पटना,19 फ रवरी 2023 (ए)। नीतीश कुमार ने पटना में समाधान यात्रा का समापन करते हुए कहा, यात्रा काफी अच्छी रही। पूरे बिहार में गए, लोगों की बातों को सुना और काम की प्रगति को देखा। यात्रा के बाद लोगों की राय भी आ रही है। जन प्रतिनिधियों ने भी अपनी बात कही है। अधिकारियों को इन बिंदुओं पर काम करने का निर्देश दिया गया है।
मुख्यमंत्री ने लोगों की बात सुनकर उनकी समस्याओं को कितना समझा? सरकारी कार्यों की जमीनी स्थिति से वे कितने संतुष्ट हुए? लोगों की राय को कितना स्थान दिया एवम् उनके निर्देशों का पदाधिकारी कितना कार्यान्वयन करते हैं? फिलहाल इन सवालों का जवाब खोजना कठिन है। लेकिन मुख्यमंत्री आम लोगों को सुन भी सके या नहीं, परियोजना की वास्तविक तस्वीर देख सके या नहीं, इस पर संदेह करने के पर्याप्त कारण मौजूद हैं।अपने दौरे के क्रम में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने जिन लोगों से बात की, जिन परियोजनाओं को देखा और जहां पहुंचे, वे सभी लोग, योजना और स्थल पूर्व निर्धारित थे। सरकारी अधिकारियों द्वारा इन्हें रातों-रात तैयार किया गया। कुछ भी अचानक नहीं था। इसका प्रमाण आज भी उन गांवों, विद्यालयों, परियोजना स्थलों में मौजूद है जहां मुख्यमंत्री का दौरा एन वक्त पर रद्द हो गया। वहां खुदते हुए तालाब आधे खुदे रह गए, मछली पालन के लिए लाई गईं मछलियां वापस भेज दी गईं, सड़कों, दीवारों आदि के रंग-रोगन का काम अधूरा छोड़ दिया गया, पुस्तकालय में लायी गयी पुस्तकें वापस हो गईं, कंप्यूटर आदि जहां से लाए गए थे वहीं लौट गए। दूसरे शब्दों में कहें तो सब कुछ सरकारी दौरे की परंपरागत शैली में हुआ, इसलिए इसे यात्रा कहना सही प्रतीत नहीं होता है। इसलिए सवाल उठता है कि चतुर राजनेता कहे जाने वाले नीतीश कुमार ने आखिर इस यात्रा पर 44 दिनों का लम्बा समय क्यों खर्च किया और इतनी मेहनत किस उद्देश्य से की? विपक्षी दलों के नेता अपनी राजनीतिक सुविधा के अनुसार इस सवाल का जवाब देते हैं।
वरिष्ठ भाजपा नेता और केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय कहते हैं-नीतीश कुमार की समाधान यात्रा के दौरान किसी भी समस्या का समाधान नहीं हुआ। जब नीतीश कुमार किसी से मिले ही नहीं, तो समाधान किसका और क्या किए। आज की तारीख में वे स्वयं सबसे बड़ी समस्या हैं। वहीं पटना के एएन सिन्हा इंस्टीट्यूट के पूर्व निदेशक एवं राजनीतिक विश्लेषक डीएम दिवाकर कहते हैं, ऐसा लगता है नीतीश कुमार अपनी आगे की राजनीति के लिहाज से जनता की नब्ज टटोल रहे थे।
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