रायपुर 09 अक्टूबर 2021 (ए)। स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग में आता है। सन 2009 से लगभग 12 वर्ष की अवधि बीत जाने के बाद भी प्रदेश के डेढ़ सौ कर्मियों के वेतनमान में वृद्धि नहीं होने से गृह खर्च चलाना मुश्किल हो गया हैं। आठ हजार, दस हजार के मानदेय पर प्रतिदिन फील्ड में काम करने के दौरान 50 से 100 किमी का दौरा करने पर 3 हजार से 4 हजार पेट्रोल व्यय समन्वयकों को अपनी जेब से देना पड़ता है। बढ़ती हुई महंगाई को देखते हुए जहां अन्य विभाग के संविदा कर्मियों के मानदेय में वृद्धि हुई है वहीं स्वच्छ भारत मिशन के कर्मियों के मानदेय में वृद्धि नहीं होने से स्थिति बेहद खराब है। उक्त जानकारी प्रेस क्लब रायपुर में आयोजित पत्रकारवार्ता में स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) कर्मचारी कल्याण संघ के प्रांताध्यक्ष नीलमणी चंदेल ने दी। चंदेल ने पत्रकारवार्ता में बताया कि इस संबंध में मुख्यमंत्री, राज्यपाल, पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री एवं अपर मुख्य सचिव को ज्ञापन देने के उपरांत भी मानदेय वृद्धि के मामले में निर्णय नहीं लिया गया है। उन्होंने बताया पड़ोसी राज्य मप्र, झारखंड एवं बिहार में समन्वयकों का वेतन 30 से 35 हजार हो चुका है जबकि छग में शासन के जिम्मेदार निर्णय लेने के मामले में उपेक्षित रवैया अपना रहे हैं। मांगों पर विचार नहीं किया गया तो रणनीति बनाकर डेढ़ सौ समन्वयक आंदोलन करने पर मजबूर होंगे। जिसकी जिम्मेदारी शासन में बैठे प्रशासनिक जिम्मेदारों पर होगी।
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