कृति का आधार बताते हुए कहा कि अगला गूगल,अगला टेस्ला और अगला स्पेस एक्स भारत से ही निकलना चाहिए। ऐसे संस्थान एनआईटी कुरुक्षेत्र से यह सम्भव है।
उन्होंने कहा कि शिक्षा नीति मैकॉले द्वारा थोपी गई औपनिवेशिक शिक्षा व्यवस्था से देश को मुक्त करती है, जिसका उद्देश्य केवल क्लर्क तैयार करना था। उपराष्ट्रपति ने संस्थान में स्थापित ‘समग्र व्यक्तित्व विकास केंद्र’ की सराहना की,जो भगवद्गीता, सार्वभौमिक मानव मूल्य, संज्ञान विज्ञान और मानसिक स्वास्थ्य पर आधारित समग्र विकास को प्रोत्साहित करता है।


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