मासनून के लिए और करना पड़ेगा इंतेजार
अंबिकापुर,08 जून 2025 (घटती-घटना)। मई महीने के आखिरी सप्ताह में सरगुजा संभाग सहित अंबिकापुर में रूक-रूक कर झमाझम बारिश हो रही थी। इससे मौसम विभाग ने अनुमान लगाया था कि इस वर्ष मानसून अपने समय से लगभग 8 से 10 दिन पूर्व ही दस्तक दे देगी। जो मौसम विभाग का अनुमान फेल होता दिखाई दे रहा है। 7 जून बीतने के बाद भी मानसून का अब तक कोई पता नहीं है। हालांकि अब मौसम विभाग का मनना है मानूसन के आने में अब 7 से 8 दिनों का और समय लग सकता है। यानी अपने समय पर ही मानसून पहुंचने की उम्मीद है। मौसम विभाग के अनुसार जगदलपुर व बस्तर में मानूसन ब्रेक ले लिया है।
उत्तरी भारत सहित सरगुजा संभाग में मानसून की बारिश के लिए अभी और इंतेजार करना पड़ेगा। मानसून जगदलपुर व बस्तर में ब्रेक ले लिया है। जगदलपुर व बस्तर में मानसून 7 से 8 दिन पूर्व जरूर पहुंच चुकी है पर वहां के आस पास के मैदानी इलाकों में भी अभी मानसून का इंतेजार है। मौसम वैज्ञानिक एसके मंडल ने बताया कि राजस्तान में अभी लू जैसी स्थिति निर्मित है। गर्म हवाओं का प्रवेश के कारण उत्तरी भारत सहित सरगुजा संभाग में अभी भी पूर्व मानसून एक्टिविटी की स्थिति निर्मित है। इस लिए अभी भी दोपहर के बाद तेज गरत व चमक के साथ बूंदाबांदी की स्थिति निर्मित हो रही है। वहीं मासनूस के बारे में बताया कि अभी सरगुजा संभाग के लोगों को मानसून के लिए 8 से 10 दिनों तक का और इंतेजार करना पड़ेगा। लोगों का मनना है कि वर्षों बाद इस वर्ष नौतापा पूरे नौ दिनों तक ठंड रहा। इस वर्ष नौतपा में बारिश होती रही। जबकि मानना है कि नौतपा में भीषण गर्मी व लू की संभावना बनी रहती है। नौतापा खत्म होने के बाद पुनः तेज धूप व उमस बनी हुई है। मौसम विभाग ने इस वर्ष समय से पूर्व मानसून के आने का अनुमान लगाया था। वहीं मई महीने के अंतिम सप्ताह में पूर्व मानसून एक्टिविटी के कारण लगातार हो रही बारिश से उम्मीद थी की इस वर्ष मासून समय से पूर्व दस्तक देगा। इस लिए किसानों ने खेती बाड़ी की भी तैयारी कर रखी थी। अब किसान को खेती के लिए मानसून का इंतेजार करना पड़ेगा।
पिछले सप्ताह कई दिनों तक रूक-रूक कर हुई बारिश के बाद तेज धूप लिकल रहे है। वहीं राजस्थान की ओर से आ रही गर्म हवाओं के कारण अंबिकापुर सहित आस पास के क्षेत्रों में उमस जैसी स्थिति निर्मित है। इसका असर लोगों के स्वास्थ्य पर भी पडऩी शुरू हो गई है। लोग उल्टी-दस्त व मौसमी बीमारी से पीडि़त हो रहे हैं।
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