अंबिकापुर,18 मार्च 2025 (घटती-घटना)। अनुसूचित जनजाति बालक के साथ अप्राकृतिक यौन उत्पीडिऩ के मामले में फास्ट ट्रेक स्पेशल कोर्ट ने आरोपी को 20 वर्ष सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। वहीं कोर्ट ने पीडि़त क्षतिपूर्ति निधि से पीडि़त बालक को 5 लाख रुपए क्षतिपूर्ति राशि प्रदान करने की अनुशंसा की है। लोक अभियोजक विद्याभूषण श्रीवास्तव के अनुसार स्कूल के चपरासी संजय नामदेव ने पहले अनुसूचित जनजाति के नबालिग बालक से पहले दोस्ती की। इसके बाद अपने साथी अशोक चौधरी पिता शिवधारी राम चौधरी उम्र 20 वर्ष नर्मदापुर वार्ड क्रमांक 8 मांझापारा थाना कमलेश्वरपुर के साथ मिलकर नबालिग बालक को जगह-जगह लेजाकर कई बार उसके साथ अप्राकृतिक यौन उत्पीडिऩ करता था। आरोपियों ने घटना का वीडिया बनाकर वारल करने की धमकी देकर रुपए की मांग करते थे। आरोपियों के यैन प्रताडऩा से परेशान होकर बालक ने 27 अक्टूबर 2015 को मामले की जानकारी अपनी मां को दी। इसके बाद परिजन ने 29 नवंबर को मामले की रिपोर्ट कमलेश्वरपुर थाना में दर्ज कराई थी। मामले में पुलिस शून्य पर अपराध दर्ज कर विवेचना के लिए अजाम थाना अंबिकापुर भेज दिया था। मामले की जांच के बाद पुलिस ने आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल दाखिल कर दिया था। वहीं मामले की सुनवाई अतिरिक्त सत्र न्ययाधीश फास्ट ट्रेक स्पेशल कोर्ट (पॉक्सो एक्ट) अंबिकापुर में चल रहा था। मामले की सुनवाई करते हुए न्यायाधिश कमलेश जगदल्ला ने साक्ष्य के आधार पर आरोपी अशोक चौधरी के खिलाफ धारा 377, 386, 506, 342, 3 (क)/4, 5 (छ) (ठ)/6 एवं 3(2-5) में दोषी पाए जाने पर 20 वर्ष की सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। वहीं कोर्ट ने पीडि़त क्षतिपूर्ति निधि से पीडि़त बालक को 5 लाख रुपए क्षतिपूर्ति राशि प्रदान करने की अनुशंसा की है।
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