अंबिकापुर,03 मार्च 2024 (घटती-घटना)। 3 मार्च को विश्व श्रवण दिवस मनाया जाता है जिसके उपलक्ष्य में राष्ट्रीय बधिरता नियंत्रण कार्यक्रम सरगुजा के तत्वाधान में बरगीडीह में स्वास्थ्य कैंप व आशा निकुंज मूक बधिर विद्यालय में जागरूकता से सम्बधित कार्यक्रम का आयोजन किया गया। बधिरता अर्थात सुनने की क्षमता में कमी का कारण उम्र के अनुसार अलग-अलग रहती है। पांच वर्ष से कम उम्र में बधिरता का कारण जन्म जात होता है। यदि समय रहते बधिरता की जांच न कराई जाय, तो बधिरता से प्रभावित बच्चा जीवन भर मूक बधिर रहता है। पांच वर्ष ज्यादा व 20 वर्ष तक बधिरता का कारण कान में वैक्स का जमा होना संक्रमण या कान बहना होता है, जो कि ईलाज से पूरी तरह ठीक हो जाता है।
20 से 50 वर्ष तक कम सुनने का कारण कान में चोट आना व ध्वनि प्रदूषण होता है, जिससे मरीज में स्थाई रूप से बहरापन आ जाता है। वर्तमान युवाओं में तेज शोर शराबा व कान में हेडफोन लगाकर सुनने की आदत बढ़ रही है। जिससे इस उम्र में बहरापन के मरीजों की संख्या में इजाफा हुआ है। 50 वर्ष के बाद में बढ़ती उम्र व शुगर की बिमारी बहरापन का मुख्य कारण होती है। जिसकें इलाज में श्रणण यंत्र कारगर सिद्ध होता है। बरगीडीह स्वास्थ्य कैंप में 67 मरीजों का स्वास्थ्य परीक्षण हुआ। जिसमें 30 मरीज बुजुर्ग थे जिनमें सुनने की क्षमता में कमी पाई गई, सुननें की क्षमता में कमी के कारण भूलने की बिमारी अवसाद व नींद न आने जैसी समस्या बुजुर्गों में देखी जाती है। आस्था निकुंज विद्यालय में जन जागरुक्ता कार्यक्रम के तहत मुख बधिर बच्चों के पालकों को व स्कूल के स्टाफ टीचर को बधिरता के कारण व निदान के बारे में जानकारी दी गई। मुक बधिर स्कूल के 9 बच्चों ने मुम्बई में आयोजित अन्तरराजकीय खेल-कूद प्रतिसप्रधा में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया था जिन्हे पुरस्कृत किया गया। 2022-23 में शासकीय महाविद्यालय संबध चिकित्सालय अम्बिकापुर में 1337 मरीजों की आडियोमेट्री जांच की गई। 3 बच्चों का काम्कलीट प्लांट सर्जरी के लिए विशेष स्पीच थेरेपी दी गई जिससे इनका जन्मजात बहरापन हमेश के लिए खत्म जो जायेगा। 117 मरीजों को स्पीच थेरेपी के माध्यम से तुतलाना, हकलाना जैसी वाणी दोष को ठीक किया गया, 43 मरीजों की कर्ण सम्बधित परेशानी के लिए शल्यक्रिया की गई। शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय के अधिष्ठाता डॉ. रमनेश मूर्ति की पहल पर ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ स्पीच व हियरिंग (एश) सेंटर की स्थापना की गई है जिसके तहत 1 दिन के बच्चों में भी श्रवण श्रमता की पहचान की जा सकती है। श्रवण क्षमता की पहचान करने के लिए एश सेंटर, डीइआईस एनपीपीसीडी कार्यक्रम के तहत पांच आडियोलाजिस्ट कार्य कर रहे है।
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