भारत वह देश है जहां महिलाओं की सुरक्षा और इज्जत का खास ख्याल रखा जाता है। अगर हम इक्कीसवीं सदी की बात करे तो यहां की महिलाएं हर क्षेत्र में पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिला काम कर रही है। अब तो भारत की संसद ने भी महिलाओं के लिये लोकसभा व विधानसभाओं में 33 प्रतिशत आरक्षण का विधेयक …
Read More »संपादकीय
घुमन्तु गीत सीरीज@ शून्यता
आज मैं ऑफिस से जल्दी निकल आयी, मन में एक शून्यता थी, एक अजीब सी शून्यता! उसी शून्यता को मन में लिए हुए मैं किसी अवचेतना में गाड़ी चलाती चली जा रही थी। इसी अवचेतना में मैं गंगा घाट पर जा पहुंची, मन में शून्यता जस की तस व्याप्त थी, और मैं उसी शून्यता के साथ माँ गंगा की ओर …
Read More »लेख@ सोशल मीडिया विनियमन से परे…एक राष्ट्रीय नैतिक कोड के लिए कॉल
हालांकि यह खुला रहता है कि क्या अल्लाहबादिया के बयान ने कानून के किसी भी प्रावधान का उल्लंघन किया है, हालांकि, यह स्पष्ट है कि उनके बयान से अधिकांश आबादी की नैतिक भावनाओं को चोट लगी है। इसके बावजूद, उनके बयान की अवांछनीयता, लोगों को इस तरह से व्यवहार करने की अपेक्षा करना कितना उचित है, जो समाज के लिए …
Read More »लेख@ नियम हमर भलइ बर आय
खोलबहरा नियम ले चलइया मनखे रहिस, फेर अपन गलती ला कभू नइ मानत रहिस। पड़ोसी रामफल संग ओकर बनतेच नइ रहय, फेर जभे गम पाइस कि रामफल अस्पताल मं भर्ती हे, त मंटोरा कहिस, देखे चलिन आखिर म पड़ोसी आय। खोलबहरा फटफटी ल निकालिस। मंटोरा कहिस, हैलमैट पहिर लेव। वो हांसत कहिस, पुलिस के चैकिंग नइ चलत हे, सोझे के …
Read More »लेख@ हिंसा और आंतकवाद का घृणित स्वरूप
जहर बोती विचारधारा समाज को अस्वीकारमानसिक विकृति के शिकार कुछ बंदूकधारियों द्वारा निरिह लोगों की हत्या कर अपना मकसद साध लेना ही आतंकवाद की श्रेणी में नहीं आता है,बल्कि शक्ति संपन्न राष्ट्रों द्वारा अपनी विस्तार वादी सामंती अवधारणा को पूरा करने के लिए छोटे देशों पर हमला करना भी आतंकवाद ही है। इसराइल-हमास, रूस-यूक्रेन युद्ध इसका ताजा उदाहरण है, अमेरिका …
Read More »लेख@ सुरक्षित जीवन के लिए सुरक्षा महत्वपूर्ण है
राष्ट्रीय सुरक्षा दिवस,जो हर साल 4 मार्च को मनाया जाता है, कार्यस्थलों से लेकर सार्वजनिक स्थानों तक जीवन के सभी पहलुओं में सुरक्षा के महत्व की एक महत्वपूर्ण याद दिलाता है। 1972 में भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद द्वारा शुरू किए गए इस दिन का उद्देश्य दुर्घटनाओं और दुर्घटनाओं को रोकने के लिए सुरक्षा चेतना, प्रतिबद्धता और सक्रिय उपायों की …
Read More »लेख@आखिर लोग वोट देने क्यों नहीं निकल रहे?
क्या नागरिक कथित राजनीतिक तानाशाही से उत्पीडि़त महसूस कर रहे हैं और ब्रिटिश राज की याद कर रहे हैं? क्या लोकतंत्र के लिए महत्वपूर्ण चुनावी प्रक्रिया में रुचि कम हो रही है? ये ज्वलंत प्रश्न समाज के विभिन्न क्षेत्रों में उठाए जा रहे हैं,जो चुनावों में मतदाताओं की संख्या में उल्लेखनीय गिरावट से उजागर होते हैं। चुनाव आयोग के सामने …
Read More »@घुमन्तु गीत सीरीज@ संवेदना
नीकी पर फीकी लगे, बिन अवसर की बात!! मैं सदैव यही सुनकर बड़ी हुई हूँ, मेरी माँ सदा ये बात कहती रहती थीं। और वैसे सही भी है, कोई बात कितनी भी अच्छी क्यों न हो, कहाँ बोलना है और कब बोलना है, यह सोच कर ही बोलना चाहिए। मैं पिछले दिनों अपने ऑफिस के काम से नयी दिल्ली गयी …
Read More »लेख @आने वाले कल के लिए जल के लिए भी सोचें
जल की एक बूंद का संरक्षण मानवीय जीवन के लिए अत्यंत उपयोगी है। जल की एक-एक बूंद जीवन के लिए बेशकीमती और बहु उपयोगी है। जल की बर्बादी भविष्य के बहुत बड़े खतरे को इंगित करती है, यदि पृथ्वी पर जल नहीं होगा तो जीवन की संभावनाएं भी विलुप्त हो जाएंगीं। सामान्य तौर पर देखेंगे तो जल की उपलब्धता को …
Read More »लेख@हरियाणा में बोर्ड परीक्षा में नकल पर नायाब सख्ती
चार डीएसपी समेत 25 अफसर सस्पेंड, 17 अन्य फंसेसस्पेंशन वालों में 4 डीएसपी,3 एसएचओ, 8 छात्रों पर भी एफआईआरहरियाणा में इन दिनों 10 वीं और 12 वीं की बोर्ड परीक्षाएं जारी हैं। परीक्षा के पहले ही दिन से नकल रूपी दानव ने अपना प्रभाव दिखाना शुरू कर दिया है। सहयोगी बनने वालों की कोई कमी नहीं। जिसे देखो वहीं चार …
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