पंजाब-हरियाणा समेत कुछ राज्यों में दिखा भारत बंद का असर

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सुबह 6 से शाम 4 बजे तक रहे बंद के दौरान कई राष्ट्रीय और राज्य हाईवे बंद रहे। ट्रेनों की आवाजाही भी प्रभावित रही। दिल्ली से जाने वाले कई ट्रेनें रद कर दी गईं


कहीं सड़के व रेलवे ट्रेक जाम तो कहीं रहे सामान्य हालात उत्तर भारत के राज्यों में बंद का देखने को मिला असर


नई दिल्ली ,27 सितंबर 2021 (ए )।
केंद्र सरकार की ओर से लाए गए तीन कृषि कानूनों के विरोध में किसान संगठनों की ओर से सोमवार को भारत बंद का आह्वान किया गया था। इस बंद का असर दिल्ली, हरियाणा, पंजाब और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में खास तौर पर दिखा। इसके अलावा हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में भी कुछ स्थानों पर इसका असर देखने को मिला। प्रदर्शनकारियों ने कई स्थानों पर राजमार्गों और मुख्य सड़कों पर यातायात बाधित कर दिया तो कई स्थानों पर रेलवे ट्रेक को भी अवरुद्ध कर किसानों ने रोष जताया। उत्तर भारत में लोगों को यातायात संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ा।
केंद्र सरकार जब से तीन नए कृषि कानून लेकर आई है किसान और किसान संगठन इसके खिलाफ लामबंद हैं। राष्ट्रीय राजधानी नई दिल्ली की सीमाओं पर इन कानूनों के खिलाफ किसान लंबे समय से प्रदर्शन कर रहे हैं। इसी विरोध का प्रदर्शन करने के लिए भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत समेत अन्य समर्थक संगठनों ने भारत बंद का आह्वान किया था। सोमवार की शाम टिकैत ने कहा कि हमारा भारत बंद सफल रहा। हमें किसानों से पूरा समर्थन मिला।


भीषण जाम से जूझे दिल्ली, नोएडा, गुरुग्राम और पंजाब


भारत बंद के कारण दिल्ली, उत्तर प्रदेश, हरियाणा और पंजाब में यातायात व्यवस्था प्रभावित रही। कई प्रमुख मार्गों पर भारी ट्रैफिक जाम की स्थिति बन गई। नोएडा के डीएनडी में भीषण जाम लग गया। दिल्ली-गाजीपुर की तरफ से आने-जाने वाले दोनों मार्गों को यातायात के लिए प्रतिबंधित किया गया था। वहीं, गुरुग्राम-दिल्ली सीमा पर भी हालात गंभीर बने रहे और सैकड़ों वाहन लंबे समय तक जाम में फंसे रहे। इसके अलावा कई राज्यों में रेल यातायात भी प्रभावित रहा। कुछ ट्रेनों को रेलवे ने ही रद्द कर दिया था तो कुछ को प्रदर्शनकारियों ने रोक लिया। वहीं पंजाब के बनूड़ खरड़ हाईवे पर सनेटा में किसानों ने सरकारी बसों समेत सभी वाहनों की आवाजाही रोक दी। पश्चिमी यूपी के सभी जिलों में चिह्नित मार्ग व चौराहों पर किसान संगठन जाम लगाते हुए धरने पर बैठे रहे। मेरठ में किसान संगठन रात से ही तैयारियों में जुट गए थे। सैकड़ों किसानों ने रात कमिश्नरी पर गुजारी और सुबह दस बजते ही चक्का जाम शुरू कर दिया। शहर के व्यापारियों ने भी बाजार बंद रखे। हालांकि, कई जिलों में बाजार सामान्य दिनों की तरह ही खुले, लेकिन कई स्थानों पर किसान नेताओं ने खुली दुकानों को बंद करवा दिया।


हरियाणा : सड़क के साथ-साथ रेल मार्ग भी किए बाधित


हरियाणा के सोनीपत के गन्नौर स्थित भारतीय अंतरराष्ट्रीय बागवानी मार्केट के सामने किसानों ने नेशनल हाईवे 44 जाम कर दिया। चंडीगढ़ से दिल्ली जाने वाले रास्ते पर पत्थर लगा दिए गए। फतेहगढ़ में किसान रेलवे स्टेशन पर पहुंच गए और रेलवे ट्रैक पर खड़े होकर प्रदर्शन किया। रोहतक में प्रदर्शनकारियों ने स्टेट हाईवे जाम कर दिया। सोनीपत रेलवे स्टेशन पर ऑल इंडिया किसान खेत मजदूर संगठन के सदस्यों ने सोनीपत से अंबाला रेलवे रूट बंद कर दिया। इसके साथ ही झज्जर में बेरी के भागलपुरी चौक पर भी किसानों ने जाम लगा दिया।


