- उड़न दस्ता दल क्यों नहीं करते यात्री बसों व टैक्सी परमिट गाडि़यों की जांच?
- उड़न दस्ता दल प्रभारी संदीप गुप्ता की कार्यप्रणाली नहीं है ठीक,उतरना पड़ता है क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी को जांच में…
- कंडम बसें दौड़ रही सड़कों पर उड़न दस्ता प्रभारी को नहीं दिखती रास्ते में कंडम बस…
- उड़न दस्ता प्रभारी कि वाहन में दो निजी व्यक्ति हमेशा रहते हैं सवार…उन्ही दो के खातों में डिजीटल माध्यम से मांगते हैं पैसा फिर अपने खाते में करते हैं ट्रांसफर
- परमिट किसी अन्य वाहन की और उसी परमिट पर दौड़ती है कोई अन्य वाहन पर उड़न दस्ता प्रभारी नहीं पकड़ पाते ऐसे वाहनों को
-भूपेन्द्र सिंह –
अंबिकापुर,07 जनवरी 2024 (घटती-घटना)। सड़क सुरक्षा को लेकर परिवहन विभाग द्वारा संभागीय स्तर पर उड़न दस्ता दल गठित कर रखा गया है ताकि सड़क सुरक्षा पर ध्यान दिया जा सके पर क्षेत्रीय कार्यालय अंबिकापुर का संभागीय उड़न दस्ता दल इस समय अलग ही दास्तान बयां कर रहा है, इन्हें वाहन जांच करने में दिलचस्पी नहीं है सिर्फ उगाही में इनका ध्यान है यही वजह है कि यात्री बसें बिना परमिट की दौड़ रही हैं और जो बस दौड़ भी रही है तो परमिट किसी और का और चल रही है कोई और बस यहां तक की कंडम बसें भी सड़कों पर दौड़ रही हैं पर उड़न दस्ता प्रभारी को जांच करने की फुर्सत नहीं सूत्रों की माने तो उड़न दस्ता दल प्रभारी के गाड़ी में दो अन्य निजी व्यक्ति बैठे रहते हैं और वह हमेशा उस गाड़ी में उनके साथ मिल जाएंगे ऐसा बताया जाता है कि जांच के एवज में सिर्फ उगाही होती है और उगाही का पैसा उन दोनों निजी लोगों के खाते में अलग-अलग माध्यम से जाता है फिर उनके खाते से प्रभारी साहब के खाते में जाता है यदि जांच हो जाए तो उगाही की असलियत ही खुल जाएगी पर सवाल यह है कि आखिर जांच करें तो करेगा कौन क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी का काम नहीं है जांच करना फिर भी उड़न दस्ता दल सही तरीके से काम ना कर पाने की वजह से शिकायतों पर उन्हें खुद उतरना पड़ता है जांच में।
कंडम बसें दौड़ रही सड़कों पर
यात्री बसें जो यात्रियों को लेकर सड़कों पर दौड़ रही है उसमें से लगभग यात्री बस कंडम हालत में है किसी का हेडलाइट टूटा है तो किसी का सामने का कांच टूटा है तो किसी का ब्रेक लाइट टूटा है यदि देखा जाए तो यात्रियों को बिना सुविधा वाली वाहनों में सफर करना पड़ रहा है, जो खतरे से खाली नहीं है फिर भी उड़ान दस्ता दल इन वाहनों पर कार्यवाही कर पाने में असमर्थ दिख रहा है। कई यात्री बस तो ऐसी हैं जिसमें यात्री बरसात में बैठकर जाते तो जरूर है पर टपकती बस की छतो की वजह से भीग भी जाते हैं। बस से पानी टपकने के बावजूद यात्रियों को पैसा देने के बाद बस में यात्रा करना मजबूरी बन जाता है।
दुर्घटना होने पर भी नहीं पहुंचते उड़न दस्ता दल प्रभारी,दुर्घटना स्थल पर
उड़न दस्ता दल का यह भी काम है कि यदि यात्री बस है या स्कूल बस कभी कोई हादसा होता है तो वहां पर पहुंचकर जांच परख करना चाहिए पर ऐसा करने से भी उड़न दस्ता दल परहेज करते है ,किसी भी गंभीर दुर्घटना में उड़न दस्ता दल नहीं पहुंचता जिस वजह से दुर्घटना की वजह का पता नहीं चलता ,कई बार दुर्घटना यात्री बसों की कमियों की वजह से भी हो जाती है जिसे उड़न दस्ता दल नजअंदाज करता है।
यात्री बसें बन गई है माल वाहक बसें
यात्री बसों का काम है यात्रियों को लेकर चलना पर अधिकांश यात्री बसें यात्रियों से ज्यादा माल वाहक बनकर दौड़ रहीं हैं, यात्रियों से ज्यादा कमाई उन्हें माल ढोने में हो रही है जिस वजह से वह माल वाहक यात्री बसें बनकर सड़कों पर दौड़ रहे हैं,पर उड़न दस्ता दल को जांच करने की फुर्सत नहीं।
20 प्रतिशत बस बिना परमिट की दौड़ रही हैं,वहीं 60 प्रतिशत कंडम बसें सड़कों पर दौड़ रही हैं…
पूरे संभाग में यदि यात्री बसों की हालत की बात की जाए तो 20 प्रतिशत यात्री बसें बिना परमिट के यात्रियों को लेकर सड़कों पर दौड़ रही हैं जिसकी सुध लेने की फिक्र उड़न दस्ता दल को नहीं है वहीं 60 प्रतिशत बसें कंडम हालत में हैं जो कभी भी बड़ी दुर्घटना का सबब बन सकती हैं यात्रियों की जान को खतरा हो सकता है,लेकिन उड़नदस्ता दल को कोई वास्ता नहीं इन सभी चीजों से उसे केवल समय पर वसूली से मतलब है जो वह कर रहा है। आज यात्री बसों को देखकर ही जाना जा सकता है किस बस की कैसी हालत है फिर भी उड़नदस्ता दल इस देखकर अनदेखा कर रहा है यात्रियों की जान जोखिम में डाल रहा है।
आखिर दो निजी व्यक्ति उड़नदस्ता दल प्रभारी के साथ प्रतिदिन क्यों दिखते हैं उनकी गाड़ी में?
एक सवाल यह भी है जो लगातार उठ रहे हैं की उड़नदस्ता दल प्रभारी की गाड़ी में दो निजी लोग क्या करते रहते हैं। वह किस काम के लिए उनकी गाड़ी में नियुक्त हैं। लोगों का कहना है की उड़न दस्ता दल प्रभारी जब भी जांच में निकलते हैं उनकी गाड़ी में दो उनके निजी लोग सवार रहते हैं जिसकी जांच किए जाने की बात भी लोग कह रहे हैं।
यात्री व स्कूल बसों के दुर्घटना पर भी नहीं पहुंचता उड़नदस्ता दल
कभी कोई यात्री बस या कोई स्कूल बस जब दुर्घटना ग्रस्त होती है तब भी उड़नदस्ता दल प्रभारी दुर्घटना स्थल पर नहीं पहुंचते हैं जबकि उन्हे पहुंचना चाहिए और कारण की जांच की जानी चाहिए की आखिर क्यों दुर्घटना हुई क्या दुर्घटना का कारण बस की कोई कमी है या अन्य कोई कारण। कुल मिलाकर उड़नदस्ता दल प्रभारी अपने कर्तव्य से लगातार मुंह मोड़ते नजर आ रहे हैं।
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