नई दिल्ली,03 मार्च 2024 (ए)। राजधानी दिल्ली में कुछ दिनों पहले एक 18 महीने की बच्ची पर आवारा कुत्तों ने अटैक कर दिया था। हमले के चलते बच्ची बुरी तरह से घायल हो गई और उसकी दर्दनाक मौत हो गई। बच्ची के पिता ने अब दिल्ली हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। उन्होंने दिल्ली सरकार से 50 लाख रुपए मुआवजे की मांग की है। अपनी मासूम बच्ची को खो चुके याचिकाकर्ता पिता ने कोर्ट में सार्वजनिक सुरक्षा को लेकर संबंधित अधिकारियों और नई दिल्ली नगर निगम से कई महत्वपूर्ण सवाल उठाया है। उन्होंने याचिका में कहा कि का काम शहर और नगर पालिका की सीमाओं को साफ और गंदगी से मुक्त रखना है। साथ में हिंसक और आक्रामक कुत्तों के आतंक और उपद्रव को भी दूर करना है। याचिकाकर्ता ने बताया कि उनकी बेटी की मौत संबंधित अधिकारियों और एनडीएमसी की लापरवाही और चूक के चलते हुई है। क्योंकि शहर को सुरक्षित रखना और गंदगी, उपद्रव आदि को दूर करना इनका प्राथमिक, अनिवार्य और बाध्यकारी कर्तव्य है। उन्होंने बताया कि लापरवाही के कारण ही मेरी बच्ची पर कुत्तों ने बेरहमी से हमला कर दिया और उसे सुनसान जगह ले जाकर मार डाले। याचिका में आगे कहा गया है कि संविधान के अनुच्छेद 21 के अनुसार लोगों के जीवन को बचाना और उनकी रक्षा करना राज्य का कर्तव्य है। नई दिल्ली नगर निगम की ओर से इस तरह की लापरवाही और प्रशासनिक चूक ने भारत के संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत मृत बच्ची और याचिकाकर्ता के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन किया है। याचिका में बताया गया है कि मृतक बच्ची का पिता धोबी घाट, तुगलक लेन, नई दिल्ली का निवासी है। वह आर्थिक रूप से कमजोर है। जिस जगह यह घटना हुई वह अत्यधिक सुरक्षित इलाका है। उधर वरिष्ठ नौकरशाहों और राजनेताओं को सरकारी आवास आवंटित किए गए हैं। इलाके में सीसीटीवी भी लगे हैं। ऐसे में याचिकाकर्ता ने दिल्ली सरकार से 50 लाख रुपए मुआवजे की मांग की है।
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