अंबिकापुर,21 मार्च 2025 (घटती-घटना)। जिले में फर्जी तरीके से जन्म प्रमाण पत्र बनाए जाने का मामला सामने आया था। उक्त जन्म प्रमाण पत्र में सविलसर्जन का फर्जी डिजिटल साइन का भी उपयोग किया गया है। मेडिकल कॉलेज अस्पताल प्रबंधन ने मामले को गंभीरताा से देखते हुए मणिपुर थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई है। पुलिस मामले की जांच कर रही है।
हाल के कुछ दिनों के अंदर फर्जी जन्म प्रमाण पत्र के कुल 7 मामले सामने आ चुके हैं। इन सभी जन्म प्रमाण पत्रों में सिविल सर्जन डॉ. जेके रेलवानी का फर्जी डिजिटल साइन का भी उपयोग किया गया है। आश्चर्य की बात यह है कि 1962 में जन्म लिए व्यक्ति का भी ऑनलाइन जन्म प्रमामण पत्र जारी कर दिया गया है। इसमें भी सिलिव सर्जन का फर्जी डिजिटल साइन का उपयोग किया गया है। लखनपुर थाना क्षेत्र के ग्राम चुकनडांड निवासी कामेश्वर राजवाड़े जो की पीएचई विभाग में चौकीदार के पद पर कार्यरत है। वह 27 फरवरी को अपना आधार कार्ड में जन्म तिथि सुधरवाने लोकसेवा केन्द्र अंबिकापुर पहुंचा। आधार कार्ड सुधरवाने के लिए वह अपने साथ जन्म प्रमाण पत्र भी लाया था। जो ऑनलाइन जारी किया गया था। आधार कार्ड सुधारने के लिए जब उसका जन्म प्रमाण पत्र लिंक किया गया तो फर्जी पाया गया। ई-जिला प्रबंधक ने कामेश्वर राजवाड़े से जन्मप्रमाण पत्र के बारे में पूछताछ की तो वह बताया कि लखनपुर में एक व्यक्ति के माध्यम से बनवाया है। उक्त फर्जी जन्म प्रमाण पत्र 1962 के तिथि में जारी किया गया था। मामले में कलेक्टर ने जांच के निर्देश सीएमएचओ को दिए थे और मामले की एफआईआर दर्ज कराने के निर्देश दिए थे। सीएमएचओ के निर्देश पर मेडिकल कॉलेज अस्पताल के सहायक अस्पताल अधीक्षक डॉ. संटू बाघ ने अज्ञात च्वाइस सेंटरों के खिलाफ रिपोर्ट मणिपुर थाने में दर्ज कराई है। मामले में पुलिस रिपोर्ट दर्ज कर विवेचना शुरू कर दी है।
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