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अंबिकापुर,@महापौर मंजूषा भगत ने एमआईसी में 10 लोगों को किया शामिल,विभागों को दी गई जिम्मेदारी

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अंबिकापुर,17 मार्च 2025 (घटती-घटना)। अंबिकापुर नगर निगम की महापौर मंजूषा भगत ने सोमवार को मेयर इन काउंसिल का गठन कर दिया है। एमआईसी में 10 पार्षदों को जगह दी गई है, मेयर इन काउंसिल का गठन छाीसगढ़ नगर पालिक निगम अधिनियम 1956 की धारा 37 के तहत निहित प्रावधान और प्रदत शक्तियों को प्रयोग में लाते हुए मेयर मंजूषा भगत ने किया है। निर्वाचित पार्षदों में से मेयर इन काउंसिल का गठन करते हुए उन्हें संबंधित विभागों का प्रभारी सदस्य नियुक्त किया है। महापौर मंजूषा भगत ने कहा कि सभी वर्गों को ध्यान में रखकर 10 सदस्यीय पार्षदों को मेयर इन काउंसिल में शामिल किय गया है।
दो बार पार्षद रहे मनीष ङ्क्षसह को आवास, पर्यावरण एवं लोक निर्माण विभाग, जितेन्द्र सोनी उर्फ अज्जू को जल कार्य विभाग, ममता तिवारी को स्वास्थ्य एवं चिकित्सा विभाग, अनिता रविन्द्र गुप्त भारती को बाजार विभाग, सुशांत घोष को शिक्षा विभाग, प्रियंका गुप्ता को महिला तथा बाल कल्याण विभाग, विपिन कुमार पांडेय खाद्य तथा नागरिक आपूर्ति विभाग, रविकांत रांव को पुनर्वास तथा नियोजन विभाग, श्वेता गुप्ता को राजस्व विभाग व विशाल गोस्वामी उर्फ दूधनाथ को विधि तथा सामान्य प्रशासन विभाग की जिम्मेदारी दी गई है। महापौर मंजूषा भगत ने कहा कि एमआईसी की बैठक से पूर्व एमआईसी का गठन जरूरी था। एमआईसी टीम में सभी वर्गों को शामिल किया गया है। ताकि विभागीय कार्य में किसी तरह का कोई लापरवाही न हो। सभी पार्षद योग्य हैं। शहर के चहुमुखी विकास के लिए सभी मिलकर बेहतर काम करेंगे। उन्होंने कहा कि अंबिकापुर नगर निगम को स्वच्छता में बेतर रैंकिंग मिले इसके लिए पहले दिन से ही कवायद शुरू कर दी गई है।
पुराने व नए पार्षदों भी शामिल
10 सदस्यीय एमआईसी की टीम में पुराने पार्षदों के साथ-साथ नए पार्षदों को भी शामिल किया गया है। मनीष ङ्क्षसह दो बार पार्षद रह चुके हैं। अनिता रविन्द्र गुप्त भारती 2 बार, सुशांत घोष 3 बार, श्वेता गुप्ता 3 व विशाल गोस्वामी 3 बार पार्षद रह चुके हैं। इसके अलावा पहली बार चुनाव जीतकर पार्षद बने जितेन्द्र तवारी ऊर्प अज्जू, ममता तिवारी, प्रियंका गुप्ता, विपिन पांडेय, रविकांत उरांव को भी टीम में शामिल किया गया है। वहीं वरिष्ठ भाजपा नेता एवं पार्षद आलोक दुबे को महापौर ने किसी भी विभाग की जिम्मेदारी नहीं सौंपी हैं। आलोक दुबे को एमआईसी में शामिल नहीं किया गया है। जबकि इनका नाम सभापति पद की दावेदारी में भी शामिल था। इनका नाम एमआईसी में शामिल नहंी किए जाने जाने को लेकर राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज है।


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