
भूपेन्द्र सिंह-
अंबिकापुर,23 जून 2024 (घटती-घटना)। राजस्व विभाग कब पटरी पर आएगा इसे लेकर बार-बार प्रश्न उठता है और उठना भी चाहिए क्योंकि राजस्व विभाग इस कदर पटरी से उतर गया है कि उसे पटरी पर चढ़ने के लिए अब या तो कोई भगवान ऊपर अवतार लेंगे या फिर कोई ऐसा जनप्रतिनिधी अवतार लगा जो उसे पटरी पर ला सके, राजस्व विभाग में किसानों का कितना बुरा हाल है यह किसी से छुपा नहीं है एक बार फिर एक ऐसा ही मामला सामने आया है जो राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली को शर्मसार करने वाला है सरगुजा जिले के लुंड्रा ब्लॉक के तहसील कार्यालय में एक किसान का जमीन संबंधित प्रकरण की पेशी 21 जून को थी, किसान उसे दिन निर्धारित समय सीमा पर कार्यालय पहुंच गया है पर कार्यालय पहुंच कर जहां उसके प्रकरण में सुनवाई होनी थी वहां पूरे दिन भर उसकी फाइल खोजने में समय बीत गया,कहा जाए तो उसे दिन उसकी फाइल ही गुम हो गई अब ऐसा किसी षड्यंत्र के तहत किया गया या फिर यह विभाग की लापरवाही है?
मिली जानकारी के अनुसार एक किसान राजस्व न्यायालय पहुंच जहां पर उसकी जमीन संबंधित प्रकरण की पेशी थी पर वह पूरे दिन नाम के पुकार का इंतजार करता रह गया पर उसका नाम नहीं पुकारा गया, पूरा दिन वह इंतजार करने के बाद परेशान होकर घर वापस लौट गया,मामला ग्राम बीर गांव का रहने वाला किसान खेरी नामक व्यक्ति का है जो की जमीन संबंधित प्रकरण पर अपने मृत पिताजी का नाम छुटने पर मृत्यु प्रमाण-पत्र जमा किया गया था जिसकी पेशी तारीख 21 जून 2024 को थी उन्होंने यह भी बताया कि मेरे परिवार के लोग मेरे पिताजी का नाम छुपा कर तहसीलदार लकेश्वर कुमार सिद्धार्थ पटवारी बड़े बाबू लाल बहादुर मरावी के द्वारा मेरा जमीन को दूसरे के नाम पर चढ़ा दिया गया है,जिसका पेशी पर आज मैं सुबह से 5ः45 बजे शाम तक बैठा रह गया, बाबू से पूछने पर उन्होंने बताया कि तुम्हारा पेशी का फाइल कही रखा गया है नहीं मिल पा रहा है, इसलिए तुम जाओ बाद में आना, यह जानकारी पीडि़त ने दैनिक घटती-घटना संवाददाता को बताया और अपनी पूरी दिन भर की परेशानी की जानकारी दी, वही जब संवाददाता वहां पदस्थ रीडर लाल बहादुर मरावी से जानकारी लेने पर उनके द्वारा कहा गया कि मैं इस विषय पर कुछ भी नहीं बोल पाऊंगा जो भी पूछना है तो तहसीलदार साहब से पूछ ले, ऐसा कह कर लाल बहादुर मरावी के द्वारा चेहरा छुपा कर इधर-उधर भागते नजर आए, तभी संवाददाता के द्वारा तहसीलदार के पास दूरभाष के माध्यम से जानकारी लेने की कोशिश की गई संपर्क नहीं हो पाया।
पेशी के दिन फाइल गायब होना कितनी बड़ी लापरवाही?
राजस्व विभाग का चक्कर लगाना या कहें कि अधिकारियों व बाबू की वजह से चक्कर लगाना लोगों की परेशानी बना हुआ है पर इस परेशानी के बीच जब लोग पूरे दिन अपने प्रकरण की सुनवाई को लेकर राजस्व न्यायालय पहुंचते हैं और उन्हें पता चलता है कि उनकी फाइल गुम है तो आप समझ सकते हैं कि विभाग में किस प्रकार की तानाशाही चल रही है,जिस दिनांक को प्रकरण की सुनवाई होना है इस दिनांक को फाइल का गुम हो जाना कई सवाल खड़े करता है और राजस्व अधिकारी सहित वहां पर पदस्थ बाबुओं की कार्यप्रणाली को भी उजागर करता है, पर क्या ऐसे मामलों पर कार्यवाही होगी या फिर वर्तमान सरकार भी पुराने ढरे पर चलती रहेगी? इस तरह का तहसील कार्यालय से फाइल का नदारत होना कितना शर्मनाक बात है बाबू के द्वारा किया जा रहा है ऐसा महसूस होता है कि वहां पर जिम्मेदार बाबू आलीशान कुर्सी पर बैठकर नींद फरमा रहे होंगे और पेशी पर आए हुए व्यक्ति बाहर बैठकर पेड़ का खुशनुमा हवा ले रहे।
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