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अम्बिकापुर@कब्रिस्तान में शव दफनाने को लेकर विवाद,निष्पक्ष जांच की मांग…

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रोमन कैथोलिक समुदाय ने कलेक्टर को सौंपा आवेदन,17 सितंबर की घटना का किया उल्लेख

-संवाददाता-
अम्बिकापुर,26 सितम्बर 2026 (घटती-घटना)। फुन्दुरडिहारी स्थित रोमन कैथोलिक ईसाई समुदाय के कब्रिस्तान में दूसरे समुदाय के मृतक का शव दफनाने को लेकर विवाद की स्थिति निर्मित हो गई। मामले में रोमन कैथोलिक ईसाई समुदाय की ओर से कलेक्टर, एसडीएम और तहसीलदार को आवेदन सौंपकर निष्पक्ष जांच,अवैधानिक कार्रवाई पर रोक और शांति व्यवस्था बनाए रखने की मांग की गई है। आवेदन 25 सितंबर को दिया गया। समुदाय ने आवेदन में दावा किया है कि फुन्दुरडिहारी स्थित भूमि का करीब 70 वर्षों से कब्रिस्तान के रूप में उपयोग किया जा रहा है। आवेदन के अनुसार नजूल भूखंड क्रमांक 120/1 की कुल 39.45½ एकड़ भूमि में से 3.30 एकड़ क्षेत्र में समुदाय द्वारा मृतकों को दफनाया जाता रहा है। इस हिस्से में बाउंड्रीवाल और गेट भी बनाए गए हैं। आवेदन में वर्ष 2020 में नजूल अधिकारी द्वारा की गई कार्रवाई का भी उल्लेख है। संस्था के अनुसार 17 जनवरी 2020 के आदेश के आधार पर नजूल अभिलेखों में प्लाट क्रमांक 120/1 की 3.30 एकड़ भूमि को कब्रिस्तान के कब्जेदार के रूप में दर्ज और चिन्हांकित किया गया था। संस्था का कहना है कि बाद में इस कार्रवाई के खिलाफ अपील हुई और वर्ष 2026 में अपर कलेक्टर स्तर से आदेश पारित होने के बाद नजूल अभिलेख की उक्त प्रविष्टि विलोपित कर दी गई।
17 सितंबर की घटना पर जताई आपत्ति : संस्था ने आवेदन में आरोप लगाया है कि 17 सितंबर को नायब तहसीलदार अंबिकापुर जयेश कंवर करीब 100 लोगों के साथ दोपहर लगभग 2 बजे एक मृत व्यक्ति का शव लेकर कब्रिस्तान पहुंचे। संस्था के अध्यक्ष मानू खलखो को बताया गया कि एसडीएम के मौखिक आदेश के आधार पर शव को वहां दफनाने की व्यवस्था की गई है। आवेदन के अनुसार संस्था के अध्यक्ष और सदस्यों ने इसका विरोध किया। उनका कहना था कि किसी न्यायालय के आदेश के बिना दूसरे समुदाय के मृतक को यहां दफनाया जा रहा है। संस्था ने आरोप लगाया कि इसके बाद शव के साथ पहुंचे लोगों ने हंगामा किया और कब्रिस्तान का ताला खुलवाकर शव दफनाने की कार्रवाई की गई। घटना के बाद समुदाय में आक्रोश और भय की स्थिति होने का भी आवेदन में उल्लेख है।
70 वर्षों से उपयोग का दावा : संस्था ने बताया कि कब्रिस्तान में दफनाए गए मृतकों का रिकॉर्ड लंबे समय से रखा जा रहा है। पिछले 35-40 वर्षों के दफन रिकॉर्ड भी सुरक्षित होने का दावा किया गया है। आवेदन में धार्मिक परंपराओं और भारतीय संविधान के अनुच्छेद 25 व 26 में प्रदत्त धार्मिक अधिकारों का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि प्रत्येक वर्ष 2 नवंबर को समुदाय के लोग पूर्वजों और मृत परिजनों की आत्मा की शांति के लिए कब्रिस्तान में एकत्र होते हैं।
तनाव बढऩे की आशंका जताई :
संस्था ने आशंका जताई है कि यदि अन्य समुदायों के शवों को भी इसी कब्रिस्तान में दफनाने की कार्रवाई की जाती है तो वर्षों से चली आ रही व्यवस्था प्रभावित हो सकती है और समुदायों के बीच तनाव बढ़ सकता है। आवेदन में प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर वैधानिक कार्रवाई सुनिश्चित करने,अवैधानिक कार्रवाई रोकने, शांति व्यवस्था बनाए रखने और संस्था के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा करने की मांग की गई है। आवेदन की प्रतिलिपि संभागायुक्त और पुलिस अधीक्षक को भी भेजी गई है।


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