कुंडली बॉर्डर पर आंदोलन कर रहे एक किसान की मौत


भारत बंद के दौरान कुंडली बॉर्डर पर कृषि कानूनों को रद्द कराने की मांग को लेकर जारी आंदोलन में शामिल पंजाब के एक किसान की मौत हो गई है। शुरुआती जांच में मौत का कारण हार्ट अटैक बताया जा रहा है। हालांकि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने पर ही मौत के सही कारणों का पता लग सकेगा। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए सामान्य अस्पताल में भिजवा दिया है। मृतक की पहचान पंजाब के जिला जालंधर के गांव खेला के रहने वाले बघेल राम (55) के तौर पर हुई है, जो कुंडली बॉर्डर पर जारी आंदोलन में हिस्सा लेने के लिए आए थे।


भाकियू (भानु) ने भारत बंद को आतंकवादी हरकत करार दिया


एक ओर संयुक्त किसान मोर्चा ने देशव्यापी भारत बंद का आह्वान किया तो दूसरी ओर भारतीय किसान यूनियन (भानु) के राष्ट्रीय अध्यक्ष भानु प्रताप सिंह ने लोगों से इस भारत बंद का समर्थन न करने की अपील की। उत्तर प्रदेश के एटा में एक प्रेसवार्ता में उन्होंने इसे आतंकी हरकत करार देते हुए कहा कि केंद्र सरकार को ऐसे संगठनों को दबाने की कोशिश करनी चाहिए जो आतंकी गतिविधियों में शामिल हैं। उधर, भाकियू के तोमर गुट ने भी आज के भारत बंद को समर्थन नहीं दिया जबकि वह इसका आह्वान करने वाले संयुक्त किसान मोर्चा में शामिल है।


राजस्थान में भारत बंद का असर


राजस्थान के कई जिलों में भारत बंद का असर देखने को मिला। यहां के कृषि प्रधान गंगानगर और हनुमानगढ़ जिलों में प्रमुख मंडियां और बाजार पूरी तरह बंद रहे। किसानों ने कई प्रमुख मार्गों पर रैलियां निकालीं और बैठकें कीं। बीकानेर, सीकर और नागौर जैसे जिलों के कई कस्बों में मंडियां और बाजार आंशिक रूप से ही खुलीं। इसके साथ ही राजस्थान के सीमावर्ती जिलों में भारत बंद ने रेल सेवाओं को भी प्रभावित किया। दूसरी ओर, प्रदेश की राजधानी जयपुर में भारतीय किसान यूनियन की अगुवाई में किसानों ने ट्रैक्टर-ट्रॉलियों से रैली निकाली।


मध्यप्रदेश : भारत बंद का नहीं दिखा कुछ विशेष असर


मध्यप्रदेश में भारत बंद का कुछ खास प्रभाव देखने को नहीं मिला। यहां दैनिक और आर्थिक गतिविधियां रोज की तरह ही संचालित होती रहीं। प्रदेश की राजधानी भोपाल और व्यावसायिक केंद्र इंदौर में यातायात व्यवस्था सामान्य रही। हालांकि, राष्ट्रीय किसान मजदूर महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष शिवकुमार कक्काजी ने दावा किया कि भारत बंद पूरी तरह सफल रहा। उन्होंने दावा किया कि भोपाल में राहत इसलिए रही क्योंकि यहां पर अधिकतर नौकरीपेशा और व्यवसायी रहते हैं, किसान नहीं।


जम्मू : रैलियां और प्रदर्शनों के साथ कानून वापसी की मांग


केंद्र के कृषि कानूनों के विरोध में केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर के जम्मू जिले में कई स्थानों पर विरोध-प्रदर्शनों और रैलियों का आयोजन किया गया। सीपीआई (एम) नेता एमवाई तारिगामी की अगुवाई में सैकड़ों कार्यकर्ता और किसान सड़कों पर उतरे और मुख्य मार्ग पर धरना दिया। इससे यहां पर लोगों को यातायात संबंधी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। जिले में जम्मू एवं कश्मीर किसान तहरीक ने प्रदर्शन आयोजित किए। इसके अलावा किसान नेता राशिद पंडित के नेतृत्व में श्रीनगर में भी ऐसा ही एक विरोध-प्रदर्शन आयोजित हुआ।


त्तराखंड : मिला-जुला रहा किसानों के भारत बंद का असर


उत्तराखंड के कई जिलों में बंद का असर दिखाई दिया। हालांकि, ऊधमसिंहनगर में इसका विशेष प्रभाव नहीं दिखाई दिया तो रुद्रपुर में किसानों, व्यापार मंडल पदाधिकारियों और कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने जुलूस निकाला। इस दौरान किसान नेता साहब सिंह सेखो ने मांग पूरी न होने पर आत्मदाह की धमकी दी। प्रदर्शनकारियों ने बाजपुर में हाईवे पर वाहनों को रोक दिया। जसपुर में जुलूस निकालकर बाजार बंद कराए गए। हरिद्वार में भी जुलूस निकला। पुलिस ने किसानों को ज्वालापुर से पहले एकड़ कला गांव में रोका तो किसान वहीं धरना करने लगे।


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