कौन है अमित कात्याल? जिसकी गिरफ्तारी के बाद तेजस्वी यादव की बढ़ सकती हैं मुश्किलें
नई दिल्ली,11 नवंबर 2023 (ए)। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने कथित जमीन के बदले नौकरी घोटाला मामले में एके इंफोसिस्टम्स के प्रमोटर अमित कात्याल को शनिवार सुबह गिरफ्तार कर लिया। मामले के सिलसिले में शुक्रवार रात पूछताछ के बाद उन्हें हिरासत में लिया गया।
दक्षिण दिल्ली की पॉश न्यू फ्रेंड्स कॉलोनी में कात्याल के परिसर को एके इंफोसिस्टम्स के कार्यालय के रूप में घोषित किया गया था, लेकिन राजद नेता तेजस्वी यादव द्वारा आवासीय परिसर के रूप में इसका उपयोग किया जा रहा है।
ईडी ने इस साल 31 जुलाई को रेलवे में नौकरी के बदले भूमि के मामले में पीएमएलए, 2002 के प्रावधानों के तहत राजद नेता राबड़ी देवी, मीसा भारती (लालू यादव की बेटी), विनीत यादव (लालू की बेटी हेमा यादव के पति), शिव कुमार यादव (हेमा यादव के ससुर) की 6.02 करोड़ रुपये की छह अचल संपत्तियों को कुर्क किया था। ए बी एक्सपोर्ट्स प्राइवेट लिमिटेड और ए के इंफोसिस्टम्स प्राइवेट लिमिटेड, दोनों कंपनियां लालू प्रसाद यादव के परिवार के सदस्यों के स्वामित्व और नियंत्रण में हैं।
कुर्क की गई संपत्तियों में डी-1088, न्यू फ्रेंड्स कॉलोनी, नई दिल्ली स्थित आवासीय परिसर शामिल है, जिसका स्वामित्व एबी एक्सपोर्ट्स प्राइवेट लिमिटेड के पास है। महुआबाग (दानापुर), पटना में स्थित दो भूमि पार्सल, जिनमें से एक-एक का स्वामित्व राबड़ी देवी और एके इंफोसिस्टम्स प्राइवेट लिमिटेड के पास है, को भी कुर्क किया गया है।
दिल्ली के जिस मकान में रहते तेजस्वी,उसी में आरोपी कात्याल की कंपनी का पंजीकृत कार्यालय
इस साल के मार्च महीने में जब जमीन के बदले नौकरी घोटाला में अमित कात्याल का नाम आया, उससे पहले तक राज्य के लोग लालू परिवार से इस व्यक्ति के संबंधों के बारे में कुछ नहीं जानते थे।
अमित कात्याल घोटाले का बड़ा राजदार
लेकिन, सीबीआइ और ईडी की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ी, यह पता चला कि अमित कात्याल इस परिवार का करीबी ही नहीं, इस घोटाले का बड़ा राजदार भी है। मार्च में ईडी ने कहा था कि उप मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव नई दिल्ली के न्यू फ्रेंड्स कालोनी में रहते हैं, उसी मकान के परिसर में मेसर्स एबी एक्सपोर्ट प्राइवेट लिमिटेड और मेसर्स इन्फोटेक प्राइवेट लिमिटेड का अधिकृत कार्यालय है।
जांच में हुआ यह खुलासा
ये दोनों कंपनियां कात्याल की ही हैं। इसके बाद जांच आगे बढ़ी तो कई और राज खुले। जांच के दौरान पता चला कि जमीन के बदले नौकरी घोटाले का एक हिस्सा अमित कात्याल की कंपनी में भी लगा है।
नौकरी पाने वाले कुछ लोगों ने कात्याल की कंपनी के नाम जमीन रजिस्ट्री की थी। बाद में ऐसी भी जमीन इस कंपनी के नाम की गई, जिसे पहले लालू प्रसाद के स्वजन के नाम रजिस्ट्री की गई थी। माना यह जा रहा है कि कात्याल से पूछताछ में ईडी को ऐसे सबूत मिलेंगे, जिससे इस घोटाले में तत्कालीन रेल मंत्री लालू प्रसाद और उनके स्वजन की संलिप्तता साबित हो सकती है।
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने कथित लैंड फॉर जॉब मामले में अमित कात्याल नाम के एक बिजनेसमैन को गिरफ्तार किया है। बिजनेसमैन अमित कात्याल को लालू यादव और तेजस्वी यादव का करीबी बताया जा रहा है।
एजेंसी ने दावा किया है कि पूछताछ के लिए कात्याल को समन जारी किया था, लेकिन वो दो महीने पूछताछ से बच रहे थे। जिसके बाद ईडी ने अब अमित कात्याल को गिरफ्तार कर लिया है। ईडी की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक, अमित कात्याल एके इंफोसिस्टम्स प्राइवेट लिमिटेड के पूर्व निदेशक हैं। एके इंफोसिस्टम्स प्राइवेट लिमिटेड लैंड फॉर जॉब मामले में कथित “लाभार्थी कंपनी” है। इसका रजिस्टर्ड ऑफिस दक्षिण दिल्ली के न्यू फ्रेंड्स कॉलोनी स्थित एक आवासीय भवन है। जिसे फिलहाल तेजस्वी यादव के द्वारा रिहायशी तौर पर इस्तेमाल किया जा रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक अमित कात्याल एक बिजनेसमैन हैं। उनका लालू परिवार से करीबी संबंध है। वह दिल्ली की एके इंफोसिस्टम कंपनी के डायरेक्टर भी रह चुके हैं। इस कंपनी से लिंक जुड़ने के बाद ही तेजस्वी यादव का नाम इस कथित घोटाले में आया था। अमित कात्याल वही कारोबारी है। जिसने राबड़ी देवी की सरकार में पटना बिहटा में बीयर की फैक्ट्री लगाई थी। बाद में इसी अमित कात्याल ने अपने नाम पर एके इन्फोसिस्टम कंपनी नामक कंपनी बनाई। ईडी का दावा है कि, इस कंपनी के नाम पर अकूत संपत्ति अर्जित की गई । जिसके बाद लालू परिवार इस कंपनी का मालिक हो गया। कात्याल की करोड़ों की संपत्ति तेजस्वी के नाम कर दी गई।
मौजूदा समय में एके इंफोसिस्टम नाम की कंपनी के सारे शेयर राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव के पास हैं। ये कंपनी सिर्फ जमीन में डील करती है। एके इन्फोसिस्टम के पास 221 डिसमिल के 21 भूखंड हैं। आरोप है कि रेलवे में नौकरी देने के नाम लालू प्रसाद यादव ने कई ऐसी जमीन ली थीं। जिसकी रजिस्ट्री एके इंफोसिस्टम नाम की कंपनी के नाम कराई गई थी।
सीबीआई के अनुसार, नियुक्ति के लिए कोई विज्ञापन या सार्वजनिक सूचना जारी नहीं की गई थी। पटना के कुछ निवासियों को मुंबई, जबलपुर, कोलकाता, जयपुर और हाजीपुर में विभिन्न जोनल रेलवे में नौकरियां दी गई थीं। बदले में उम्मीदवारों ने सीधे या अपने परिवार के सदस्यों के माध्यम से लालू के परिवार के सदस्यों को कथित तौर पर अत्यधिक रियायती दरों पर जमीन बेचीं। जिनकी कीमतें बाजार रेट के मुकाबले काफी कम थी।
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