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नई दिल्ली@कर्नाटक में भविष्य का नेतृत्व तय करने में जुटी भाजपा

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उम्मीदवारों की क्षमता के आधार पर बनाई जाएगी रणनीति
नई दिल्ली,16 अप्रैल 2023 (ए)।
कर्नाटक में भाजपा के अब तक के सबसे प्रभावशाली नेता व पूर्व मुख्यमंत्री बीएस येद्दयुरप्पा चुनाव नहीं लड़ रहे हैं। पूर्व मुख्यमंत्री जगदीश शेट्टार और पूर्व उपमुख्यमंत्री लक्ष्मण सावदी टिकट न मिलने के बाद कांग्रेस में शामिल हो गए हैं। एक और पूर्व उपमुख्यमंत्री के ईश्वरप्पा ने खुद ही चिट्ठी लिखकर चुनाव न लड़ने की घोषणा कर दी। दूसरी तरफ भाजपा की टिकट से लगभग चार दर्जन नए व युवा चेहरे मैदान में हैं।
भविष्य की भाजपातैयार करने का रोडमैप
वर्तमान चुनाव जाहिर तौर पर अहम है लेकिन इसी चुनाव के जरिए भाजपा नेतृत्व ने भविष्य की भाजपा तैयार करने का भी रोडमैप तैयार कर लिया है। क्षमता का आकलन जमीन से ही शुरू होगा जिसके आधार पर भविष्य की जिम्मेदारी तय होगी। कर्नाटक न सिर्फ दक्षिण में भाजपा का अकेला मजबूत गढ़ है बल्कि पूरे दक्षिण की लड़ाई यहीं से लड़ी जाने वाली है। जिस तरह प्रदेश में जदएस सीमित होता जा रहा है उसमें भाजपा और कांग्रेस ही मुख्य प्रतिद्वंद्वी हैं।
विधानसभा चुनाव के एक साल के अंदर ही लोकसभा चुनाव भी है। परेशानी यह है कि येद्दयुरप्पा के बाद पार्टी में फिलहाल ऐसा कोई नेता नहीं है, जो स्थिति को नियंत्रित कर सके और जनता व कार्यकर्ताओं में जोश भर सके। वर्तमान मुख्यमंत्री बीआर बोम्मई जाहिर तौर पर इस बार चेहरा हैं लेकिन भविष्य के लिए पार्टी ऐसी युवा कतार चाहती है जो अगले 20-25 साल तक नेतृत्व दे सके।
विजयेंद्र, प्रीथम, श्रीरामुलू और नारायणस्वामी जैसे चेहरों पर नजर
येद्दयुरप्पा के पुत्र विजयेंद्र और हासन के विधायक प्रीथम गौडा ऐसे उम्मीदवार हैं जिनपर केंद्रीय नेतृत्व को ज्यादा भरोसा है। उनसे अपेक्षा की जा रही है कि वह खुद की सीट के अलावा भी कम से कम आधा दर्जन सीटों पर असर दिखाएं। विजयेंद्र लिंगायत हैं और गौडा वोकालिग्गा। माना जा रहा है कि भाजपा अगर फिर से सरकार बनाने में कामयाब रही तो ये दो नाम बड़े चेहरे बनकर उभरेंगे।
खासकर विजयेंद्र पर सबकी नजर होगी क्योंकि पिछले कुछ वर्षों में संगठन के लिए काम करते हुए उन्होंने मैसूर क्षेत्र की भी कुछ ऐसी सीटें जिताकर दी थी जो पार्टी अब तक नहीं जीत पाई थी। उन्होंने यह आत्मविश्वास भी दिखाया था कि पार्टी चाहे तो वह कांग्रेस के पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धरमैया के खिलाफ भी लड़ सकते हैं।
गौडा में भी पार्टी ऐसा ही विश्वास देखती है, जिन्होंने हासन की किसी भी सीट से लड़ने की हामी भर दी थी। यह जदएस का गढ़ है। जबकि अनुसूचित जनजाति से आने वाले बी श्रीरामुलू और अनुसूचित जाति के ए नारायणस्वामी जैसे चेहरों की भी आजमाइश हो रही है। हालांकि नारायणस्वामी चुनाव नहीं लड़े रहे हैं लेकिन चुनाव में उनकी भूमिका अहम है।
चुनाव की कमान
दरअसल मुख्यतया लिंगायत की पार्टी मानी जाने वाली भाजपा ने इसी चुनाव से जातिगत विस्तार शुरू कर दिया है। बड़ी संख्या में वोकालिग्गा को भी टिकट दिया गया है। पिछली बार लगभग दो दर्ज सीटों पर वोकालिग्गा उम्मीदवार उतारे गए थे जबकि इस बार तीन दर्ज से ज्यादा भाजपा उम्मीदवार वोकालिग्गा हैं। चुनाव की कमान भी वोकालिग्गा नेता व केंद्रीय मंत्री शोभा करांदलजे को दी गई है जो येद्दयुरप्पा की विश्वस्त हैं। श्रीरामुलू और नारायणस्वामी जाति और जनजाति में अपना प्रभाव दिखाएंगे।


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