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नई दिल्ली @ भारत में 20 करोड़ रोज सोते हैं भूखे

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हर साल 40 फीसदी खाना होता है खराब


नई दिल्ली ,16 अक्टूबर २०२१ (ए)। भारत वैश्विक भुखमरी सूचकांक के 116 देशों की सूची में 91वें स्थान से फिसलकर 101वें पायदान पर पहुंच गया है। आज विश्व खाद्य दिवस है और ऐसे में भारत में रोजाना 20 करोड़ लोगों के भूखे सोने का जिक्र करते हुए हर साल 40 फीसदी भोजन के खराब हाने का दावा किया गया है।
संयुक्त राष्ट्र की संस्था फूड एंड एग्रीकल्चर ऑर्गनाइजेशन (एफएओ) की रिपोर्ट के अनुसार दुनियाभर में 69 करोड़ से अधिक लोग हर दिन भूखे पेट सोते हैं। भारत में खाने के अभाव में हर दिन भूखे पेट सोने वाले लोगों की संख्या 20 करोड़ से अधिक है। ये स्थिति तब है जब देश में हर साल पैदा होने वाला 40 फीसदी खाद्य पदार्थ रखरखाव या आपूर्ति की अव्यवस्था के कारण खराब हो जाता है। एफएओ ने इस बार की थीम ग्रो, नरिश, सस्टेन, ऑवर एक्शन ऑर ऑवर फ्यूचर रखी है जिसका मतलब पोषण, पालन और बढ़ना है, हमारी कोशिश ही हमारा भविष्य है।
एफएओ का कहना है कि दुनियाभर में 14 फीसदी खाद्य पदार्थ इसलिए खराब हो जाता है क्योंकि उसे काटने, रखने और आपूर्ति करने की समुचित व्यवस्था नहीं है। इसी तरह 17 फीसदी खाद्य पदार्थ उपभोक्ता स्तर पर खराब होता है। अगर इस नुकसान को रोक दिया जाए तो दुनिया की एक बड़ी आबादी जो भूखे सोने को मजबूर है उसका पेट भरा जा सकता है।
भारत में खाने की बर्बादी
भारत में करोड़ों लोग भूखे सोते हैं तो एक बड़ी आबादी को पौष्टिक खाना नहीं मिल पाता है। वो भी तब जब देश में हर साल प्रति व्यक्ति पर 50 किलो खाना बर्बाद होता है। भारत में कुल खाने की बर्बादी का आकलन करेंगे तो हर साल 68,760,163 टन खाना बर्बाद होता है।
चीन में सबसे ज्यादा बर्बादी
अमेरिका में हर साल प्रति व्यक्ति 59 किलो खाना बर्बाद होता है। एक साल में पूरे खाने की बर्बादी का आंकड़ा 19,359,951 टन है। चीन में प्रति व्यक्ति खाने के बर्बादी की दर 64 किलो है। दुनिया के सबसे अधिक आबादी वाले देश में हर साल 91,646,213 टन खाना बर्बाद होता है।
एफएओ की रिपोर्ट के अनुसार अभी दुनिया की 8.9 फीसदी आबादी भूखे पेट सो रही है। वर्ष 2030 तक भूखे पेट सोने वालों का आंकड़ा 84 करोड़ हो जाएगा। दुर्भाग्य ये है कि वर्ष 2014 के बाद दुनियाभर में भूखे पेट सोने वाले लोगों की संख्या धीरे-धीरे बढ़ रही है। युद्धग्रस्त अफगानिस्तान समेत दुनिया के अन्य गरीब और पिछड़े देशों में जिस तरह के हालात हैं उससे आने वाले समय में भुखमरी के हालात और गंभीर होंगे।


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