नई दिल्ली,22 फरवरी 2025 (ए)। सर्वोच्च न्यायालय ने कहा है कि दहेज की मांग भारतीय दंड संहिता की धारा 498ए के तहत क्रूरता का अपराध गठित करने के लिए पूर्व शर्त नहीं है। यह धारा 1983 में विवाहित महिलाओं को पति और ससुराल वालों से बचाने के लिए लागू की गई थी।न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति प्रसन्ना बी वराले की पीठ ने 12 दिसंबर, 2024 को कहा कि भारतीय दंड संहिता की धारा 498ए का सार क्रूरता के कृत्य में निहित है और दोषी पतियों और ससुराल वालों के खिलाफ इस प्रावधान को लागू करने के लिए दहेज की मांग आवश्यक नहीं है।पीठ ने कहा, इसलिए, दहेज की मांग से स्वतंत्र क््रूरता का कोई भी रूप, भारतीय दंड संहिता की धारा 498 ए के प्रावधानों को आकर्षित करने और कानून के तहत अपराध को दंडनीय बनाने के लिए पर्याप्त है।
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