Breaking News

संपादकीय

धनतेरस पर विशेष@ देवताओं को अमृतपान कराकर अमर किया था धन्वंतरि ने

@आयुर्वेद के भी जन्मदाता है धन्वंतरि जी…दीवाली से दो दिन पूर्व ‘धनतेरस’ नामक त्यौहार मनाया जाता है, जो इस वर्ष 29 अक्तूबर को को मनाया जा रहा है। धनतेरस के प्रचलन का इतिहास बहुत पुराना माना जाता है। यह त्यौहार कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी को मनाया जाता है तथा इस दिन आरोग्य के देवता भगवान धन्वन्तरि एवं …

Read More »

कविता @ क्या लिखूँ भोले का नाम

हे भोले मेरे हे भोले मेरे,सब मंगल कर दो काम,छूट जाए ये भागा-दौडी,मिल जाए तेरा ही धाम।हे भोले मेरे …..श्वांसों की धारा में मेरे,मिल जाए तेरा ही नाम,होंठों से बस भोले निकले,और नहीं हो कोई काम।हे भोले मेरे …..सुबह शुरू हो भोले से बस,हो जाए फिर ऐसी शाम,शब्दों के एक-एक मोती से,लिखूं भोले तेरा ही नाम।हे भोले मेरे …जीवन में …

Read More »

लेख@ बेरोजगारी का अस्पताल

भले ही आप शरीर से हट्टे-कट्टे, लम्बें – चौड़े, सुन्दर व उर्जावान रहो। पर आप अपने आप को तब तक पूरी तरह से स्वस्थ महसूस नहीं करेंगे जब तक आपके पास रोजगार का कोई जरिया न हो। यदि आपके पास कोई रोजगार नहीं होगा तो आज के इस जमाने में आपको लोग ताने मार – मारकर ही बीमार कर डालेंगे। …

Read More »

कविता @ देवारी तिहार आवत हे…

हरियर हरियर लुगरा पहिरकेदाई बहिनी मन नाचत हेआरा पारा खोर गली मोहल्लासुवा गीत ल गावत हेसुग्हर संदेश के नेवता देवतदेवारी तिहार आवत हेघर अंगना कोठा कुरियापेरौवसी माटी म छबावत हेजाला जक्कड़ खोंदरा कुरियानिसैईनी चड़के झटावत हेलाली सफेद पिंवरी छुहीघर अंगना ल लिपावत हेकोल्लर कोल्लर माटी लाकेगईरी माटी ल मतावत हेओदरे खोदरे भाड़ी लचिक्कन चिक्कन चिकनावत हेघर मुहाटी के तुलसी चउंरामारबल …

Read More »

लेख@ देशी खिलौनों की खत्म होती चमक

पंजाब के एक छोटे से कस्बे धनौला में पारंपरिक रूप से लकड़ी के खिलौने बनाने वाले सैकड़ों कारीगरों की आर्थिक बदहाली परेशान करने वाली है। दशकों से ये कारीगर बच्चों के लिए लकड़ी के ट्रैक्टर, बस, कम्बाइन, ट्रॉली आदि बनाते आ रहे हैं। पहले हजारों घरों के बच्चे इन खिलौनों से खेलकर खुश होते थे जिससे इन कारीगरों के बच्चों …

Read More »

कविता @ आओ इनसे सीखें…

पहले शिक्षक हैं हमारे मात पिताजिन्होंने अच्छे हमें संस्कार सिखाए।दूसरी शिक्षक है यह दुनिया सारीजो रोज़ हमें कुछ नया सिखाए।क्या कहना है गुलाब के फूलों काजो कांटों में रहकर भी सदा मुस्काए।छोटी सी कीड़ी है हमारी बड़ी शिक्षकजो रात दिन कुछ ना कुछ करती जाए।क्या कहना है इस छोटी सी मधुमक्खीका जो हमें मीठा मीठा शहद खिलाए।कमाल है इस ऊंचे …

Read More »

लेख @ स्ति्रयों की अस्मिता के प्रति पुरुष समाज का नैतिक स्खलन

किसी भी राष्ट्र के निर्माण में महिलाओं का महत्व इसलिए भी सर्वोपरि है कि महिलाएं बच्चों को जन्म देकर उनका पालन पोषण करते हुए उनमें संस्कार एवं सद्गुणों का सर्वोत्तम विकास करती हैं,और राष्ट्र के प्रति उनकी जिम्मेदारी को सुनिश्चित करती है। जिससे ाष्ट्र निर्माण और विकास निर्बाध गति से होता रहे और वही पुरुष समाज स्ति्रयों का अनादर कर …

Read More »

लेख@ कायनात के संकेत और मेरा विश्वास

सुनो दिकु,तुमसे कोई बात नहीं हुई, न कोई खबर आई है, न ही किसी ने कुछ बताया, पर फिर भी मेरे दिल के किसी कोने में एक अजीब-सा यकीन घर कर गया है कि तुम लौटने वाली हो। मुझे लगता है, जैसे कायनात मुझे संकेत दे रही है, जैसे हर तरफ से मुझे यह आवाज़ सुनाई दे रही है कि …

Read More »

कविता @आँधियां हैं और तूफ ान है

आँधिया है और तूफान है, बवंडर का रेला हैजोश-जज्बा मत खोना,न कहना अकेला है।घटा-घनघोर भले छाए,चाहे बादल फट जाएहिमालय सा तू अडिग है,जो यूँ ही हट जाए।वह खून नही पानी है, जो कष्टो में घबराए हैंवह कैसी जवानी है,जो आफत से न टकराए हैंतेरी सोंच छोटी क्यों है,जो हिम्मत क्यो हारे हैंतेरी उड़ान ऊंची है, नापे आसमां यह सारे हैं।बुलन्दी …

Read More »

कविता @यदि जीभ सोचती तो…

वैसे तो जीभ बोलती हैंपर यदि ये सोचती होतीतो सोचती कि. ……कितना बोलता है इंसानभला -बुरा न जाने क्या -क्यामुझसे कहलवा जाता है इंसान।ईर्ष्या ,नफरत से भरा हो,पर मुझसे मिश्री सी बातें कहलवाता है ।हँसी, मजाक कभी यूँ ही बेमतलबबोलता जाता है ।ईश भजन तो ये मुझसेमतलब से करवाता है ।वरना ये तो हर समय मुझसेस्वार्थ ही पूर्ण करवाता है …

Read More »